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उत्तराखंड में बिल्डरों की मनमानी पर रोक, रेरा ने लागू किया 3 बैंक खातों का नियम; क्या है ये?

उत्तराखंड रेरा ने रियल एस्टेट में धोखाधड़ी रोकने के लिए प्रमोटरों हेतु तीन अलग बैंक खाते रखना अनिवार्य कर दिया है, जिससे ग्राहकों का पैसा केवल उसी प्रोजेक्ट पर खर्च होगा और निर्माण में देरी नहीं होगी।

Sat, 31 Jan 2026 07:06 AMAnubhav Shakya हिन्दुस्तान, विनोद मुसान। देहरादून
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उत्तराखंड में बिल्डरों की मनमानी पर रोक, रेरा ने लागू किया 3 बैंक खातों का नियम; क्या है ये?

उत्तराखंड में अब डेवलपर्स अपने घर का सपना संजोए लोगों के पैसों से नहीं खेल सकेंगे। जिस प्रोजेक्ट के लिए लोगों से पैसा लिया है, वह पैसा शत-प्रतिशत उसी प्रोजेक्ट में खर्च करना होगा। इसके लिए उत्तराखंड रियल एस्टेट नियामक प्राधिकरण (रेरा) ने एक निर्णायक कदम उठाते हुए डेवलपर्स के लिए एक सख्त वित्तीय अनुपालन ढांचा लागू किया है।

अलग-अलग बैंक अकाउंट रखने होंगे

उत्तराखंड में रियल एस्टेट में पारदर्शिता लाने के उद्देश्य से रियल एस्टेट प्रमोटरों को प्रत्येक पंजीकृत परियोजना के लिए तीन अलग-अलग बैंक खाते रखने होंगे। जिनकी पूरी निगरानी रेरा की ओर से की जाएगी। इस सुधार का उद्देश्य धन के दुरुपयोग को रोकना, जवाबदेही बढ़ाना और राज्य भर में घर खरीदारों के हितों की रक्षा करना है।

पहला, संग्रह खाता होगा, जिसमें ग्राहकों से मिलने वाला 100 प्रतिशत पैसा (बुकिंग राशि, टैक्स और अन्य शुल्क) जमा किया जाएगा। दूसरा सेपरेट अकाउंट होगा, जिसमें परियोजना की कुल लागत का 70 प्रतिशत हिस्सा संग्रह खाते से इस अकाउंट में ट्रांसफर किया जाएगा। इसका उपयोग केवल निर्माण और जमीन की लागत के लिए ही किया जा सकता है। तीसरा ट्रांजेक्शन अकाउंट होगा, जिसमें शेष 30 प्रतिशत राशि रखी जाएगी, जिसका उपयोग प्रशासनिक खर्चों या अन्य कार्यों के लिए किया जाएगा।

रेरा ने कसा शिकंजा

रेरा सदस्य नरेश सी. मठपाल ने बताया कि इन खातों पर नजर रखने के लिए त्रिस्तरीय मैकेनिज्म तैयार किया गया है। इसके लिए प्रोजेक्ट इंजीनियर, आर्किटेक्ट और चार्टर्ड अकाउंटेंट की रिपोर्ट के बाद ही बैंक की ओर से प्रमोटर को प्रोजेक्ट की प्रगति के हिसाब से पैसा जारी किया जाएगा।

उत्तराखंड रेरा के अध्यक्ष अमिताभ मैत्रा ने कहा कि धन प्रबंधन में गड़बड़ी रियल एस्टेट क्षेत्र में एक बड़ी चिंता का विषय रही है, जिसके कारण अक्सर परियोजनाएं रुक जाती हैं और संपत्ति का कब्जा मिलने में देरी होती है। यह नियम धन के दुरुपयोग को रोकने और समय पर परियोजना पूरी करने के लिए आवश्यक था, जिसे अब उत्तराखंड में लागू कर दिया गया है।

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दून में प्रॉपर्टी के नाम पर करोड़ों की धोखाधड़ी

राजधानी में प्रॉपर्टी के नाम पर करोड़ों की धोखाधड़ी में 'आर्केडिया हिलाक्स' प्रोजेक्ट के बिल्डर शाश्वत गर्ग और उनकी पत्नी साक्षी गर्ग का मामला सबसे नया है। आरोपी दंपति बीते अक्तूबर से फरार हैं। जांच में खुलासा हुआ कि उन्होंने निवेशकों के नाम पर फर्जी लोन लिए और एक ही फ्लैट को कई लोगों को बेचकर करोड़ों की हेराफेरी की। इससे पहले, शहर के पुष्पांजलि रियल्म्स के दीपक मित्तल ने भी करीब 400 निवेशकों के 100 करोड़ रुपये से अधिक हड़पे थे। वहीं, सुधीर विंडलास पर जाली दस्तावेजों से भूमि कब्जाने के आरोप में गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई जारी है।

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