Heartbreak is Common Today Cannot Be Sole Ground for Suicide says Delhi High court दिल टूटना आज आम बात हो गई, यह सुसाइड का कारण नहीं हो सकता; किस केस में बोला दिल्ली HC, Ncr Hindi News - Hindustan
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दिल टूटना आज आम बात हो गई, यह सुसाइड का कारण नहीं हो सकता; किस केस में बोला दिल्ली HC

प्रेमी के किसी दूसरी महिला से शादी के पांच दिन बाद युवती की आत्महत्या प्रकरण पर सुनवाई करते हुए दिल्ली हाई कोर्ट ने टिप्पणी की कि आज दिल टूटना आम बात हो गई है, यह सुसाइड का कारण नहीं हो सकता।

Wed, 25 Feb 2026 01:41 PMGaurav Kala नई दिल्ली, पीटीआई
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दिल टूटना आज आम बात हो गई, यह सुसाइड का कारण नहीं हो सकता; किस केस में बोला दिल्ली HC

दिल्ली हाई कोर्ट ने आत्महत्या के लिए उकसाने के एक मामले में महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा कि केवल रिश्ते का टूट जाना आपराधिक कानून के तहत आत्महत्या के लिए उकसाने का आधार नहीं माना जा सकता। न्यायमूर्ति मनोज जैन की पीठ ने एक आरोपी की जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान यह टिप्पणी की।

मामला एक युवती की आत्महत्या से जुड़ा है, जिसने अपने पूर्व पार्टनर की दूसरी महिला से शादी होने के पांच दिन बाद फांसी लगाकर जान दे दी थी। युवती के पिता का आरोप था कि आरोपी ने उनकी बेटी को प्रेम जाल में फंसाया और शादी के लिए धर्म परिवर्तन का दबाव बनाया, जिसके चलते उसने अक्टूबर 2025 में यह आत्मघाती कदम उठाया। इस मामले में आरोपी को नवंबर 2025 में गिरफ्तार किया गया था।

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हाई कोर्ट की अहम टिप्पणी

अदालत ने आरोपी को जमानत देते हुए मामले के विभिन्न पहलुओं पर गौर किया। कोर्ट ने कहा कि उकसावा ऐसा होना चाहिए जो मृतक के पास आत्महत्या के अलावा कोई और विकल्प न छोड़े। महज ब्रेकअप को 'उकसावा' नहीं माना जा सकता। अदालत ने आशंका जताई कि यह ट्रायल के बाद ही स्पष्ट होगा कि यह कदम उकसावे के कारण उठाया गया था या "अति-संवेदनशील" होने की वजह से।

कोर्ट ने नोट किया कि दोनों के बीच बातचीत फरवरी 2025 से ही बंद थी, जबकि आत्महत्या अक्टूबर में हुई। इस लंबे अंतराल से उकसावे की थ्योरी कमजोर होती है। युवती की सहेलियों के बयानों में केवल उसके परेशान होने की बात सामने आई, धर्म परिवर्तन के दबाव का कोई जिक्र नहीं मिला।

"रिश्ते टूटना अब आम बात"

अदालत ने अपने आदेश में कहा, "आजकल रिश्तों का टूटना और दिल टूटना आम बात हो गई है। महज रिश्ते का खत्म होना भारतीय न्याय संहिता की धारा 108 के तहत आत्महत्या के लिए उकसाने का मामला नहीं बनता।" कोर्ट ने यह भी पाया कि 8 साल के लंबे रिश्ते के दौरान मृतका की ओर से पहले कभी कोई शिकायत दर्ज नहीं कराई गई थी।

जमानत की शर्तें

आरोपी ने अदालत में दलील दी थी कि लड़की के माता-पिता अलग-अलग धर्म होने के कारण इस रिश्ते के खिलाफ थे और उन्होंने ही उसे रिश्ता तोड़ने पर मजबूर किया था। परिस्थितियों को देखते हुए, अदालत ने आरोपी को 25,000 रुपये के निजी मुचलके और इतनी ही राशि की जमानत राशि पर रिहा करने का आदेश दिया।

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