Rudrapur Gangrape Accuse release on bail in High court Victim refuse to Identify रुद्रपुर के चर्चित गैंगरेप केस में सजा काट रहे दोषियों को HC ने किया रिहा, पीड़िता ने नहीं की पहचान, Uttarakhand Hindi News - Hindustan
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रुद्रपुर के चर्चित गैंगरेप केस में सजा काट रहे दोषियों को HC ने किया रिहा, पीड़िता ने नहीं की पहचान

उत्तराखंड हाईकोर्ट ने रुद्रपुर के एक चर्चित सामूहिक दुष्कर्म मामले में सजा काट रहे दो अभियुक्तों धीर सिंह और अजय कुमार की सजा को निलंबित करते हुए उन्हें जमानत पर रिहा करने के आदेश दिए हैं।

Fri, 27 Feb 2026 10:13 AMGaurav Kala रुद्रपुर/नैनीताल
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रुद्रपुर के चर्चित गैंगरेप केस में सजा काट रहे दोषियों को HC ने किया रिहा, पीड़िता ने नहीं की पहचान

उत्तराखंड हाईकोर्ट ने ऊधमसिंह नगर जिले के रुद्रपुर क्षेत्र के एक चर्चित सामूहिक दुष्कर्म मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। न्यायालय ने मामले में सजा काट रहे दो अभियुक्तों, धीर सिंह और अजय कुमार की सजा को निलंबित कर दिया है और उन्हें जमानत पर रिहा करने के आदेश दिए हैं। मामले में तर्क दिया गया कि ट्रायल कोर्ट में पीड़िता और उसके पिता ने आरोपियों की पहचान नहीं की थी।

यह आदेश न्यायमूर्ति रवींद्र मैठाणी और न्यायमूर्ति सिद्धार्थ शाह की खंडपीठ ने गुरुवार को अभियुक्तों द्वारा दायर आपराधिक अपील और जमानत प्रार्थना पत्र पर सुनवाई के बाद दिया। अभियुक्तों ने निचली अदालत के उस फैसले को चुनौती दी थी, जिसने उन्हें इस गंभीर अपराध का दोषी पाते हुए कठोर कारावास की सजा सुनाई थी।

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क्या था मामला?

अभियोजन पक्ष के अनुसार, यह घटना 19-20 अगस्त 2020 की रात की है। आरोप था कि अभियुक्तों ने अपने अन्य साथियों के साथ मिलकर एक युवती के साथ सामूहिक दुष्कर्म की वारदात को अंजाम दिया था। इस मामले में रुद्रपुर की अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायालय ने 22 जुलाई 2025 को अपना फैसला सुनाते हुए दोनों अभियुक्तों को दोषी करार दिया था और सजा सुनाई थी।

पीड़िता ने नहीं की पहचान

सुनवाई के दौरान अभियुक्तों के अधिवक्ताओं ने तर्क दिया कि निचली अदालत का फैसला ठोस साक्ष्यों पर आधारित नहीं था। बचाव पक्ष ने अदालत के सामने महत्वपूर्ण बिंदु रखे। ट्रायल के दौरान पीड़िता और उसके पिता ने न तो अभियुक्तों का नाम लिया और न ही न्यायालय में उनकी पहचान की। मामले के मुख्य गवाहों ने भी अभियुक्तों को पहचानने से इनकार कर दिया था। तर्क दिया गया कि जब मुख्य गवाह और स्वयं पीड़िता ही अभियुक्तों की पहचान नहीं कर पा रहे हैं, तो सजा का कोई वैधानिक आधार नहीं रह जाता।

छात्रा से दुष्कर्म के दोषी को दस साल का कारावास

एक अन्य मामले में विशेष न्यायाधीश पॉक्सो अश्वनी गौड़ की अदालत ने छात्रा से घर में घुसकर दुष्कर्म करने के मामले में आरोपी को दोषी करार देते हुए 10 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही 20 हजार रुपये का अर्थदंड लगाया है।

अभियोजन के अनुसार, 8 मार्च 2023 की रात थाना पंतनगर क्षेत्र निवासी एक किशोरी अपने दो छोटे भाइयों के साथ घर पर अकेली थी। आरोप है कि तभी पंतनगर निवासी भुलाई उर्फ भोलई यादव घर का दरवाजा तोड़कर अंदर घुसा। उसने बिजली बंद की और छात्रा से कमरे में दुष्कर्म किया। इसके बाद आरोपी फरार हो गया। मामला परिजनों तक नहीं पहुंच पाया। इस कारण आरोपी के हौसले बुलंद हो गए। इसके बाद 30 मार्च 2023 को जब परिवार के सदस्य गांव गए हुए थे, आरोपी फिर से बहाना बनाकर घर में घुसा और छात्रा के साथ दुष्कर्म किया। इसके बाद पीड़िता ने घटना की जानकारी परिजनों को दी।

पिता की तहरीर पर थाना पंतनगर पुलिस ने मुकदमा दर्ज किया और पीड़िता के बयान मजिस्ट्रेट के समक्ष कराए गए। विवेचना पूरी होने पर आरोप पत्र न्यायालय में पेश किया गया। मामले की सुनवाई विशेष न्यायाधीश पॉक्सो अश्वनी गौड़ की अदालत में हुईं। गुरुवार को सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से पेश किए गए साक्ष्य और गवाहों के अवलोकन के बाद अदालत ने आरोपी को दोषी करार देते हुए 10 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई।

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