रामदेव को HC से पर्सनैलिटी राइट्स का कवच; इमेज के गलत यूज, AI डीप फेक VIDEO पर रोक
दिल्ली हाई कोर्ट ने रामदेव की अनुमति के बिना उनके नाम, फोटो और आवाज के इस्तेमाल पर रोक लगा दी है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि एआई या डीपफेक तकनीक से उनकी छवि खराब करना गलत है।

दिल्ली हाई कोर्ट ने बाबा रामदेव के नामए आवाज और चेहरे के बिना इजाजत इस्तेमाल पर पूरी तरह रोक लगा दी है। अदालत ने साफ किया कि AI और डीपफेक तकनीक के जरिए उनके व्यक्तित्व का गलत इस्तेमाल करना उनकी साख को नुकसान पहुंचाता है। अदालत ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को ऐसे आपत्तिजनक कंटेंट हटाने को भी कहा है जिनमें उनको दूसरे और गलत लोगों की दवाओं या उत्पादों का प्रचार करते हुए दिखाया गया है। अदालत ने कहा कि बिना अनुमति रामदेव की पहचान का कॉमर्शियल इस्तेमाल उनके अधिकारों का उल्लंघन है।
एआई और डीपफेक वीडियो से बने गलत कंटेंट पर भी रोक
दिल्ली हाई कोर्ट ने रामदेव के नाम, इमेज, आवाज और उनकी पर्सनैलिटी खूबियों के बिना इजाजत गलत इस्तेमाल पर सभी फॉर्मेट और मीडियम में रोक लगा दी। इसमें एआई और डीपफेक वीडियो से बने कंटेंट भी शामिल हैं। जस्टिस ज्योति सिंह ने एक अंतरिम आदेश में रामदेव के पर्सनैलिटी अधिकारों की रक्षा करते हुए कहा कि बिना इजाजत वाले डीपफेक वीडियो और वेब पेज योग गुरु की साख का गलत इस्तेमाल करते हैं। इनमें रामदेव को दूसरों के प्रोडक्ट्स या दवाओं का प्रचार करते हुए दिखाया गया है।
वादी को उत्पादों के साथ जोड़ा गया
अदालत ने पाया कि आरोपित कंटेंट न केवल रामदेव की छवि, आवाज, समानता और उनके पर्सनैलिटी की रक्षा करने के अधिकारों का उल्लंघन करते हैं वरन एक कदम आगे जाते हैं। इनमें एआई जैसी आधुनिक तकनीक का उपयोग करके वादी की छवियों को तोड़ामरोड़ा गया है और ऐसे लोगों और उत्पादों के साथ जोड़ा गया है जिनसे उसका कोई संबंध नहीं है। अदालत ने 18 फरवरी को पारित आदेश में कहा कि इससे योग गुरु की पब्लिक इमेज और उनकी क्रेडिबिलिटी खराब हो सकती है।
फायदा उठाने की कोशिश का आरोप
रामदेव की ओर से अदालत को बताया गया कि यूट्यूब, फेसबुक, इंस्टाग्राम, एक्स के साथ ई-कॉमर्स वेबसाइटों पर उनके एआई से बने डीपफेक वीडियो, उनकी एडिटेड तस्वीरें, नकली सोशल मीडिया अकाउंट हैं। इन डीपफेक वीडियो, एडिटेड तस्वीरों और नकली सोशल मीडिया अकाउंट से उनकी छवि का गलत इस्तेमाल किया गया है। उन्होंने आरोप लगाया था कि ऐसी गतिविधियां उनके व्यक्तित्व अधिकारों का गलत इस्तेमाल करने और फायदा उठाने के लिए की गई हैं।
आपत्तिजनक सामग्री हटाने का आदेश
अदालत ने आदेश मिलने के 72 घंटों के भीतर प्लेटफॉर्म से आपत्तिजनक सामग्री हटाने का निर्देश दिया। कोर्ट ने अगली सुनवाई तक सभी प्रतिवादियों को बाबा रामदेव के नाम, उनकी आवाज, फोटो और उनकी पहचान से जुड़ी किसी भी विशेषता का बिना अनुमति इस्तेमाल करने से रोक दिया है। आदेश में साफ किया गया है कि किसी भी कमर्शियल या निजी फायदे के लिए रामदेव के नाम या व्यक्तित्व का गलत उपयोग नहीं किया जा सकता। इसमें डीपफेक वीडियो या वॉयस क्लोन के कंटेंट भी शामिल हैं।




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