2027 में वृषभ राशि पर शुरू होगा साढ़ेसाती का पहला चरण, जानें शनि कैसे देंगे फल और कब मिलेगी मुक्ति?
Vrishabha rashi sade sati start and end date: वृषभ राशि पर अगले साल साढ़ेसाती का प्रभाव प्रारंभ होगा। साढ़ेसाती की चपेट में आने से वृषभ राशि वालों को किस तरह के परिणाम मिलेंगे और कब मिलेगी मुक्ति, जानिए।

Sade sati effects on vrishabha rashi: ज्योतिष शास्त्र में शनि गोचर या राशि परिवर्तन की घटना अत्यंत महत्वपूर्ण और प्रभावशाली मानी जाती है। शनि नवग्रहों में सबसे धीमी गति का ग्रह है। यह एक राशि में करीब ढाई वर्ष तक रहता है। शनि गोचर के साथ ही कुछ राशियों पर शनि की साढ़ेसाती प्रारंभ होती है। शनि की साढ़ेसाती तब शुरू होती है जब शनि जातक की चंद्र राशि से 12वीं राशि में गोचर करता है। साढ़ेसाती की कुल अवधि साढ़े सात साल की होती है। साढ़ेसाती के तीन चरण होते हैं और प्रत्येक चरण 2.5 वर्ष का होता है। इस समय शनि मीन राशि के गोचर में हैं। अगले साल यानी 2027 में शनि मेष राशि में आ जाएंगे। शनि के मेष गोचर के साथ वृषभ राशि पर साढ़ेसाती का पहला चरण यानी उदय चरण शुरू होगा। हालांकि बीच में कुछ समय के लिए वृषभ राशि वालों को साढ़ेसाती से छुटकारा मिलेगा। जानें वृषभ राशि पर साढ़ेसाती कब प्रारंभ होगी, कब मिलेगी मुक्ति और शनि का कैसा रहेगा प्रभाव।
शनि की साढ़ेसाती वृषभ राशि पर कब शुरू होगी:
पंडित नरेंद्र उपाध्याय के अनुसार, शनि 3 जून 2027 को मेष राशि में आ जाएंगे। शनि के मेष राशि में आते ही वृषभ राशि पर साढ़ेसाती प्रारंभ होगी। 20 अक्टूबर 2027 को शनि फिर से मीन राशि में वापसी करेंगे, जिससे वृषभ राशि से साढ़ेसाती का प्रभाव हट जाएगा। फिर शनि 23 फरवरी 2028 को मेष राशि में गोचर करेंगे, जिससे वृषभ राशि पर फिर से साढ़ेसाती प्रारंभ होगी।
वृषभ राशि वालों को साढ़ेसाती से कब छुटकारा मिलेगा:
ज्योतिष गणना के अनुसार, वृषभ राशि पर शनि साढ़ेसाती का तीसरा या अंतिम चरण 30 मई 2032 को प्रारंभ होगा और 13 जुलाई 2034 को साढ़ेसाती से छुटकारा मिलेगा।
वृषभ राशि पर शनि का कैसा पड़ेगा प्रभाव:
वृषभ राशि के स्वामी शुक्र हैं। शुक्र और शनि के बीच मित्रता का भाव है। शुक्र-शनि के बीच मित्रता है, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि साढ़ेसाती के दौरान वृषभ राशि वालों को शुभ फल ही प्राप्त होंगे। पंडित ज्योतिषाचार्य नरेंद्र उपाध्याय के अनुसार, वृषभ राशि वालों के लिए यह समय कम परेशानी वाला साबित हो सकता है। इस अवधि में रिश्तों और कामकाज में बाधाएं आ सकती हैं। कार्यों में सफलता पाने के लिए जातक को कड़ी मेहनत या लगन से काम करना पड़ सकता है। अनावश्यक खर्च सामने आ सकते हैं। गुप्त शत्रुओं से परेशान हो सकते हैं। अनिद्रा की स्थिति बन सकती है। वृषभ राशि में शनि साढ़ेसाती के पहले चरण में सेहत से जुड़ी परेशानी, अपमानित होने का भय, रिलेशनशिप में परेशानी, आर्थिक तंगी और रिश्तों में उतार-चढ़ाव जैसी मुख्य परेशानी सामने आ सकती है। कर्ज के कारण मानसिक तनाव घेर सकता है।
अशुभ शनि के उपाय-
- शनिदेव की कृपा पाने के लिए हनुमान जी और शिवजी की आराधना करनी चाहिए।
2. प्रतिदिन या शनिवार को शनि मंत्र "ॐ शं शनैश्चराय नमः" का जाप करना चाहिए।
3. शनिवार को सरसों के तेल का दान अत्यंत शुभ माना जाता है।
4. शनिवार को पीपल के पेड़ के सामने सरसों के तेल का दीपक जलाना चाहिए और उसकी परिक्रमा करनी चाहिए।
डिस्क्लेमर: इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम यह दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य एवं सटीक हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।




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