Hanuman Janmotsav 2026 2 April 2026 vidhyawaan guni ati chatur ram ke liye bhakti know hanuman ji Hanuman Janmotsav 2026: विद्यावान गुणी अति चातुर और राम के प्रति अटूट भक्ति, पढ़ें हनुमान जी के इन गुणों के बारे में, एस्ट्रोलॉजी न्यूज़ - Hindustan
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Hanuman Janmotsav 2026: विद्यावान गुणी अति चातुर और राम के प्रति अटूट भक्ति, पढ़ें हनुमान जी के इन गुणों के बारे में

शक्ति और ज्ञान का प्रदर्शन नहीं, उसे पचा जाने की अदम्य क्षमता का नाम है- हनुमान। सर्वशक्तिमान होकर भी विनीत भाव से श्रीराम के सेवक होने का गौरव लिए हनुमान यही सीख देते हैं कि शक्ति और ज्ञान का अहंकारपूर्ण प्रदर्शन न हो। 

Tue, 31 March 2026 12:34 PMAnuradha Pandey लाइव हिन्दुस्तान, आर एन त्रिपाठी, प्रोफेसर बीएचयू
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Hanuman Janmotsav 2026: विद्यावान गुणी अति चातुर और राम के प्रति अटूट भक्ति, पढ़ें हनुमान जी के इन गुणों के बारे में

शक्ति और ज्ञान का प्रदर्शन नहीं, उसे पचा जाने की अदम्य क्षमता का नाम है- हनुमान। सर्वशक्तिमान होकर भी विनीत भाव से श्रीराम के सेवक होने का गौरव लिए हनुमान यही सीख देते हैं कि शक्ति और ज्ञान का अहंकारपूर्ण प्रदर्शन न हो। उसमें केवल सात्विकता और लोक कल्याण का भाव हो। इस साल हनुमान जन्मोत्सव 2 अप्रैल को मनाया जा रहा है।

हनुमान जी का बालपक्ष

हनुमान ज्ञानियों में अग्रगण्य अर्थात सबसे ऊपर हैं। भक्ति से आशय शील, संयम भरा जीवन और कर्म अर्थात व्यक्ति के जीवन का क्रियापक्ष, यदि तीनों का समन्वय और प्रेरणा पुंज कोई है, तो वह हनुमान हैं। उनके बालपक्ष को देखिए, वे अपने बाल रूप में ही सूर्य को फल समझ कर निगलने का प्रयास करते हैं, जो उनका असीम शक्तिमान व अतीव जिज्ञासु होने की कथा भर नहीं है। यह समाज को भी संदेश है कि वह अपने बालकों को ऐसा उत्साह और उचित मार्गदर्शन दें, ताकि उनमें रचनात्मकता का विकास बचपन से ही हो।

विद्यावान गुणी अति चातुर...

हनुमान जब और बड़े होते हैं, तो सेवा और निष्ठा के प्रतीक रूप में राम से मिलते हैं। अब यहां राम से ब्राह्मण वेष में मिलना एक कुशल राजनीतिज्ञ के रूप में उनका कार्य दर्शाता है। पहले विपक्ष के बारे में जान लेना और फिर अपनी बात कहना, राजनीति का प्रथम सोपान है। जब वे उनके वास्तविक स्वरूप को जान लेते हैं, तब उन्हें अपना वास्तविक परिचय देते हैं। उनकी बुद्धिमत्ता यह है कि समय के अनुकूल अगर कोई प्रस्ताव लाया जाए, तभी वह मान्य होता है। उन्होंने सुग्रीव की बात तब उठाई, जब उन्होंने राम को पहचान लिया और अपने अनुकूल जान लिया।

