Hanuman Janmotsav 2026: जब हनुमान जी की पूंछ में मां पार्वती ने वास कर दहन की थी लंका, पढ़ें कथा
Hanuman janmotsav 2026: पौराणिक ग्रंथों में हनुमान जी की पूंछ से जुड़े कई अद्भुत प्रसंग मिलते हैं। रामायण में जिक्र है कि जब भी कोई राक्षस उनकी पूंछ पकड़ने की कोशिश करता था, तो वह असफल हो जाता था। उनकी पूंछ में इतनी शक्ति थी कि उसे कोई कंट्रोल नहीं कर सकता था।

हनुमान जी के जन्मोत्सव का पर्व इस बार 2 अप्रैल 2026 को मनाया जा रहा है। इस दिन बजरंगबली की विशेष पूजा अर्चना की जाती है। हनुमान जी के भीतर कई दिव्य शक्तियां निहित हैं। ये शक्तियां न केवल उन्हें महाबली बनाती हैं, बल्कि उन्हें अष्ट सिद्धियों और नव निधियों का स्वामी भी बनाती हैं। हनुमान जी से जुड़े कई ऐसे रहस्य और कथाएं हैं, जिसके बारे में जानने के लिए भक्त उत्सुक रहते हैं।
पूंछ से जुड़े प्रसंग
इसी तरह पौराणिक ग्रंथों में हनुमान जी की पूंछ से जुड़े कई अद्भुत प्रसंग मिलते हैं। रामायण में जिक्र है कि जब भी कोई राक्षस उनकी पूंछ पकड़ने की कोशिश करता था, तो वह असफल हो जाता था। उनकी पूंछ में इतनी शक्ति थी कि उसे कोई कंट्रोल नहीं कर सकता था। एक ऐसा ही प्रसंग रावण की लंका दहन का मिलता है, जिसे बजरंगबली ने अपनी पूंछ से जलाई थी। कहा जाता है कि उनकी पूंछ में मां पार्वती का वास होता है। चलिए इसके पीछे की कथा को जानते हैं।
शिवजी के हैं रुद्रावतार
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, हनुमान जी भगवान शिव के रुद्रावतार हैं। कहा जाता है कि उनकी पूंछ में शिवत्व का तेज समाहित था। साथ ही, इसे कुंडलिनी शक्ति का भी प्रतीक माना जाता है। कुंडलिनी शक्ति एक ऐसी आध्यात्मिक ऊर्जा, जो व्यक्ति को ऊंचे स्तर की चेतना तक पहुंचाती है।
बहुत शक्तिशाली है हनुमान जी की पूंछ
हनुमान जी की पूंछ में ऊर्जा और नियंत्रण शक्ति विद्यमान थी। मान्यता है कि उनकी पूंछ में इतनी शक्ति थी कि कोई दैत्य या देवता भी उसे बांध नहीं सकता था। शिव पुराण में वर्णन है कि उनकी पूंछ पर महादेव की कृपा है। लंका दहन के दौरान उन्होंने अपनी पूंछ को कभी लंबा किया तो कभी छोटा, जिससे राक्षस उनकी ताकत और चाल को समझ ही नहीं पाए। सामान्य समय में उनकी पूंछ शांत और साधारण दिखती थी, लेकिन जब जरूरत पड़ी, तो वही पूंछ राक्षसों के लिए विनाशकारी साबित हुई।
मां पार्वती से जुड़ी है कथा
एक पौराणिक कथा के मुताबिक, एक बार रावण ने भगवान शिव से उनका महल मांग लिया था। यह महल माता पार्वती के लिए बना था। जब यह बात माता पार्वती को पता चली, तब माता पार्वती अत्यंत क्रोधित हो गई थीं। इसके बाद भगवान शिव ने उन्हें आश्वासन दिया कि त्रेता युग में जब हनुमान अवतार के रूप में होंगे, तब वो उनकी पूंछ में मां पार्वती का वास कराएंगे और उसी के जरिए लंका दहन कर उनका क्रोध शांत होगा। यही वजह है कि हनुमान जी की पूंछ में माता पार्वती का निवास माना जाता है।
पूंछ का रहस्य
हनुमान जी की पूंछ उनकी सिद्धियों का भी प्रतीक थी। वे अपनी इच्छा से इसे लंबा या छोटा कर सकते थे। लंका दहन के समय उन्होंने अपनी पूंछ को कई बार बढ़ाया, जिससे पूरी नगरी आग की चपेट में आ गई। ऐसे में आज भी भक्त हनुमान जी की पूंछ की परिक्रमा करते हैं और इसे रक्षा, शक्ति और इच्छापूर्ति का प्रतीक मानते हैं।
डिस्क्लेमरः इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम यह दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य एवं सटीक हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।




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