Mahakal Bhasm Aarti: महाकालेश्वर ज्योर्तिलिंग में ऐसे होती है भस्म आरती, सिर्फ इनकी आज्ञा से खुलते हैं मंदिर के पट
Mahakaleshwar Jyotirlinga Bhasm Aarti: महाकाल के दरबार में जाना हर किसी की ख्वाहिश होती है। अगर आपने अभी तक यहां की भस्म आरती नहीं अटैंड की है तो आज जानें कि यहां पर सब कुछ कैसे होता है?

मध्य प्रदेश के उज्जैन में स्थित श्री महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग में होने वाली महाकाल बाबा की भस्म आरती बेहद बी खास मानी जाती है। मान्यता है कि महाकाल के दरबार में सच्चे मन से की गई पूजा से कालदोष, ग्रहदोष और अकाल मृत्यु के योग आसानी से शांत हो जाते हैं। वहीं जिन लोगों की कुंडली में राहु-केतु का प्रभाव अशुभ होता है, उन्हें भी इस दरबार में आकर शांति मिलती है। कहा तो ऐसा भी जाता है कि जैसे ही कोई भक्त महाकाल की नगरी में प्रवेश करता है, वैसे ही काल का प्रभाव उस पर कम होने लगता है। साथ ही धीरे-धीरे इंसान के कर्मों का बंधन भी हल्का पड़ता है और मन में एकदम से शांत हो जाता है। यही वजह है कि लाखों शिव भक्त यहां पर आकर सुकून महसूस करते हैं।
दिन में कितनी बार होती है आरती?
अगर आपने अब तक भस्म आरती सिर्फ रील्स या तस्वीरों में ही देखी है तो एक बार इसका अनुभव करना बहुत ही जरूरी है। भस्त आरती के दिव्य वातावरण और असीम ऊर्जा को शब्दों में बयान करना मुश्किल ही है। बता दें कि यहां पर दिन भर में महाकाल की 6 आरती होती है, लेकिन इनमें से सबसे खास और प्रसिद्ध भस्म आरती ही मानी जाती है। यह आरती ब्रह्म मुहूर्त में होती है और इसी वजह से ये और भी खास बन जाती है। इस आऱती में भगवान शिव के स्वरूप महाकाल को विशेष रूप से सजाया जाता है। इससे पहले उन्हें भस्म अर्पित किया जाता है। ऐसी भी मान्यता है कि महाकाल के दर्शन करने के बाद जूना महाकाल के दर्शन जरूर करने चाहिए।
भस्म आरती के नियम
भस्म आरती के कुछ ऐसे नियम हैं जिनके बिना इसकी कल्पना भी नहीं की जाती है। दरअसल महाकाल दरबार के पट तभी खुलते हैं जब सुबह भगवान वीरभद्र से इसके लिए आज्ञा ली जाती है। आज्ञा लेने के बाद मंदिर के गर्भगृह में मौजूद सभी देवी-देवताओं की पूजा होती है और इसके बाद महाकाल की भस्म आरती होती है। इस आरती में शामिल की जाने वाली भस्म महानिर्वाणी अखाड़े की ओर से आती है। भस्म आरती के दौरान जब महाकाल को भस्म अर्पित किया जाता है तो इस दौरान महिलाओं को इसे देखने की मनाही होती है। जब महाकाल को भस्म से स्नान करवाया जाता है तब उनका निराकार रूप दिखता है। ऐसी भी मान्यता है कि महाकाल के दर्शन काल भैरव के दर्शन के बिना अधूरा है। ऐसे में उज्जैन में आकर काल भैरव के दर्शन करना भी जरूरी होता है।
डिस्क्लेमर- इस लेख में दी गई जानकारी के पूर्णतया सत्य और सटीक होने का हम दावा नहीं करते हैं। प्रमाणिक जानकारी के लिए कृपया विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें।




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