उत्तराखंड में प्रॉपर्टी डीलरों की मनमानी पर लगेगी रोक, खसरा नंबर को ही फ्रीज कर दिया जाएगा
उत्तराखंड में अवैध कॉलोनियों के जाल को काटने के साथ ही प्रॉपर्टी डीलरों की मनमानी पर लगाम कसने को सरकार ‘सुरक्षा कवच’ तैयार कर रही है। अब केवल अवैध निर्माण को ध्वस्त करना ही काफी नहीं होगा, बल्कि उन जमीनों के खसरा नंबरों को ही फ्रीज कर दिया जाएगा, ताकि वहां पर दोबारा अवैध प्लॉटिंग नहीं हो सके।

उत्तराखंड में अवैध कॉलोनियों के जाल को काटने के साथ ही प्रॉपर्टी डीलरों की मनमानी पर लगाम कसने को सरकार ‘सुरक्षा कवच’ तैयार कर रही है। अब केवल अवैध निर्माण को ध्वस्त करना ही काफी नहीं होगा, बल्कि उन जमीनों के खसरा नंबरों को ही फ्रीज कर दिया जाएगा, ताकि वहां पर दोबारा अवैध प्लॉटिंग नहीं हो सके।
उत्तराखंड भूसंपदा नियामक प्राधिकरण (रेरा) ने इसका खाका तैयार कर लिया है। इसके तहत शहर के बाहरी और ग्रामीण इलाकों में होने वाले अनियोजित विकास को रोकने के लिए सख्त विधिक कार्रवाई की तैयारी है। बता दें कि, राज्यभर में निर्माण गतिविधियों को पारदर्शी बनाने के लिए विभिन्न विकास प्राधिकरणों की ओर से जिन अवैध प्लॉटिंग को ध्वस्त किया जाएगा, उनके खसरा नंबरों की जानकारी तत्काल विभागों को दी जाएगी।
खसरा नंबर पर रोक लगने से प्रॉपर्टी डीलर उन जमीनों की बिक्री आगे नहीं कर पाएंगे। इसके साथ ही जिलाधिकारी, निबंधक और उप-निबंधक अब ध्वस्त की गई सभी अवैध प्लॉटिंग का पूरा डाटा रेरा को सौंपेंगे। इसके लिए विकास प्राधिकरण और रेरा के बीच विशेष समन्वय प्रणाली बनाई जा रही है। इस पर काम तेजी के साथ शुरू कर दिया गया है।
‘लूपहोल’ को किया जाएगा बंद
दरअसल, अब तक देखा गया है कि ध्वस्तीकरण की कार्रवाई के दो-तीन महीने बाद मामला ठंडा पड़ते ही डीलर फिर से अवैध कॉलोनी खड़ी कर देते थे। खसरा नंबर फ्रीज होने से ‘लूपहोल’ को बंद कर दिया जाएगा।
आम जनता को क्या होगा फायदा?
अक्सर भोले-भाले लोग कम कीमत के लालच में ऐसी अवैध कॉलोनियों में निवेश कर देते हैं, जहां न तो नक्शा स्वीकृत होता है और न ही बुनियादी सुविधाएं मिल पाती हैं। मगर अब रेरा के इस कदम से धोखाधड़ी के मामलों में कमी आएगी। जब प्लॉटिंग कानून के दायरे में होगी, तो खरीदार का पैसा सुरक्षित रहेगा। शहरों के बाहरी इलाकों में अनियंत्रित बस्तियों की जगह अब व्यवस्थित और स्वीकृत कॉलोनियां बसेंगी। खरीदार को जमीन लेने से पहले यह स्पष्ट पता होगा कि प्रोजेक्ट रेरा से पंजीकृत है या नहीं।
रेरा खुद करेगा सख्त निगरानी
अब केवल विकास प्राधिकरणों के अधिसूचित क्षेत्र ही नहीं, बल्कि उनके बाहर ग्रामीण और सीमावर्ती इलाकों में भी अगर भूखंडों का उप विभाजन या कॉलोनी विकसित की जाती है, तो वहां रेरा सीधे हस्तक्षेप और सख्त निगरानी करेगा।
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