Quote of the day: बुद्धिमान व्यक्ति को किन 4 हालातों में उठाना पड़ता है कष्ट? पढ़ें चाणक्य नीति
Quote of the day: आचार्य चाणक्य ने एक श्लोक में बताया है कि कब बुद्धिमान व्यक्ति को कष्ट उठाना पड़ता है। आप भी जानें उन परिस्थितियों या हालातों के बारे में जब समझदारी व्यक्ति को भी परेशान होना पड़ता है।

Quote of the day Chanakya Niti 9 June 2026: आचार्य चाणक्य ने चाणक्य नीति में जीवन के तमाम पहलुओं से जुड़े सवालों का विस्तार से वर्णन दिया है। आचार्य चाणक्य के श्लोक आज भी प्रासंगिक हैं। कहते हैं कि आचार्य चाणक्य की नीति का पालन करना मुश्किल है, लेकिन जिस व्यक्ति ने भी इसे अपना लिया उसे सफल होने से कोई नहीं रोक पाया है। चाणक्य नीति के एक श्लोक में आचार्य ने सीख दी है कि बुद्धिमान व्यक्ति को किन स्थितियों में कष्टों का सामना करना पड़ता है। कष्टों से अर्थ व्यक्ति के मानसिक संतुलन और शांति से है। पढ़ें आचार्य चाणक्य का विचार-
श्लोक-
मूर्खशिष्योपदेशेन दुष्टास्त्रीभरणेन च।
दुःखितैः सम्प्रयोगेण पण्डितोऽप्यवसीदति।।
श्लोक का अर्थ:
मूर्ख व्यक्ति को उपदेश देने, दुष्ट स्त्री का पालन-पोषण करने, धन के नष्ट होने और दुखी व्यक्ति के साथ व्यवहार रखने से बुद्धिमान व्यक्ति को भी कष्ट उठाने पड़ते हैं।
श्लोक का सार:
आचार्य चाणक्य कहते हैं कि मूर्ख व्यक्ति को ज्ञान देने का कोई लाभ नहीं होता है, इसकी हानि सज्जन या बुद्धिमान व्यक्ति को ही उठानी पड़ती है। उदाहरण के लिए बया और बंदर की कहानी आपको याद होगी। मूर्ख बंदर को घर बनाने की सलाह देकर बया को अपने घोंसले से ही हाथ धोना पड़ा था। इसी तरह से दुष्ट स्त्री का पालन-पोषण करने से बुद्धिमान व्यक्तियों को दुख ही मिलता है।
दुखी व्यक्तियों से व्यवहार रखने वालों से आचार्य चाणक्य का अर्थ उससे है जो व्यक्ति कई संक्रामक रोगों से पीड़ित है और जिसका धन नष्ट हो चुका है। चाणक्य कहते हैं कि ऐसे इंसान से किसी भी तरह का रिश्ता रखने से व्यक्ति के लिए कष्टकारक हो सकता है। चाणक्य के अनुसार, संक्रामक रोगों से ग्रस्त व्यक्ति के संपर्क में रहने से व्यक्ति के स्वयं भी रोगी होने की आशंका रहती है। जिन लोगों का धन खत्म हो चुका है या दिवालिया हो गए हैं, उन पर अचानक विश्वास करना मुश्किल होता है। यहां चाणक्य का दुखी व्यक्ति से अर्थ विषादग्रस्त इंसान से भी है। आचार्य का मानना है कि जो लोग नकारात्मकता से घिर जाते हैं, उनका दुख से उबरना थोड़ा मुश्किल हो जाता है और उन्हें असफलता ही हाथ लगती है।
इनका करना चाहिए सहयोग: चाणक्य कहते हैं कि जो व्यक्ति अपने दुख से बाहर निकलना चाहते हैं, उनका सहयोग करना चाहिए। चाणक्य का मानना है कि दुखी व्यक्ति से स्वार्थी इंसान ही बचता है।
डिस्क्लेमर: इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम यह दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य एवं सटीक हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।




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