उत्तराखंड में गवर्नर की मुहर के साथ UCC और सख्त, जानें- क्या होंगे नए प्रावधान
उत्तराखंड की समान नागरिक संहिता कुछ और कठोर प्रावधानों के साथ लागू हो गई। राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह ने समान नागरिक संहिता (यूसीसी) अध्यादेश को मंजूरी दे दी है।

UCC New Laws: उत्तराखंड की पुष्कर धामी सरकार के समान नागरिक संहिता (यूसीसी) अध्यादेश को राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह ने मंजूरी दे दी है। अगस्त 2025 में विधानसभा से पास इस अध्यादेश को राज्यपाल ने तकनीकी खामी के साथ वापस भेज दिया था। उत्तराखंड आजादी के बाद सबसे पहले समान नागरिक संहिता लागू करने वाला देश का पहला राज्य है।
वर्तमान में राज्य की समान नागरिक संहिता कुछ और कठोर प्रावधानों के साथ लागू हो गई है। आगामी फरवरी-मार्च में प्रस्तावित बजट सत्र में अध्यादेश को विधेयक के रूप में पारित कराया जायेगा।
जब राज्यपाल ने लौटाया विधेयक
मालूम हो कि अगस्त 2025 में विधानसभा के गैरसैण सत्र के दौरान यूसीसी संशोधन विधेयक पारित हुआ था। इस विधेयक के ड्राफ्ट की कुछ तकनीकी खामियों के चलते राज्यपाल ने इस सरकार को पुनर्विचार के लिए लौटा दिया था। इसके बाद सरकार उच्च में नए संशोधनों को जोड़ने के लिए इसे अध्यादेश के रूप में लाई।
यूसीसी लागू करने वाला पहला राज्य
उत्तराखंड आजादी के बाद सबसे पहले समान नागरिक संहिता लागू करने वाला देश का पहला राज्य है। फरवरी 2022 में विधानसभा चुनाव से पहले मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने समान नागरिक संहिता लागू करने की घोषणा की थी। विधानसभा चुनाव में प्रचंड बहुमत के साथ दोबारा सत्ता में लौटने पर धामी ने 27 मई 2022 को विशेषज्ञ समिति का गठन किया था। समिति की रिपोर्ट के आधार पर आठ फरवरी 2024 को विधानसभा में समान नागरिक संहिता का विधेयक पारित किया। जिसे 8 मार्च राष्ट्रपति भवन ने मंजूरी दी। इसकी नियमावली बनाने के बाद 27 जनवरी 2025 को राज्य में समान नागरिक संहिता को विधिवत रूप से लागू कर दिया गया।
क्या हैं यूसीसी के प्रावधान
यूसीसी में आने वाले प्रावधानों के तहत पहचान छिपाकर शादी करने या लिव-इन में रहने पर कठोर दंड, जेल की सजा का भी प्रावधान है। लिव-इन रिलेशनशिप में रहने वाले जोड़ों के लिए रजिस्ट्रेशन अनिवार्य। लिव इन में पहचान छिपाया जाना भी दंडनीय अपराध होगा। लिव-इन में रिलेशन में जन्म लेने वाले बच्चे को कानूनी मान्यता और संपत्ति में अधिकार मिलेगा। विवाह का रजिस्ट्रेशन अनिवार्य होगा, सभी धर्मों के लिए विवाह-तलाक के समान नियम होंगे। जनजातीय को रियायत रहेगी। विवाह की न्यूनतम आयु तय की गई है, इसके तहत युवक की आयु 21 वर्ष और युवती की आयु 18 वर्ष तय है।
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