ऋषिकेश-कर्णप्रयाग के बीच दौड़ेगी ट्रेन, सुरंगों-पुलों का काम पूरा; 20 मई से पटरी बिछेगी
ऋषिकेश-कर्णप्रयाग के बीच 125 किलोमीटर रेल लाइन बिछाने का कार्य इसी माह 20 मई से शुरू होगा। सबसे पहले शिवपुरी-गूलर के बीच छह किलोमीटर की दूरी पर रेल लाइन बिछाई जाएगी। रेल लाइन पर सुरंग और पुलों का काम लगभग पूरा हो गया है। यह पहला मौका है जब उत्तराखंड में खड़े पहाड़ों पर रेलवे ट्रैक बिछेगा।

ऋषिकेश-कर्णप्रयाग के बीच 125 किलोमीटर रेल लाइन बिछाने का कार्य इसी माह 20 मई से शुरू होगा। सबसे पहले शिवपुरी-गूलर के बीच छह किलोमीटर की दूरी पर रेल लाइन बिछाई जाएगी। रेल लाइन पर सुरंग और पुलों का काम लगभग पूरा हो गया है। यह पहला मौका है जब उत्तराखंड में खड़े पहाड़ों पर रेलवे ट्रैक बिछेगा।
ऋषिकेश-कर्णप्रयाग के बीच 125 किलोमीटर रेल लाइन बिछाने का कार्य इसी माह 20 मई से शुरू होगा। नौ साल बाद ऋषिकेश से आगे सबसे पहले शिवपुरी-गूलर के बीच छह किलोमीटर की दूरी पर रेल लाइन बिछाई जाएगी। रेल लाइन बिछाने में ढाई साल का समय लगेगा। जिस पर 750 करोड़ रुपये का अनुमानित खर्च आएगा। रेल लाइन पर सुरंग और पुलों का काम लगभग पूरा हो गया है। यह पहला मौका है जब उत्तराखंड में खड़े पहाड़ों पर रेलवे ट्रैक बिछेगा।
अंडर ब्रिज और ओवरब्रिज का भी निर्माण
वर्ष 2017 में ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल लाइन निर्माण का कार्य शुरू हुआ। इसके लिये वर्ष 2020 में वीरभद्र से योगनगरी ऋषिकेश के बीच 5.6 किलोमीटर लंबी नई रेल लाइन बिछाई गई। पहले ब्लॉक सेक्शन के तहत इस बीच ऋषिकेश-हरिद्वार हाईवे पर अंडर ब्रिज और ऋषिकेश-दून मार्ग पर ओवरब्रिज का निर्माण भी किया गया। नौ साल बाद अब पहली बार ऋषिकेश से आगे रेल लाइन बिछाने का काम शुरू हो रहा है। ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल लाइन पर सुरंगों की खोदाई का कार्य अंतिम चरण में है।
सुरंगों का फाइनल लाइनिंग भी पूरा
अभी तक मुख्य और एस्केप कुल 213 किलोमीटर लंबी सुरंगों में 207 किलोमीटर सुरंग खोदी जा चुकी है, जबकि 125 किमी रेलवे ट्रैक पर 105 किलोमीटर मुख्य सुरंग में 102 किलोमीटर सुरंग खोदने का कार्य पूरा हो चुका है। खोदी गई सुरंगों का फाइनल लाइनिंग कार्य भी पूरा हो गया है।
छह करोड़ रुपये प्रति किलोमीटर खर्च
अब रेल विकास निगम रेल लाइन पर सबसे पहले टनल 2 शिवपुरी-गूलर के बीच छह किलोमीटर की दूरी पर रेल लाइन बिछायेगा। इसके बाद टनल 3 पर गूलर-व्यासी के बीच भी 6 किलोमीटर तक लाइन बिछाने का कार्य होगा। रेल लाइन बिछाने में छह करोड़ रुपये प्रति किलोमीटर खर्च आएगा। एक माह में छह किलोमीटर ट्रैक बिछाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। रेल विकास निगम ने ट्रैक बिछाने के लिये स्थान सर्वेक्षण कार्य पूरा कर लिया है।