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स्वामी के प्रति सदा समर्पित

आज समाज में जिस विश्वास का अभाव होता जा रहा है, हनुमान इसी विश्वास के प्रतीक हैं। वे जब राम-सुग्रीव की मित्रता कराते हैं, तो अग्नि को साक्षी बनाते हैं अर्थात कोई कपट, द्वेष नहीं। हनुमान शक्ति के अगाध स्रोत हैं, परंतु उन्हें उनकी शक्ति का बोध कराना पड़ता है। जब जामवंत ने शक्ति का बोध कराया, तो हनुमान ने अहंकार से नहीं, बल्कि राम के प्रभाव को ही आधार मानकर सागर पार किया और लंका से सीता का पता लगाकर लौटे। ऐसी कई घटनाएं हनुमान के अहंकार मुक्त, त्याग, सेवा और अपने स्वामी की शक्ति के प्रति सदा समर्पित रहने की अपार श्रद्धा को प्रकट करती हैं। कब, क्या करना है?अगर व्यक्ति जान जाए, तो यह उसकी सबसे बड़ी योग्यता मानी जाती है, जो हनुमान में है। ‘मसक’ समान रूप धारण करके लंका में जाते हैं। फिर वही हनुमान सुरसा के अनुरूप समुद्र में सत योजन तक का अपना मुंह बढ़ा लेते हैं। ब्राह्मण भेष में विभीषण से मिलते हैं, वहीं एक छोटे से बंदर के वेष में सीता से मिलते हैं और सीता को राम की विजय के प्रति आश्वस्त भी कर देते हैं।

नीति और ज्ञान के सागर

हनुमान जब लंका जाते हैं, तो उनकी बुद्धि, नीति और ज्ञान का प्रदर्शन देखकर सभी चकित हो जाते हैं। हनुमान विभीषण को राम के पक्ष में लाकर खड़ा कर देते हैं। हनुमान रुद्र के अवतार हैं। उनके क्रोध और न्याय से शनि और पौंड्रक भी नहीं बच पाते हैं। धर्म के विरुद्ध खड़े राक्षसों का वह वध करते हैं। सत्य की रक्षा करते हैं और स्वयं की प्रशंसा से सदा बचते रहते हैं। कलयुग में भवसागर पार करने का साधन अगर कोई सीखना चाहे, तो हनुमान के उस अहंकार मुक्त, त्याग सेवा भरे जीवन से सीखे, जिसमें उत्साह, बुद्धि, परोपकार और संयम की पराकाष्ठा है।

प्रभु के चरणों में रहना

इतने त्यागवान, धीरवान, वीर, बलवान हनुमान राम दरबार में राम के चरणों में बैठते हैं। यह एक आदर्श है कि जब आपके पास शक्ति, सामर्थ्य पर्याप्त हो, तब भी आप विनम्र बने रहें। आप संयम और त्याग के बल पर ही सदा बना रहने वाला सम्मान प्राप्त कर सकते हैं। विभीषण,अंगद, निषादराज सब अयोध्या से चले गए, लेकिन हनुमान प्रभु के चरणों में रहकर मानों यह सिद्ध कर दिया कि मेरा नाम हनु-मान है अर्थात मैं मान-अपमान पर ध्यान नहीं देता, बल्कि अपना लक्ष्य देखता हूं।

राम के प्रति अटूट भक्ति

हनुमान अपने चरित्र से एक आदर्श स्थापित करते हैं कि सच्ची भक्ति वह है, जिसमें स्वयं को भूलकर दूसरों की सेवा हो। रामायण के अमर चरित्र हनुमान से अटूट भक्ति, असंभव को संभव बनाने का साहस और पूर्ण समर्पण की प्रेरणा मिलती है। आज जब हम अपने कर्तव्यों से विमुख होते जा रहे हैं, तब हनुमान सिखाते हैं कि भक्ति से ही जीवन की दिशा मिलती है। दूसरा, शक्ति और बुद्धि का संतुलन जीवन में होना चाहिए। लंका दहन का प्रसंग इसका जीवंत उदाहरण है। उन्होंने अपनी पूंछ में आग लगवाई और पूरी लंका को जलाकर रावण को चुनौती दी। यह एक सीख है कि हमें अपनी शारीरिक-मानसिक शक्तियों का उपयोग बुद्धिपूर्वक करना चाहिए। हमें अपने जीवन में हनुमान के गुणों को आत्मसात करना चाहिए, ताकि हम मानव-कल्याण के कार्य अहंकार मुक्त होकर कर सकें।

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