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Quote of the day: धरती पर स्वर्ग के समान जीवन जीते हैं ऐसे लोग, पढ़ें आचार्य चाणक्य के विचार

Aaj ka suvichar 11 June 2026: आचार्य चाणक्य ने अपनी रचना नीति शास्त्र में बताया है कि किन लोगों के लिए धरती स्वर्ग के समान होती है। पढ़ें आचार्य चाणक्य का सुविचार।

Thu, 11 June 2026 06:08 AMSaumya Tiwari लाइव हिन्दुस्तान
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Quote of the day: धरती पर स्वर्ग के समान जीवन जीते हैं ऐसे लोग, पढ़ें आचार्य चाणक्य के विचार

Quote of the day 11 June 2026, आज का सुविचार: आचार्य चाणक्य ने अपनी रचना नीति शास्त्र में धर्म और कर्म से जुड़े सवाल और उसके जवाब का विस्तार से वर्णन किया है। एक श्लोक में आचार्य चाणक्य ने बताया है कि किन लोगों के लिए धरती स्वर्ग के समान होती है। चाणक्य का कहना है कि जिन लोगों के पास तीन खास चीजें होती हैं, उन्हें धरती पर ही स्वर्ग के समान जीवन प्राप्त होता है। आइए जानते हैं आज 11 जून 2026 का सुविचार।

श्लोक-

यस्य पुत्रो वशीभूतो भार्या छन्दानुगामिनी.

विभवे यश्च सन्तुष्टस्तस्य स्वर्ग इहैव हि॥

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श्लोक का अर्थ:

चाणक्य के अनुसार, जिस व्यक्ति का बेटा वश में रहता है। पत्नी पति की इच्छा के अनुसार ही कार्य करती है और जो व्यक्ति धन के कारण पूरी तरह से संतुष्ट है, उसके लिए पृथ्वी ही स्वर्ग के समान है।

श्लोक का सार:

1. आज्ञा का पालन करने वाला पुत्र: चाणक्य कहते हैं कि जब पुत्र अपने माता-पिता का सम्मान करता है। उन्हें अपना आदर्श बनाता है, तो खुशियों खुद ही घर में प्रवेश करती हैं। आज्ञाकारी पुत्र अपनी जिम्मेदारियों को अच्छी तरह से समझता है, बल्कि उन्हें अच्छे से निभाता है। यही कारण है कि ऐसे पुत्र के माता-पिता धरती पर ही स्वर्ग का आनंद उठाते हैं।

2. सहयोग करने वाली पत्नी: वैवाहिक जीवन में पति-पत्नी के बीच तालमेल होना जरूरी है। दापंत्य जीवन में सामंजस्य तभी आता है, जब जीवनसाथी सहयोगी स्वभाव का होता है। चाणक्य का मानना है कि जिन लोगों को सहयोग देने वाली पत्नी मिलती है, वे भी पृथ्वी पर ही स्वर्ग समान सुख भोगते हैं।

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3. खुद के धन पर ही संतोष: चाणक्य का मानना है कि जो व्यक्ति अपनी आय और उपलब्ध साधनों में ही संतोष रखता है, वह लालच, ईर्ष्या और तनाव से दूर हता है। ऐसे लोग जीवन की हर छोटी-बड़ी खुशी का जश्न मनाते हैं। चाणक्य का मानना है कि ऐसे लोगों के लिए पृथ्वी ही स्वर्ग समान होती है।

श्लोक-

ते पुत्रा ये पितुर्भक्ताः स पिता यस्तु पोषकः।

तन्मित्रं यत्र विश्वासः सा भार्या यत्र निर्वृतिः॥

एक दूसरे श्लोक में चाणक्य बताते हैं कि श्रेष्ठ पुत्र उन्हें ही कहा जाता है, जो पिता के परम भक्त होते हैं। पिता भी वही है जो अपने पुत्र का पालन-पोषण करता है। इसी तरह से मित्र वही है जिस पर विश्वास किया जा सकता है और पत्नी भी वही है जिससे सुख मिलता है।

डिस्क्लेमर: इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम यह दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य एवं सटीक हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।

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