BJP rise in Bengal Who is Victor Banerjee laid foundation in 1991 Lok Sabha election विक्टर बनर्जी कौन, जिन्होंने BJP के लिए बंगाल में तैयार की जमीन; 1991 की हार से जीत की सुनामी यूं ही न आई, West-bengal Hindi News - Hindustan
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विक्टर बनर्जी कौन, जिन्होंने BJP के लिए बंगाल में तैयार की जमीन; 1991 की हार से जीत की सुनामी यूं ही न आई

इस संघर्ष की शुरुआत हुई थी साल 1991 में, जब बंगाल में एक अभिनेता ने पहली बार भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ा था। इस अभिनेता का नाम है, विक्टर बनर्जी। कैसे विक्टर बनर्जी बंगाल में भाजपा का चेहरा बने और कैसे तय हुआ हार से जीत का सफर…

Tue, 5 May 2026 08:30 PMDeepak Mishra लाइव हिन्दुस्तान, कोलकाता
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विक्टर बनर्जी कौन, जिन्होंने BJP के लिए बंगाल में तैयार की जमीन; 1991 की हार से जीत की सुनामी यूं ही न आई

भारतीय जनता पार्टी ने 2026 के बंगाल विधानसभा चुनाव में इतिहास रच दिया है। पार्टी ने 293 में से 207 सीटें जीत ली हैं। इस तरह बंगाल में टीएमसी के 15 साल पुराने शासन का अंत हो चुका है। बंगाल में भाजपा की यह जीत आज भले ही चमत्कारिक लग रही हो। लेकिन हकीकत यह है कि इसके पीछे एक लंबा संघर्ष है। इस संघर्ष की शुरुआत हुई थी साल 1991 में, जब बंगाल में एक अभिनेता ने पहली बार भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ा था। इस अभिनेता का नाम है, विक्टर बनर्जी। आइए जानते हैं कैसे विक्टर बनर्जी बंगाल में भाजपा का चेहरा बने और कैसे तय हुआ हार से जीत का सफर…

विक्टर बनर्जी को जानिए
विक्टर बनर्जी 1990 की शुरुआत में ही भारतीय और अंतर्राष्ट्रीय सिनेमा के बड़े चेहरे थे। उन्होंने उस दौर में सत्यजीत रे और डेविड लीन जैसे नामी निर्देशकों के साथ काम किया था। वह सिनेमा की दुनिया के नामी चेहरे थे, ऐसे में उनका राजनीति में आना काफी चौंकाने वाला था। विक्टर बनर्जी ने कभी किसी राजनीतिक संगठन में काम नहीं किया था। इसके अलावा बंगाल में भाजपा खुद भी संघर्ष करने की स्थिति में ही थी। उस वक्त बंगाल पर लेफ्ट फ्रंट का पूरी तरह से प्रभाव थे। इसके नेता ज्योति बसु बंगाल के मुख्यमंत्री थे। विपक्षी दल के रूप में कांग्रेस थी और भाजपा कहीं हाशिए पर थी।

1991 का लोकसभा चुनाव
इन सब हालात के बीच भाजपा ने विक्टर बनर्जी को 1991 के लोकसभा चुनाव में प्रत्याशी बनाया। विक्टर के लिए सीट चुनी गई थी कलकत्ता नॉर्थ। यह एक शहरी सीट थी। यहां के वोटर्स राजनीतिक रूप से जागरुक थे और ऐतिहासिक तौर पर इस सीट पर कड़े मुकाबले देखने को मिले थे। इतना ही नहीं, इस सीट के वोटरों का झुकाव पुराने राजनीतिक दलों की तरफ था। विक्टर बनर्जी के सामने मजबूत सियासी संगठनों में मंजे उम्मीदवार मैदान में थे। लेफ्ट और कांग्रेस का यहां पर पूरी तरह से दबदबा था। उनके साथ बरसों से बनाया हुआ काडर बेस था।

कितने मिले थे वोट
इन सबके बीच विक्टर बनर्जी ने अपना चुनावी अभियान शुरू किया। राम जन्मभूमि आंदोलन के असर के बीच, बनर्जी को लेफ्ट फ्रंट के गढ़ में दस्तक देनी थी, जहां भाजपा लगभग अदृश्य थी। बनर्जी को कांग्रेस के डॉक्टर देबी प्रसाद पाल और जनता दल के दिलीप चक्रवर्ती से कड़ी टक्कर मिली थी। इसके बावजूद उन्हें मिलने वाले वोट के आंकड़े हैरान करने वाले थे। विक्टर बनर्जी को 89,155 वोट मिले, जो 21.08 फीसदी था और वह तीसरे स्थान पर रहे। यह अभिनेता 77,072 हजार वोटों से चुनाव हार गए, लेकिन उन्होंने भाजपा के लिए आगाज कर दिया था।

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हार के बावजूद क्यों रखता है मायने
विक्टर बनर्जी 1991 में चुनाव हार गए, लेकिन इसने भाजपा के लिए बंगाल में जमीन तैयार कर दी। बनर्जी को मिले वोटों ने यह साबित किया कि पार्टी बंगाल में भी वोट पा सकती है। विक्टर बनर्जी की सक्रियता ने यहां के वोटर्स के अंदर भी एक नए किस्म का कौतूहल पैदा किया। इसके कई साल बाद, साल 1998 में भाजपा ने बंगाल में पहला लोकसभा चुनाव जीता। इसके बाद अब साल 2026 है जब बंगाल में इतिहास रचा जा चुका है। 1991 से 2026 के बीच इस लंबे दौर को देखें तो यह दिखाता है संघर्ष रंग लाता है। बंगाल में भाजपा के इस संघर्ष की नतीजा है, इस प्रदेश में लेफ्ट फ्रंट के लाल, ममता के नीले सफेद के बाद अब भाजपा का भगवा छाया हुआ है।