Akshay Tritiya Date: क्या 20 अप्रैल को मनेगी अक्षय तृतीया, पंडित जी से जानें
Akshay Tritiya Date 2026 Akshaya Tritiya Muhurat Time : इस साल अक्षय तृतीया के दिन सर्वार्थ सिद्धि योग, रवियोग के अलावा अक्षय योग का निर्माण हो रहा है। शास्त्र अनुसार, इस दिन होम, दिए हुए दान, जप, स्नान आदि सभी कर्मों का फल अनंत होता है।

Akshay Tritiya Date 2026 Akshaya Tritiya Muhurat, अक्षय तृतीया: इस साल अक्षय तृतीय का पर्व बेहद ही शुभ योगों में मनाया जाएगा। शास्त्र अनुसार, इस दिन होम, दिए हुए दान, जप, स्नान आदि सभी कर्मों का फल अनंत होता है। इस साल अक्षय तृतीया के दिन सर्वार्थ सिद्धि योग, अमृत सिद्धि योग, रवियोग के अलावा अक्षय योग और मालव्य जैसे श्रेष्ठ योगों का भी निर्माण हो रहा है। ये सब धन बुद्धि और उन्नति के लिए सर्वोत्तम रहेंगे। वहीं, रोहिणी नक्षत्र खरीदारी और शुभ कार्यों के आरंभ के लिए उत्तम रहेगा। इस तिथि को भगवान विष्णु के नर-नारायण, परशुराम और हयग्रीव अवतार की जयंती मनाई जाती है।
क्या 20 अप्रैल को मनेगी अक्षय तृतीया, पंडित जी से जानें
ज्योतिषाचार्य पं. नरेंद्र उपाध्याय ने बताया कि इस दिन सभी वस्तुएं अक्षय हो जाती हैं। इस दिन सूर्योदय सुबह में 5:38 पर और तृतीया तिथि का मान दिन में 10:40 बजे के बाद वैशाख शुक्ल चतुर्थी होगी। साथ ही कृतिका नक्षत्र भी प्रातः काल 7:36 बजे दिन तक रहेगा। इसके बाद रोहिणी नक्षत्र और दिनभर सौभाग्य योग और शाम 7:38 बजे के बाद शोभन योग है। इसलिए अक्षय तृतीया 20 अप्रैल को मनाई जाएगी। उन्होंने बताया कि जीवन के समस्त महत्वपूर्ण कार्यों का शुभारंभ इस दिन से किया जा सकता है।
ज्योतिषाचार्य पं. शरद चंद मिश्र के अनुसार, भगवान परशुराम जी प्रदोष काल में प्रकट हुए थे, इसलिए अगर द्वितीया को मध्याह्न से पहले तृतीया आ जाए तो उसी दिन अक्षय तृतीया, नर नारायण जयंती, परशुराम जयंती- सब संपन्न की जाती है। उनके अनुसार, इस वर्ष मध्यान्ह से पूर्व अर्थात 19 अप्रैल को द्वितीया तिथि मध्यान्ह के समय 01:01 बजे से प्रारंभ होने समस्त जयंती इसी दिन संपन्न की जाएगी। लेकिन हयग्रीव जयंती 20 अप्रैल को ही संपन्न की जाएगी क्योंकि हयग्रीव जी का जन्म मध्याह्न से पूर्व माना जाता है।
अक्षय तृतीया पर उच्च राशि में सूर्य
पं. जितेंद्र नाथ पाठक का कहना है कि वैशाख शुक्ल तृतीया तिथि को अक्षय तृतीया को त्रेतायुग भी आरंभ भी माना जाता है। भारतीय काल गणना के अनुसार, चार स्वयं सिद्ध अभिजित मूहुर्त हैं, जो चैत्र शुक्ल प्रतिपदा, अक्षय तृतीया, दशहरा व दीपावली की पूर्ण प्रदोष तिथि है। इस साल आयुष्मान योग के मेष के सूर्य विशेष रूप से शुभ हैं। इस दिन सूर्य मेष राशि (उच्च राशि) ओर चंद्रमा वृषभ राशि (उच्च राशि) पर रहता है। इस दिन पंचांग के अवलोकन की आवश्यकता नहीं है।
क्या जैन धर्म से अक्षय तृतीया का भी है संबंध?
पं. शरद चंद के अनुसार, अक्षय तृतीया का संबंध जैन धर्म से भी है। जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर ऋषभदेव ने ही मुनियों को भोजन पहुंचाने की परंपरा प्रारंभ की थी। कथा के अनुसार, राजा श्रेयांस ने ऋषभदेव का उपवास खुलवाया था। जैन समाज इस दिन गन्ने के रस का दान करता है। इसे जैन धर्म में वर्षीतप कहते हैं। यह व्रत कार्तिक के कृष्ण अष्टमी से प्रारंभ होता है और वैशाख शुक्ल तृतीया अर्थात अक्षय तृतीया को पूर्ण होता है। उपवास के पहले यह ध्यान रखा जाता है कि प्रत्येक महीने में चतुर्दशी को उपवास रखा जाता है और उपवास में केवल गर्म पानी का ही सेवन किया जाता है।
डिस्क्लेमर: इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम यह दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य एवं सटीक हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।




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