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उत्तराखंड में AI से सुधरेगी शहरी व्यवस्था, देहरादून की सड़कों पर पायलट प्रोजेक्ट शुरू

उत्तराखंड सरकार बिजली, सड़क और ट्रैफिक जैसी समस्याओं के समाधान के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद लेगी। देहरादून के राजपुर और सहस्रधारा रोड से शुरू होने वाले इस प्रोजेक्ट में कैमरों के जरिए निगरानी की जाएगी।

Sat, 24 Jan 2026 07:44 AMAnubhav Shakya हिन्दुस्तान, विनोद मुसान। देहरादून
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उत्तराखंड में AI से सुधरेगी शहरी व्यवस्था, देहरादून की सड़कों पर पायलट प्रोजेक्ट शुरू

उत्तराखंड में शहरी गवर्नेंस यानि बिजली, पानी, ट्रैफिक, सड़क व परिवहन से संबंधित समस्याएं हल करने में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई)की मदद ली जाएगी। इसकी शुरुआत देहरादून के राजपुर रोड और सहस्त्रधारा रोड से की जा रही है।

एआई पायलट प्रोजेक्ट पर काम शुरू

शहरी विकास व सूचना प्रौद्योगिकी विभाग, निकायों में विकास को नई दिशा देने के लिए तकनीक आधारित निगरानी प्रणाली लागू करने जा रहे हैं। इस क्रम में नागरिक सुविधाओं और बुनियादी ढांचे को बेहतर बनाने को एआई आधारित पायलट प्रोजेक्ट पर काम शुरू किया गया है। इसके तहत एआई और आधुनिक कैमरों के जरिए शहर की समस्याओं की पहचान कर समाधान किया जाएगा। सचिव शहरी विकास एवं सूचना प्रौद्योगिकी नितेश झा ने बताया, दून में पायलट प्रोजेक्ट सफल रहा तो इसे उत्तराखंड के अन्य शहरों में भी लागू किया जा सकता है।

पायलट प्रोजेक्ट का परीक्षण प्रारंभ

पायलट प्रोजेक्ट के लिए शहर के व्यस्त और महत्वपूर्ण हिस्सों को चुना गया है। यह क्लोज-लूप रूट राजपुर गांव से शुरू होकर राजपुर रोड होते हुए घंटाघर तक जाएगा। इसके बाद सहस्रधारा क्रॉसिंग से सहस्रधारा रोड होते हुए आईटी पार्क तक की सड़कों को इसमें कवर किया गया है।

एक साथ काम करेंगे पांच मॉड्यूल

इस अभियान के तहत पांच अलग-अलग क्षेत्रों पर एक साथ काम होगा। इसमें बुनियादी ढांचे के तहत सड़क-नाली की स्थिति, साइनबोर्ड व स्ट्रीट लाइट की निगरानी शामिल है। सफाई के मोर्चे पर कूड़े के ढेर और गंदगी वाले हॉटस्पॉट चिह्नित किए जाएंगे। अवैध होर्डिंग्स-अतिक्रमण का पता लगाना भी इसमें शामिल है। अवैध पार्किंग और बिना हेलमेट वाहन चलाने वालों पर भी नजर रखी जाएगी।

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कैसे काम करेगी प्रणाली?

सड़कों की तस्वीरें लेने को गाड़ियों पर विशेष कैमरे लगाए जाएंगे। तस्वीरों का विश्लेषण एआई मॉडल करेंगे, जिसके बाद फिजिकल तौर पर डेटा की पुष्टि की जाएगी। अंत में, सभी जानकारियों को डैशबोर्ड पर मैप के जरिए पेश किया जाएगा। इससे अधिकारी तुरंत कार्रवाई कर सकेंगे। यह कार्रवाई शुरुआत में हर 15 दिन और बाद में एक माह और अंत में एक साल में दोहराई जाएगी।

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