ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग: इसके बिना अधूरे माने जाते हैं सारे तीर्थ, जानें पूरी कहानी
Omkareshwar Jyotirlinga Story in Hindi: मध्य प्रदेश में नर्मदा नदी के पास स्थित ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग की खास मान्यता है। मान्यता है कि इस ज्योतिर्लिंग के दर्शन के बिना बाकी सारे तीर्थ अधूरे माने जाते हैं।

Omkareshwar Jyotirlinga Story in Hindi: कई शिवभक्तों के मुंह से आपने बहुत सुना होगा कि मुझे 12 ज्योतिर्लिंग कवर करने हैं। बता दें ज्योतिर्लिंग उस स्थान को कहा गया है जहां शिवजी खुद प्रकट हुए हैं। इसी वजह से शिवजी को स्वंयभू भी कहा गया है। देश में कुल 12 ज्योतिर्लिंग हैं और चौथे नंबर पर आता है मध्य प्रदेश के इंदौर से 80 किमी दूर स्थित ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग का। ये ज्योतिर्लिंग नर्मदा नदी के तट पर मान्धाता पर्वत पर ही स्थित है जोकि ओम के आकार वाला द्वीप है। आज बात करेंगे इसी ज्योतिर्लिंग के बारे में। आपको जानकर हैरानी होगी कि यहां से थोड़ी दूर पर ही ममलेश्वर लिंग है, जिसे ओंकारेश्वर का ही रूप माना गया है। दोनों को एक ही माना गया है। चलिए जानते हैं कि आखिर ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग कैसे बना? साथ इसकी मान्यता और दर्शन से संबंधित बातें जानेंगे।
ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग की मान्यता
ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग की मान्यता है कि यहां पर भगवान शिव को जल अर्पित किए बिना सारे तीर्थ अधूरे माने जाते हैं। माना जाता है कि इस ज्योतिर्लिंग के दर्शन से सारे पाप नष्ट हो जाते हैं और मानसिक सुख की प्राप्ति होती है। वहीं नर्मदा नदी में स्नान करने का खास महत्व है। शास्त्रों में कहा गया है कि इस नदी में स्नान की मान्यता गंगाजी और जमुनाजी में स्नान करने से भी ज्यादा है।
ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग की पौराणिक कथा
ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग से जुड़ी कथा है कि एक बार राजा मान्धाता ने नर्मदा नदी के किनारे विन्ध्य पर्वत पर शिवजी की कठोर तपस्या की थी। उनकी तपस्या को देखकर भगवान शिव प्रसन्न हुए और वहां प्रकट हो गए। मान्धाता ने उनसे वहीं पर निवास करने का वरदान मांगा। इसके बाद ही भगवान शिव वहां पर ज्योतिर्लिंग के रूप में विराजमान हो गए। इसके तुरंत बाद ही वहां पर कई ऋषि आ पहुंचे। उनके कहने पर भगवान शिव ने लिंग के दो हिस्से किए। एक का नाम ओंकारेश्वर रखा गया तो दूसरे के ममलेश्वर।
ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग में दर्शन-आरती का समय और टिकट
इस ज्योतिर्लिंग में दर्शन का समय सुबह 5 से रात साढ़े 9 बजे तक है। वहीं सुबह की मंगल आरती 5 बजे होती है। दोपहर में भोग आरती 12:20 के आसपास होती है। रात की आरती का समय 9 बजे है। बता दें कि यहां पर दर्शन के लिए टिकट नहीं लगता है। बता दें कि यहां दर्शन करने में आपको 1 घंटा लग जाएगा।
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