Kamada Ekadashi: आज कामदा एकादशी पर इतने बजे से रहेगा पूजा का शुभ मुहूर्त, जानें कैसे करें व्रत का पारण
Kamada Ekadashi 2026 paran muhurat time vidhi: मान्यताओं की मानें तो कामदा एकादशी का व्रत रखने से पुण्य फल की प्राप्ति होती है। वहीं, कामदा एकादशी की पूजा के साथ-साथ पारण का भी शुभ मुहूर्त देखा जाता है।

Kamada Ekadashi 2026 Muhurat, कामदा एकादशी: साल में एक बार कामदा एकादशी का व्रत रखा जाता है। ये व्रत भगवान विष्णु को समर्पित है। पंचांग के अनुसार, इस साल चैत्र महीने के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि के दिन कामदा एकादशी का व्रत रखा जाएगा। उदया तिथि में 29 मार्च को कामदा एकादशी का व्रत रख भक्त जन विधिवत श्री नारायण की आराधना करेंगे। कामदा एकादशी की पूजा ही नहीं पारण का भी शुभ मुहूर्त देखा जाता है। ऐसे में आइए जानते हैं कामदा एकादशी पर पूजा और व्रत पारण का शुभ मुहूर्त और विधि-
आज कामदा एकादशी पर इतने बजे से रहेगा पूजा का शुभ मुहूर्त, जानें कैसे करें व्रत का पारण
कामदा एकादशी पर पूजा के मुहूर्त
- ब्रह्म मुहूर्त: 04:42 बजे से 05:28 बजे (सुबह)
- अभिजित मुहूर्त: दोपहर 12:01 बजे से दोपहर 12:51 बजे
- विजय मुहूर्त: दोपहर 02:30 बजे से दोपहर 03:19 बजे
- गोधूलि मुहूर्त: शाम 06:36 बजे से शाम 06:59 बजे
- अमृत काल: दोपहर 01:02 बजे से दोपहर 02:38 बजे तक
कामदा एकादशी व्रत पारण का शुभ मुहूर्त- चैत्र महीने के शुक्ल पक्ष एकादशी तिथि का व्रत पारण 30 मार्च को किया जाएगा। इस दिन पारण (व्रत तोड़ने का) शुभ समय सुबह 06:14 मिनट से सुबह 07:09 मिनट तक रहेगा। पारण तिथि के दिन द्वादशी समाप्त होने का समय सुबह 07:09 मिनट रहेगा।
जानें कैसे करें व्रत का पारण: कामदा एकादशी का व्रत पारण कैसे करें?
- स्नान आदि कर साफ वस्त्र धारण करें
- भगवान श्री हरि विष्णु का जलाभिषेक करें
- प्रभु का पंचामृत सहित गंगाजल से अभिषेक करें
- अब प्रभु को पीला चंदन और पीले पुष्प अर्पित करें
- मंदिर में घी का दीपक प्रज्वलित करें
- ॐ नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का जाप करें
- पूरी श्रद्धा के साथ भगवान श्री हरि विष्णु और लक्ष्मी जी की आरती करें
- प्रभु को तुलसी सहित भोग लगाएं
- अंत में व्रत संकल्प पूर्ण करें व क्षमा प्रार्थना करें
- प्रसाद ग्रहण कर व्रत का पारण करें
कामदा एकादशी व्रत पारण के समय ध्यान रखें ये बातें
एकादशी व्रत के अगले दिन सूर्य के उदय होने के बाद पारण किया जाता है। कामदा एकादशी व्रत का पारण द्वादशी तिथि समाप्त होने से पहले करना जरूरी माना जाता है। अगर द्वादशी तिथि सूर्योदय से पहले समाप्त हो जाती है तो कामदा एकादशी व्रत का पारण सूर्योदय के बाद ही किया जाता है। द्वादशी तिथि के भीतर पारण न करना शुभ नहीं माना जाता है। कामदा एकादशी व्रत का पारण हरि वासर के दौरान भी नहीं करना चाहिए। जो विष्णु भक्त व्रत कर रहे हैं, उन्हें व्रत तोड़ने से पहले हरि वासर समाप्त होने का इंतजार करना चाहिये। हरि वासर द्वादशी तिथि की पहली एक चौथाई अवधि मानी जाती है। व्रत तोड़ने के लिए सबसे शुभ समय प्रातः काल का होता है। कुछ कारणों की वजह से अगर कोई प्रातः काल पारण करने में सक्षम नहीं है तो उसे मध्याह्न के बाद पारण करना चाहिए।
डिस्क्लेमर: इस आलेख में दी गई जानकारियां मान्यताओं पर आधारित हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।




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