Quote of the day 12 june 2026 hame kaha nahi rehna chaiye aur kis jagah ko turant chhod dena chaiye aaj ka suvichar Quote of the day: व्यक्ति को कहां नहीं रहना चाहिए और किन जगहों को तुरंत छोड़ देना चाहिए?, एस्ट्रोलॉजी न्यूज़ - Hindustan
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Quote of the day: व्यक्ति को कहां नहीं रहना चाहिए और किन जगहों को तुरंत छोड़ देना चाहिए?

Chanakya niti in hindi, Quote of the day 12 june 2026: आचार्य चाणक्य ने अपनी रचना नीति शास्त्र में बताया है कि व्यक्ति को किस स्थान पर नहीं रहना चाहिए और किन जगहों को बिना देरी किए तुरंत छोड़ देना चाहिए। पढ़ें आज का सुविचार। 

Fri, 12 June 2026 06:50 AMSaumya Tiwari लाइव हिन्दुस्तान
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Quote of the day: व्यक्ति को कहां नहीं रहना चाहिए और किन जगहों को तुरंत छोड़ देना चाहिए?

Quote of the day 12 June 2026, आज का सुविचार: आचार्य चाणक्य ने अपने ग्रंथ नीति शास्त्र में व्यक्ति के जीवन से जुड़े तमाम पहलुओं का विस्तार से वर्णन किया है। चाणक्य द्वारा लिखी बातें आज भी प्रासंगिक हैं। कहते हैं कि जो व्यक्ति चाणक्य नीति का पालन करता है, उसे सफल होने स कोई नहीं रोक सकता है। एक श्लोक में आचार्य चाणक्य ने बताया है कि व्यक्ति को किस जगह पर नहीं रहना चाहिए और किस स्थान को तुरंत छोड़ देना चाहिए। पढ़ें आज 12 जून 2026 का सुविचार।

श्लोक:

यस्मिन् देशे न सम्मानो न वृत्तिर्न च बान्धवाः।

न च विद्यागमोऽप्यस्ति वासस्तत्र न कारयेत्॥

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श्लोक का अर्थ:

चाणक्य नीति में वर्णित इस श्लोक का अर्थ है कि जिस स्थान या देश में आपका कोई सम्मान या आदर नहीं हो, जहां आजीविका यानी रोजगार या कमाने का साधन नहीं हो। आपके भाई-बंधु या रिश्तेदार नहीं हो और विद्या यानी शिक्षा पाने का कोई साधन नहीं हो उस स्थान पर एक दिन भी निवास नहीं करना चाहिए।

चाणक्य का मानना है कि व्यक्ति के किसी अन्य देश या जगह पर जाने के पीछे एक मंशा यह होती है कि वहां जाकर कोई नई बात, नई विद्या, रोजगार और नया गुण सीख पाए। लेकिन जहां इनमें से किसी बात की संभावना नहीं है, ऐसे देश या जगह को तुरंत छोड़ देना चाहिए।

एक अन्य श्लोक में आचार्य चाणक्य ने बताया है कि जिस स्थान पर पांच चीजें नहीं होती है, वहां व्यक्ति को एक दिन भी निवास नहीं करना चाहिए।

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श्लोक:

धनिकः श्रोत्रियो राजा नदी वैद्यस्तु पञ्चमः।

पञ्च यत्र न विद्यन्ते न तत्र दिवसं वसेत्॥

श्लोक का अर्थ:

आचार्य चाणक्य के अनुसार, जहां श्रोत्रिय यानी वेद को जानने वाला ब्राह्मण, एक धनी व्यक्ति, न्यायप्रिय शासक या प्रशासन, जल का मुख्य स्रोत और चिकित्सक या डॉक्टर नहीं होता है, वहां व्यक्ति को एक दिन भी निवास नहीं करना चाहिए।

श्लोक का सार:

आचार्य चाणक्य के अनुसार, पांच चीजों का किसी सुरक्षित स्थान या समाज में होना बहुत जरूरी माना गया है। चाणक्य के अनुसार, वेद को जानने वाला ब्राह्मण धर्म की रक्षा करता है। धनवान लोगों से व्यापार में वृद्धि होती है। राजा न्याय और शासन व्यवस्था को स्थिर रखता है। जल और सिंचाई के लिए नदी बहुत जरूरी है। जबकि रोगों से मु्क्ति पाने के लिए डॉक्टर या वैद्य की आवश्यकता पड़ती है। चाणक्य कहते हैं कि जिस स्थान नहीं ये पांच चीजें नहीं होती हैं, उन्हें छोड़कर देना ही उचित होता है।

डिस्क्लेमर: इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम यह दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य एवं सटीक हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।

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