नया अध्याय जुड़ने जा रहा
उत्तराखंड के विकास के इतिहास में एक नया अध्याय जुड़ने जा रहा है। जिस दुर्गम हिमालयी क्षेत्र में कभी रेल की कल्पना भी असंभव मानी जाती थी, वहां अब पटरियां बिछाने का काम धरातल पर उतरने वाला है। सामरिक और पर्यटन की दृष्टि से महत्वपूर्ण ‘ऋषिकेश–कर्णप्रयाग रेल परियोजना’ के तहत ट्रैक बिछाने की तैयारी शुरू हो गई है। यह केवल एक रेल लाइन नहीं, बल्कि सवा करोड़ उत्तराखंडियों के उस सपने की उड़ान है, जो दशकों से ठंडे बस्ते में पड़ा था।
141 साल पहले का सपना
पहाड़ों में रेल पहुंचाने की कोशिशें आज की नहीं हैं, बल्कि 141 साल पहले ब्रिटिश काल में ही इसकी जरूरत महसूस की गई थी। रिकॉर्ड बताते हैं कि 1885 में पहली बार इसके लिए सर्वे किया गया था। इसके बाद 1923-24 में देहरादून से मसूरी तक रेल लाइन बिछाने का दूसरा गंभीर प्रयास हुआ।
खड़े पहाड़ों पर रेलवे ट्रैक बिछेगा
उस समय की इंजीनियरिंग के लिए पहाड़ों को काटना एक बड़ी चुनौती थी। सुरंग निर्माण के दौरान हुए बड़े हादसों और सीमित तकनीकी संसाधनों के कारण अंग्रेजों को अपने कदम पीछे खींचने पड़े और यह योजना अधूरी रह गई। अब आधुनिक भारत में उत्तराखंड में पहाड़ पर ट्रेन पहुंचाने का सपना साकार होने वाला है। ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल लाइन पर सुरंग और पुलों का काम लगभग पूरा हो गया, अब ट्रैक बिछाने का काम शुरू होने वाला है। यह पहला मौका जब उत्तराखंड में खड़े पहाड़ों पर रेलवे ट्रैक बिछेगा।
102 किलोमीटर सुरंग खोदी जा चुकी
रेल विकास निगम ऋषिकेश के डीजीएम ओमप्रकाश मालगुडी ने कहा कि ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल लाइन पर अंतिम स्थान सर्वेक्षण का कार्य पूरा हो गया है। 20 मई से शिवपुरी-गूलर के बीच रेल लाइन बिछाने का काम शुरू होगा। ऋषिकेश में कंपनी ने ट्रैक डिजाइनिंग कार्य भी कर लिया है। अब पटरियां बिछाने का काम शुरू हो रहा है। 105 किलोमीटर मुख्य सुरंग में 102 किलोमीटर सुरंग खोदी जा चुकी है। इसी साल शेष टनल खुदाई का काम पूरा कर लिया जायेगा।
ब्लास्ट लेस तकनीक पर बिछेंगी पटरियां
ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल लाइन पर ब्लास्ट लेस तकनीक पर आधारित पटरियां बिछायी जानी है। यह पूरी तरह आरसीसी स्लैब पर आधारित है। इस प्रकार का ट्रैक यूरोप, चीन और जापान में हाई स्पीड रेल नेटवर्क में उपयोग किया जाता है। परियोजना में रेलवे के उपक्रम इरकॉल इंटरनेशनल के साथ पारस और पीसीएम कंपनी भी ट्रैक बिछाने का काम करेगी।
लेटेस्ट Hindi News , बॉलीवुड न्यूज, बिजनेस न्यूज, टेक , ऑटो, करियर , और राशिफल, पढ़ने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।




साइन इन