somnath jyotirlinga temple story and history in hindi somnath jyotirlinga ki kahani aur itihas सोमनाथ ज्योतिर्लिंग: श्रापित चंद्रदेव के तप से पिघले थे महादेव, फिर दिया ये वरदान, एस्ट्रोलॉजी न्यूज़ - Hindustan
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सोमनाथ ज्योतिर्लिंग: श्रापित चंद्रदेव के तप से पिघले थे महादेव, फिर दिया ये वरदान

Somnath Jyotirlinga: गुजरात के सौराष्ट्र में स्थित 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक सोमनाथ ज्योतिर्लिंग का खास महत्व है। इस ज्योतिर्लिंग के दर्शन से कई फल प्राप्त होते हैं। चलिए जानते हैं इसकी कहानी और महत्व के बारे में…

Sat, 5 July 2025 11:37 AMGarima Singh लाइव हिन्दुस्तान
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सोमनाथ ज्योतिर्लिंग: श्रापित चंद्रदेव के तप से पिघले थे महादेव, फिर दिया ये वरदान

Somnath Jyotirlinga Story In Hindi: हिंदू धर्म के पुराणों के अनुसार भगवान शिव कुल 12 जगहों पर स्वंय प्रकट हुए हैं। इन जगहों पर मौजूद हर एक शिवलिंग को ज्योतिर्लिंग के रूप में पूजा जाता है। सनातन धर्म में ज्योतिर्लिंग के दर्शन का खूब महत्व है। हमारे देश में कुल 12 ज्योतिर्लिंग हैं। 12 ज्योतिर्लिंगों में सोमनाथ सबसे पहले आता है। कहा जाता है कि भगवान शिव का ये पहला मंदिर है। यह ज्योतिर्लिंग गुजरात के सौराष्ट्र क्षेत्र में है। समुद्र किनारे स्थित इस मंदिर का खास महत्त है। चलिए जानते हैं कि सोमनाथ ज्योतिर्लिंग की कहानी और मान्यता के बारे में…

सोमनाथ ज्योतिर्लिंग की कहानी

शिव महापुराण और श्रीमद्भगवद्गीता समेत कई पुराणों में सोमनाथ ज्योतिर्लिंग के महत्व को बताया गया है। बता दें कि एक बार दक्ष प्रजापति ने चंद्रदेव को क्षय रोग का श्राप दिया था। उनके श्राप के बाद चंद्रदेव क्षयग्रस्त हो गए। तब ब्रह्माजी के कहने पर चंद्रदेव ने कठोर तप किया ताकि शिवजी को प्रसन्न किया जा सके। चंद्रदेव ने तप के दौरान एक भी चूक ना होने दी। उन्होंने 10 करोड़ बार महामृत्युजंय मंत्र का जाप किया। शिवजी चंद्रदेव के इस तप से प्रसन्न हुए और उन्हें मुक्ति प्रदान करते हुए वरदान दिया। इसके बाद भगवान शिव को ही सोमनाथ (चंद्रमा के स्वामी) कहा गया। यहां पर सोम का अर्थ है चंद्रमा और नाथ का मतलब है स्वामी। चंद्रदेव की प्रार्थना पर शिवजी वहीं पर उनके द्वारा बनाए गए शिवलिंग में मां पार्वती संग विराजमान हो गए। ठीक इसी जगह पर ही सोमनाथ ज्योतिर्लिंग है।

सोमनाथ ज्योतिर्लिंग

शिवजी ने चंद्रदेव को दिया ये वरदान

अब विस्तार से पूरा किस्सा समझते है। जब चंद्रदेव की कड़ी तपस्या से शिवजी प्रसन्न हुए, तब उन्हें अमर होने का वरदान दे डाला था। हालांकि शिवजी ने ये भी कहा कि वह दक्ष प्रजापति के वचनों की भी रक्षा करेंगे। उन्होंने चंद्रदेव से कहा कि कृष्ण पक्ष में एक-एक करके तुम्हारी कला क्षीण होती जाएगी लेकिन शुक्ल पक्ष में वापस से ये कला धीरे-धीरे वापस आ जाएगी। पूर्णिमा वाले दिन तुम पूरे हो जाओगे।

सोमनाथ ज्योतिर्लिंग की कहानी

चंद्रदेव को क्यों मिला था श्राप?

दरअसल दक्ष प्रजापति की कुल 27 पुत्रियां थीं। उन्होंने अपनी 27 पुत्रियों का विवाह चंद्रदेव के साथ कर दिया। दक्ष प्रजापति की 27 पुत्रियों में से रोहिणी के प्रति चंद्रदेव का समर्पण और स्नेह दिखा। चंद्रदेव के ऐसा करने से दक्ष प्रजापति की सारी पुत्रियों को अपमानित महसूस हुआ। इन लोगों ने अपने पिता से चंद्रदेव की शिकायत की। इसके बाद गुस्से में आकर दक्ष प्रजापति ने चंद्रदेव को क्षय रोग का श्राप दिया था। उन्होंने चंद्रदेव की एक भी ना सुनी और कहा कि अबसे धीरे-धीरे तुम्हारा तेज खत्म कमजोर पड़ता जाएगा।

सोमनाथ ज्योतिर्लिंग का महत्व

मान्यता है कि सोमनाथ ज्योतिर्लिंग के दर्शन मात्र से लोगों का चंद्र दोष खत्म हो जाता है। यहां आने वाले हर व्यक्ति पर भगवान शिव के साथ-साथ चंद्रदेव की भी कृपा बरसती है। इस ज्योतिर्लिंग में पूजा अर्चना करने से मानसिक रोगों से मुक्ति मिलती है और व्यक्ति को धन-धान्य की कमी कभी भी नहीं रहती है। मान्यता तो ऐसी भी है कि सोमनाथ ज्योतिर्लिंग के दर्शन के बाद व्यक्ति के सारे पाप मिट जाते हैं और उसे मोक्ष मिल जाता है।

डिस्क्लेमर- (इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम यह दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य एवं सटीक हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।)

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