Hanuman Jayanti 2026 upaay: कब है हनुमान जयंती, श्री हनुमान जी की कृपा प्राप्ति के लिए ये हैं विशेष उपाय
Hanuman jayanti date: चैत्र शुक्ल पक्ष पूर्णिमा तिथि का मन 2 अप्रैल दिन बृहस्पतिवार को होगा। पूर्णिमा तिथि का आरंभ 1 अप्रैल 2026 दिन बुधवार को प्रातः 6:16 बजे से आरंभ होकर 2 अप्रैल 2026 दिन बृहस्पतिवार को प्रातः 6:29 बजे तक व्याप्त होगा।

चैत्र शुक्ल पक्ष पूर्णिमा तिथि का मन 2 अप्रैल दिन बृहस्पतिवार को होगा। पूर्णिमा तिथि का आरंभ 1 अप्रैल 2026 दिन बुधवार को प्रातः 6:16 बजे से आरंभ होकर 2 अप्रैल 2026 दिन बृहस्पतिवार को प्रातः 6:29 बजे तक व्याप्त होगा। इस प्रकार व्रत की पूर्णिमा का मान 1 अप्रैल को होगा तथा स्नान दान के पूर्णिमा का मान 2 अप्रैल दिन बृहस्पतिवार को होगा। दक्षिण मत के अनुसार श्री हनुमान जयंती का पर्व 2 अप्रैल दिन बृहस्पतिवार को होगा।
हनुमान जयंती का महत्व
1. हनुमान जयंती के दिन हनुमान जी की पूजा और आराधना करने से व्यक्ति को परेशानियों से मुक्ति मिलती है।
2. जीवन में सुख शांति की प्राप्ति होती है।
3. हनुमान जयंती के दिन शनि से संबंधित चुनौतियां पर काबू पाने के लिए हनुमान जी की आराधना तथा इस व्रत करना शुभ होता है।
4. मंगल से संबंधित नकारात्मकता दूर होती है।
5. बल पुरुष में वृद्धि होता है।
6. भूत प्रेत पिशाच से मुक्ति प्राप्ति के लिए भी हनुमान जयंती के दिन भगवान हनुमान जी की आराधना करनी चाहिए।
7. नौकरी तथा व्यापार में उन्नति के लिए हनुमान जयंती के दिन पूजा अर्चना करें ।
8. पारिवारिक अशांति को दूर करने के लिए भी इस दिन हनुमान जी की पूजा करनी चाहिए।
कैसे करें हनुमान जी की पूजा:
हनुमान जयंती के दिन दैनिक कार्यों स्नान आदि से निवृत होकर श्री हनुमान जी की मूर्ति को स्थापित करें। फिर शुद्ध जल से स्नान कराएं ।
फिर वस्त्र, यज्ञोपवीत चढ़ाये, सिंदूर, अबीर, गुलाल, चंदन, रोली, अक्षत, फूल, फूल माला, मिष्ठान, बेसन या बुदी के लड्डू तथा नारियल क्रमशः हनुमान जी महाराज को अर्पित करें
उसके बाद हनुमान चालीसा, सुंदरकांड का पाठ करें अथवा हनुमान जी के किसी मंत्र का जाप करें।
ॐ हं हनुमते नमः
श्री हनुमान जी की कृपा प्राप्ति का विशेष उपाय
हनुमान जयंती से आरंभ करके प्रतिदिन हनुमान चालीसा का पाठ करें।
श्री हनुमान जी के समक्ष तीन कोणों वाला दीपक जलाएं ।
श्री हनुमान जी को चोला चढ़ाएं ।
गुड़ चने का प्रसाद अर्पित करें तथा वीडा अर्पित करें।
बजरंग बाण का पाठ तथा सुंदरकांड का पाठ भी विशेष फलदाई होता है ।
चमेली के तेल में सिंदूर लगाकर श्री हनुमान जी को लगाने से रोगों का नाश होता है।
“ॐ हं हनुमते नमः” तथा “ॐ हं हनुमते रुद्रात्मकाय हुं फट” इस मंत्र का जप विशेष लाभ प्रदायक होता है।
इस चौपाई का करें पाठ
दीन दयाल बिरिदु संभारी
हरहु नाथ मम संकट भारी
रामचरितमानस की यह चौपाई तुलसीदास जी ने उस समय के लिए लिखी थी, जब हनुमान जी माता सीता का पता लगाते हैं और लंका से माता सीता से विदा लेकर प्रभु राम के पास वापस लौटने को होते हैं। तब माता सीता हनुमान जी से प्रभु राम के लिए एक संदेश कहती हैं कि दीनों पर दया करने वाले प्रभु राम हमारे इस विकट संकट को दूर कीजिए। -ज्योतिर्विद दिवाकर त्रिपाठी के सौजन्य से




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