ट्रक के पीछे क्यों लिखा रहता है ‘हॉर्न, ओके, प्लीज’, वर्ल्ड वॉर-2 से जुड़ा है कनेक्शन
‘हॉर्न, ओके, प्लीज’ ट्रक के पीछे लिखा हुआ यह सेंटेंस आपने भी अक्सर पढ़ा होगा। आपने कभी सोचा है कि इसके पीछे की कहानी क्या है? आखिर देशभर के सभी ट्रक ड्राइवर, यही सेंटेंस क्यों लिखवाते हैं। आइए समझते हैं...

‘हॉर्न, ओके, प्लीज’ ट्रक के पीछे लिखा हुआ यह सेंटेंस आपने भी अक्सर पढ़ा होगा। देश के किसी भी हिस्से में चले जाइए, खूबसूरत बनावट और चमकीले रंग-रोगन के साथ, भड़कीले अक्षरों में यही लिखा मिलता है। यह भारत के रोड कल्चर का एक हिस्सा बन चुका है। आज से नहीं, काफी समय पहले से ही यह देखने को मिल रहा है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि इसके पीछे की कहानी क्या है? आखिर देशभर के सभी ट्रक ड्राइवर, यही सेंटेंस क्यों लिखवाते हैं। आइए समझते हैं...
आर्मी से जुड़ी कहानी
इसके बारे में जो सबसे प्रचलित थियरी है वह यह है कि ‘हॉर्न, ओके, प्लीज’ का संबंध दूसरे विश्वयुद्ध से है। बताया जाता है कि उस वक्त बहुत सारे ट्रक केरोसिन से चलते थे। यह बहुत तेजी से आग पकड़ता था और सड़क पर चलते वक्त बहुत सावधानी की जरूरत होती थी। बताते हैं कि तब सेना के वाहनों पर यह चेतावनी लिखी होती थी, ‘हॉर्न प्लीज, ऑन केरोसिन’। इसके जरिए पीछे आ रहे वाहन चालकों से बताया जाता था कि ओवरटेक करने से पहले, हॉर्न जरूर दें। ऐसा इसलिए किया जाता था ताकि अचानक से वाहनों की गति घटने-बढ़ने से किसी तरह का हादसा होने का डर नहीं रहे।
डिटरजेंट ब्रांड से संबंध
समय बीतने के साथ-साथ ‘हॉर्न प्लीज, ऑन केरोसिन’ फ्रेज में बदलाव आते चले गए। अनुमान है कि ‘हॉर्न प्लीज, ऑन केरोसिन’ ही आगे चलकर ‘हॉर्न ओके प्लीज’ में तब्दील हो गया। इस बारे में एक और थियरी भी है जो काफी मशहूर है। इसके मुताबिक टाटा ऑयल मिल्स का एक डिटरजेंट ब्रांड था ओके। थियरी के मुताबिक ट्रक के पीछे, ड्राइवर हॉर्न प्लीज लिखवाते हैं, फिर बीच में ओके लिखवाने लगे। बाद में धीरे-धीरे यह चलन में आ गया और अब तो हर ट्रक के पीछे ही लिखा नजर आता है।
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