SAKAT CHAUTH POOJA VIDHI: Sakat Chauth ki Pooja kaise kare Sakat Chauth 2026 Lord Ganesha Pooja vidhi Katha Ganesh Aarti आज शाम में कैसे करें सकट चौथ की पूजा, इस आसान तरीके से तिलकुट का बकरा बनाकर करें गणेश जी की पूजा, एस्ट्रोलॉजी न्यूज़ - Hindustan
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आज शाम में कैसे करें सकट चौथ की पूजा, इस आसान तरीके से तिलकुट का बकरा बनाकर करें गणेश जी की पूजा

SAKAT CHAUTH POOJA VIDHI: सकट चौथ की पूजा शाम के समय करने का विधान है। सकट चौथ की पूजा में तिल का अत्यधिक महत्व है। परंपरा अनुसार, कहीं पर तिल का पहाड़ बनाकर पूजा की जाती है तो कहीं पर तिल के बकरे की बली दी जाती है।

Tue, 6 Jan 2026 11:40 AMShrishti Chaubey लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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आज शाम में कैसे करें सकट चौथ की पूजा, इस आसान तरीके से तिलकुट का बकरा बनाकर करें गणेश जी की पूजा

SAKAT CHAUTH POOJA VIDHI: आज पूरे विधि-विधान के साथ सकट चौथ का व्रत रख गणेश जी और सकट माता की पूजा की जाएगी। सकट चौथ की पूजा शाम के समय करने का विधान है। सकट चौथ की पूजा में तिल का अत्यधिक महत्व है। परंपरा अनुसार, अलग-अलग विधि से पूजा की जाती है। कहीं पर तिल का पहाड़ बनाकर पूजा की जाती है तो कहीं पर तिल के बकरे की बली दी जाती है। आज सकट चौथ पर गणेश जी की पूजा करने से धन-धान्य में वृद्धि होती है। इसे तिलकुटा चौथ भी कहते हैं। आइए जानते हैं सकट चौथ की पूजा की सम्पूर्ण विधि व जरूरी बातें-

आज शाम में कैसे करें सकट चौथ की पूजा, इस आसान तरीके से तिलकुट का बकरा बनाकर करें गणेश जी की पूजा

सुबह में सकट चौथ पूजा विधि

सुबह स्नान आदि कर मंदिर साफ करने के बाद गणेश जी को प्रणाम करें, ध्यान करें। जलाभिषेक कर धूप, दीप, फूल, फल, चंदन, दूर्वा , व अक्षत, से गणेश जी की पूजा करें। प्रभु को भोग लगाएं। हाथ में फूल और अक्षत लेकर सकट चौथ व्रत रखने का संकल्प लें। गणेश जी की आरती करें और अंत में क्षमा मांगे।

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शाम में कैसे करें तिलकुटा चौथ पूजा?

दिनभर व्रत रख गणेश जी और सकट माता का ध्यान कर शाम में पूजा की जाती है। तिल और गुड़ से तिलकुटा बनाएं। सकट चतुर्थी की पूजा के लिए लकड़ी के पटटे पर पीले चंदन या मिट्टी से भगवान गणेश का चित्र बनाएं। एक चौकी पर पीला वस्त्र बिछाकर भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित करें। रोली अक्षत, पीला वस्त्र, सुपारी, पान का पत्ता, पुष्प माला, दूर्वा अर्पित करें। शकरकंद, तिल से बने लड्डू या तिलकुटा का भोग लगाएं। धूप, दीपक जलाकर श्रध्दा से गणेश जी के मंत्र या संकष्टी चतुर्थी व्रत की कथा पढें। गणेश जी की आरती करें व क्षमा प्रार्थना करें

तिल का बकरा

सकट चौथ पर कई जगहों पर पूजा के दौरान गुड़ और तिल का बकरा बनाकर उसको काटने की भी परंपरा है। तिल का बकरा बेटे से कटवाया जाता है। दूब घास से तिल का बकरा काटा जाता है। फिर इसे प्रसाद के रूप में बांट दिया जाता है।

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तिल का पहाड़

वहीं, कई जगहों पर महिलाएं पूजा के दौरान तिल का पहाड़ बनाती हैं। जो बाधाओं का प्रतीक माना जाता है। पूजा के समय पुत्र के द्वारा चांदी के सिक्के से उसे बीच से काटकर संतान के उज्ज्वल भविष्य और मंगल की कामना की जाती है।

कैसे करें सकट चौथ व्रत का पारण?

इस व्रत में भगवान गणेश और चंद्र देव की पूजा का विशेष महत्व है। सकट पर माताएं अपने बच्चे की कुशलता के लिए दिनभर व्रत रखती हैं। रात्रि में चद्रमा को अर्ध्य देकर परिवार की सुख-शांति और संतान की दीर्घायु की कामना करती है। चन्द्र दर्शन होने पर पवित्र जल में गाय का कच्चा दूध व फूल मिलाकर चन्द्रमा को अर्घ्य देकर व्रत पूर्ण किया जाएगा। मंगलवार को चन्द्रोदय रात 8.35 पर होगा।

भोग: इस दिन भगवान को तिल, गुड़, शकरकंद, तिल से बने लड्डू, मोदक, अमरूद का भोग लगाया जाता है।

मंत्र

ॐ गं गणपतये नमः

वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ। निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥

ॐ गणेशाय नमः

ॐ एकदंताय विद्महे, वक्रतुण्डाय धीमहि, तन्नो दन्ती प्रचोदयात्॥

गणेश जी की आरती

जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती पिता महादेवा॥
एक दंत दयावंत, चार भुजा धारी।
माथे सिंदूर सोहे, मूसे की सवारी॥
जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती पिता महादेवा॥
पान चढ़े फल चढ़े, और चढ़े मेवा।
लड्डुअन का भोग लगे संत करें सेवा॥
जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती पिता महादेवा॥
अंधन को आंख देत, कोढ़िन को काया।
बांझन को पुत्र देत निर्धन को माया॥
जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती पिता महादेवा॥
सूर' श्याम शरण आए, सफल कीजे सेवा।
माता जाकी पार्वती पिता महादेवा॥
जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती पिता महादेवा॥
दीनन की लाज रखो, शंभु सुतकारी।
कामना को पूर्ण करो जाऊं बलिहारी॥
जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती पिता महादेवा॥

डिस्क्लेमर: इस आलेख में दी गई जानकारियां धार्मिक मान्यताओं एवं परंपराओं पर आधारित हैं। हम यह दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य एवं सटीक हैं। अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।

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