Shani Sadesati: कुंभ राशि पर साढ़ेसाती का चल रहा अस्त काल, जानें इस चरण में कैसे फल देते हैं शनि?
Kumbh rashi par sade sati ka prabhav: न्यायदेवता शनि देव इस समय मीन राशि के गोचर में हैं। शनि के मीन गोचर से कुंभ राशि पर शनि की साढ़ेसाती का प्रभाव है। इस समय कुंभ राशि पर साढ़ेसाती का तीसरा (अंतिम) चरण चल रहा है। जानें तीसरे चरण में शनि कैसे देते हैं फल।

Shani ki sade sati ka teesra charan kaisa hota hai: न्यायदेवता शनिदेव जब एक राशि से दूसरे राशि में जाते हैं, तो देश-दुनिया के साथ मेष से लेकर मीन राशि पर अपना प्रभाव डालते हैं। ज्योतिष गणना के अनुसार, वर्तमान में शनि मीन राशि के गोचर में हैं। शनि के मीन राशि में होने से कुछ राशियों पर साढ़ेसाती और कुछ पर ढैय्या का प्रभाव है। साढ़ेसाती के तीन चरण होते हैं। इस समय कुंभ राशि पर साढ़ेसाती का अस्त काल यानी आखिरी (तीसरा) चरण चल रहा है। यह साढ़ेसाती का उतरता हुआ समय होता है, इसलिए इसे 'साढ़ेसाती का उतरना' भी कहा जाता है। शनि के मीन राशि से हटते ही कुंभ राशि वालों को शनि की साढ़ेसाती से छुटकारा मिल जाएगा। जानें साढ़ेसाती के तीसरे चरण में शनि किस तरह के परिणाम देते हैं।
कुंभ राशि वालों से साढ़ेसाती कब हटेगी:
हिंदू पंचांग के अनुसार, 3 जून 2027 को शनि मीन राशि से निकलकर मेष राशि में आ जाएंगे। शनि के मेष राशि में आते ही कुंभ राशि वालों को साढ़ेसाती से छुटकारा मिल जाएगा। हालांकि 20 अक्तूबर 2027 को शनि फिर से मीन राशि में आ जाएंगे, जिससे कुंभ राशि पर साढ़ेसाती फिर से शुरू होगी। कुंभ राशि वालों को 23 फरवरी 2028 को पूरी तरह से साढ़ेसाती से छुटकारा मिल जाएगा।
साढ़ेसाती के तीसरे चरण का मुख्य प्रभाव:
शास्त्रों के अनुसार, शनिदेव जब किसी राशि से निकलते हैं, तो वे जाते-जाते कुछ न कुछ देकर जाते हैं। साढ़ेसाती के पहले दो चरण मानसिक व शारीरिक रूप से कष्टकारी होते हैं। जबकि तीसरा चरण काफी राहत भरा माना जाता है। साढ़ेसाती के अस्त काल में पुरानी बीमारियों, कानूनी विवाद और पारिवारिक समस्याओं से मुक्ति मिलने लगती है। इस दौरान नौकरी में आने वाले बाधाएं दूर होने लगती हैं और व्यापार में होने वाले नुकसान की भरपाई होने लगती है। इस समय व्यक्ति पहले से ज्यादा समझदार और अनुशासन वाला बन जाता है।
साढ़ेसाती के तीसरे चरण में सामने आती हैं ये चुनौतियां:
ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार, शनि की साढ़ेसाती के तीसरे चरण में वाणी अनियंत्रित हो जाती है, जिससे वाद-विवाद बढ़ जाते हैं। इस समय रिश्ते में गलतफहमियां भी हो सकती हैं।
साढ़ेसाती के तीसरे चरण में शनि कर्मों का करते हैं हिसाब:
ज्योतिष शास्त्र में शनि को कर्म फलदाता माना जाता है। कहते हैं कि शनि व्यक्ति को उसके कर्मों के अनुसार फल देते हैं। ज्योतिषाचार्यों का मानना है कि अगर व्यक्ति साढ़ेसाती के दौरान ईमानदारी से काम करता है और धैर्य बनाए रखता है, तो तीसरे चरण में शनि आकस्मिक धन लाभ, मान-सम्मान और बड़ी उपलब्धि प्रदान करते हैं।
डिस्क्लेमर: इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम यह दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य एवं सटीक हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।




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