दिवाली की शाम से लेकर रात तक 5 मुहूर्त में करें आज लक्ष्मी पूजा, जानें पूजा की संपूर्ण विधि
Diwali 2025 Timing: दीपकों का ये त्योहार मुख्य रूप से धन की देवी मां लक्ष्मी और बुद्धि के देवता श्री गणेश जी को समर्पित है। दिवाली के दिन शाम में शुभ मुहूर्त देखर लक्ष्मी, गणेश के साथ कुबेर जी की भी पूजा की जाती है।

Diwali 2025 Timing: इस साल 20 अक्टूबर को कार्तिक मास की दिवाली मनाई जाएगी। दीपकों का ये त्योहार मुख्य रूप से धन की देवी मां लक्ष्मी और बुद्धि के देवता श्री गणेश जी को समर्पित है। दिवाली के दिन शाम में शुभ मुहूर्त देखर लक्ष्मी, गणेश के साथ कुबेर जी की भी पूजा की जाती है। इस दिन विधिवत लक्ष्मी माता का ध्यान करने से घर में समृद्धि का वास रहता है। इसलिए आइए जानते हैं दिवाली पर शाम से लेकर रात तक पूजा के शुभ मुहूर्त और सम्पूर्ण विधि-
दिवाली की शाम से लेकर रात तक 5 मुहूर्त में करें आज लक्ष्मी पूजा
अपराह्न मुहूर्त (चर, लाभ, अमृत) - 03:44 पी एम से 05:46 पी एम
सायाह्न मुहूर्त (चर) - 05:46 पी एम से 07:21 पी एम
वृषभ काल - 07:08 पी एम से 09:03 पी एम
रात्रि मुहूर्त (लाभ) - 10:31 पी एम से 12:06 ए एम, अक्टूबर 21
उषाकाल मुहूर्त (शुभ, अमृत, चर) - 01:41 ए एम से 06:26 ए एम, अक्टूबर 21
पूजा की संपूर्ण विधि
दिवाली के दिन संध्या या रात्रि पूजा कब विशेष महत्व माना जाता है। ज्यादातर लोग इसी समय दिवाली पर पूजा करते हैं। इसलिए संध्या समय स्नान आदि से निर्वित्त होकर पूजा स्थान को साफ करें और पूरे घर में गंगाजल का छिड़काव करें। अब एक लकड़ी की चौकी की स्थापित करें और उस पर लाल रंग का साफ कपड़ा बिछाएं। अब मुट्ठी भर चावल या अनाज के ऊपर कलश स्थापित करें। कलश में पवित्र जल, फूल, एक सुपारी, अक्षत, इलायची और चांदी का सिक्का डालें। अब कलेश के मुख को पांच आम के पत्तों से ढक दें। इसके बाद माता लक्ष्मी और गणेश जी की नई मूर्ति स्थापित करें। प्रभु का जलाभिषेक करें फिर गंगाजल और पंचामृत से स्नान कराएं। इसके बाद दोबारा पवित्र जल से जलाभिषेक करें। साफ कपड़े से मूर्ति को पोछकर चौकी पर स्थापित कर दें।
अब गणेश जी को पीला चंदन और लक्ष्मी माता को लाल चंदन या कुमकुम का तिलक लगाएं साथ ही कलश पर भी तिलक लगाएं। अब प्रभु को फल, पान के पत्ते, फूल, मिठाई, इलायची, अक्षत, सुपारी अर्पित करें। गणेश जी को पीले फूलों की माला और लक्ष्मी माता को कमल गट्टे की माला पहनाएं। अब धूपबत्ती और घी का दीपक प्रज्वलित करें। गणेश जी को लड्डुओं का और मां लक्ष्मी को खीर का भोग लगाएं। पूरी श्रद्धा के साथ पहले भगवान श्री गणेश की आरती करें फिर उसके बाद माता लक्ष्मी और कुबेर जी की आरती गाएं। अंत में क्षमा प्रार्थना जरूर करें।
डिस्क्लेमर: इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम यह दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य एवं सटीक हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।




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