TMC plea in Supreme Court Against Election Commission Rule Central Staff Deployment Bengal बंगाल चुनाव में केंद्रीय कर्मचारियों की तैनाती को चुनौती, TMC ने खटखटाया सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा, West-bengal Hindi News - Hindustan
More

बंगाल चुनाव में केंद्रीय कर्मचारियों की तैनाती को चुनौती, TMC ने खटखटाया सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा

टीएमसी का आरोप है कि केंद्र सरकार के कर्मचारी भाजपा के प्रभाव में आ सकते हैं, लेकिन अदालत ने इस आशंका को खारिज कर दिया। हाई कोर्ट ने कहा कि मतगणना कक्ष में माइक्रो ऑब्जर्वर, उम्मीदवारों के काउंटिंग एजेंट भी मौजूद रहते हैं।

Fri, 1 May 2026 07:59 PMNiteesh Kumar लाइव हिन्दुस्तान
share
बंगाल चुनाव में केंद्रीय कर्मचारियों की तैनाती को चुनौती, TMC ने खटखटाया सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा

तृणमूल कांग्रेस ने पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव की मतगणना में केवल केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों को काउंटिंग सुपरवाइजर बनाने का विरोध किया है। टीएमसी ने चुनाव आयोग के इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। पार्टी ने इस मामले में तत्काल सुनवाई की मांग की है। ध्यान रहे कि चुनाव नतीजे दो दिन बाद ही आने वाले हैं। सुप्रीम कोर्ट ने टीएमसी की इस याचिका पर शनिवार को सुनवाई के लिए विशेष पीठ का गठन किया है। इस बेंट में जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस जॉयमाल्य बागची शामिल हैं। 2 मई को सुबह 10:30 बजे इस मामले की सुनवाई होगी।

read moreये भी पढ़ें:
ये भी पढ़ें:पश्चिम बंगाल में 15 बूथों पर फिर से होगी वोटिंग, चुनाव आयोग का बड़ा फैसला

इससे पहले, कलकत्ता हाई कोर्ट ने TMC की याचिका खारिज कर दी थी। जज कृष्णा राव ने कहा कि चुनाव आयोग को यह अधिकार है कि वह मतगणना पर्यवेक्षक और सहायक राज्य सरकार या केंद्र सरकार के कर्मचारियों में से किसी को भी नियुक्त कर सकता है। इसमें कुछ भी गैर-कानूनी नहीं है। पश्चिम बंगाल की 294 सदस्यीय विधानसभा के लिए चुनाव दो चरणों में 23 और 29 अप्रैल को मतदान हुआ था। वोटों की गिनती 4 मई को होगी।

तृणमूल कांग्रेस का क्या है आरोप

टीएमसी का आरोप है कि केंद्र सरकार के कर्मचारी भाजपा के प्रभाव में आ सकते हैं, लेकिन अदालत ने इस आशंका को खारिज कर दिया। हाई कोर्ट ने कहा कि मतगणना कक्ष में माइक्रो ऑब्जर्वर, उम्मीदवारों के काउंटिंग एजेंट और अन्य कर्मी भी मौजूद रहते हैं, इसलिए किसी तरह की गड़बड़ी की संभावना नहीं है। चुनाव अधिकारियों का अदालत में कहना था कि ये नियुक्तियां तय प्रक्रिया के तहत की गई हैं। केंद्रीय कर्मचारियों की तैनाती का मकसद निष्पक्षता सुनिश्चित करना और पक्षपात के आरोपों से बचना है।

read moreये भी पढ़ें:
ये भी पढ़ें:बंगाल में सियासी लड़ाई अब मतगणना केंद्रों पर आई, TMC ने क्यों बुलाई VC मीटिंग?

टीएमसी की याचिका में पश्चिम बंगाल के अतिरिक्त मुख्य निर्वाचन अधिकारी की ओर से 30 अप्रैल को जारी आदेश को चुनौती दी गई, जिसमें कहा गया था कि हर टेबल पर कम से कम एक सुपरवाइजर या सहायक केंद्र सरकार का कर्मचारी होना चाहिए। तृणमूल की ओर से वकील कल्याण बनर्जी ने दलील दी कि यह आदेश अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर जारी किया गया है और केवल आशंकाओं पर आधारित है। ऐसे में निष्पक्ष नतीजे प्रभावित हो सकते हैं।

read moreये भी पढ़ें:
ये भी पढ़ें:स्ट्रांगरूम की निगरानी, भीड़ पर रोक; बंगाल में मतगणना से पहले से तगड़ा इंतजाम

स्ट्रॉन्ग रूम की सुरक्षा पर उठाए सवाल

इस बीच, पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी मनोज अग्रवाल ने कहा कि मतगणना केंद्रों पर किसी भी तरह की गड़बड़ी की कोई गुंजाइश नहीं है और स्ट्रॉन्ग रूम की 24 घंटे सीसीटीवी के जरिये निगरानी की जा रही है। सीईओ का यह बयान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की ओर से अपने भवानीपुर निर्वाचन क्षेत्र के स्ट्रॉन्ग रूम पर घंटों बिताए जाने और धांधली की आशंका जताए जाने के एक दिन बाद आया है। कोलकाता के दो मतगणना केंद्रों के आसपास गुरुवार रात उत्पन्न हुए तनाव के मद्देनजर पुलिस ने शहर के सभी 7 स्ट्रॉन्ग रूम के बाहर निषेधाज्ञा लागू हैं।