Quote of the day: इन 6 परिस्थितियों में होती है सच्चे मित्र की पहचान, पढ़ें आचार्य चाणक्य के विचार
Quote of the day 10 June 2026: कहावत है सुख में सब साथ देते हैं लेकिन दुख में कोई साथ नहीं देता है। सच्चा मित्र या बंधु वही होता है जो दुख में भी कंधे से कंधा मिलाकर खड़ा होता है। आचार्य चाणक्य ने एक श्लोक में बताया है कि सच्चे मित्र की पहचान कैसे करें?

Quote of the day 10 June 2026, Chakanya niti: आचार्य चाणक्य एक महान राजनीतिज्ञ और कूटनीतिज्ञ थे। उन्होंने अपनी नीति में बताया है कि सच्चे मित्र या बंधु की परख किस तरह कर सकते है। आचार्य चाणक्य ने एक श्लोक के जरिए बताया है कि सुख के समय सभी साथ रहते हैं, लेकिन छह विकट परिस्थितियों में जो साथ नहीं छोड़ता, वही जीवन का सच्चा रक्षक और बंधु ( हितैषी) होता है। आप भी जानें चाणक्य नीति के अनुसार सच्चे मित्र की पहचान कैसे करें।
श्लोक-
आतुरे व्यसने प्राप्ते दुर्भिक्षे शत्रुसंकटे।
राजद्वारे श्मशाने च यस्तिष्ठति स बान्धवः॥
श्लोक का अर्थ:
चाणक्य नीति में वर्णित इस श्लोक का अर्थ है किसी बीमारी या रोग से पीड़ित होने पर, दुख आने पर, अकाल पड़ने पर, शत्रु की ओर से संकट आने पर, श्मशान या किसी मृत्यु के समान समय में जो व्यक्ति साथ नहीं छोड़ता है, वास्तव में वही सच्चा मित्र माना जाता है।
श्लोक का सार:
आचार्य चाणक्य कहते हैं कि कुछ परिस्थितियां ऐसी होती हैं जब सच्चे और वास्तविक मित्र की पहचान होती हैं। व्यक्ति के रोगी होने पर या दुखी होने पर, अकाल पड़ने और शत्रु से किसी प्रकार का संकट होने, किसी मुकदमे आदि में फंस जाने और मरने पर जो व्यक्ति श्मशान घाट तक साथ देता है, वही अपना ( सच्चा मित्र) होता है। चाणक्य कहते हैं कि यह वह मौके होते हैं जब व्यक्ति को किसी दूसरे के सहायता की आवश्यकता होती है। चाणक्य का मानना है कि जो व्यक्ति दूसरों की सहायता करता है, उसको भी सहायता मिलती है। जो समय पर किसी के काम नहीं आता, उसका साथ कोई नहीं देता है। यह श्लोक सुख-दुख और विपरीत परिस्थितियों में सच्चे मित्र और परिवार का महत्व बताता है।
अच्छे इंसान की कैसे करते हैं परख:
यथा चतुर्भिः कनकं परीक्ष्यते निघर्षणं छेदनतापताडनैः।
तथा चतुर्भिः पुरुषं परीक्ष्यते त्यागेन शीलेन गुणेन कर्मणा॥
नीति शास्त्र में एक अन्य श्लोक वर्णित है। जिसमें आचार्य चाणक्य ने बताया है कि इंसान के वास्तविक चरित्र को किस तरह परखा जा सकता है। चाणक्य के अनुसार, जिस तरह से सोने को चार प्रकार से परखा जाता है, पहला घिसकर, दूसरा काटकर, तीसरा तपाकर और चौथा पीटकर। ठीक उसी तरह से अच्छे व्यक्ति की पहचान भी चार कसौटियों पर की जाती है। सच्चे और वास्तविक इंसान में त्याग, शील (आचरण), गुण और कर्म पाए जाते हैं।
डिस्क्लेमर: इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम यह दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य एवं सटीक हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।




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