Now 4 coloured dustbins are mandatory in Uttarakhand, know the use of red and yellow bins उत्तराखंड में अब 4 रंग के कूड़ेदान जरूरी, लाल-पीले डिब्बे में क्या रखा जाएगा? गंदगी मिलने पर अफसर…, Uttarakhand Hindi News - Hindustan
More

उत्तराखंड में अब 4 रंग के कूड़ेदान जरूरी, लाल-पीले डिब्बे में क्या रखा जाएगा? गंदगी मिलने पर अफसर…

अब अगर शहर या गांव में गंदगी मिली तो जिम्मेदार अफसरों को जेल की हवा तक खानी पड़ सकती है। वहीं भारी जुर्माने के साथ विभागीय कार्रवाई का भी सामना करना पड़ सकता है। अब नीले-हरे डिब्बे के साथ लाल और पीला डिब्बा भी रखना होगा।

Sat, 28 March 2026 07:37 AMRatan Gupta हिन्दुस्तान, देहरादून
share
उत्तराखंड में अब 4 रंग के कूड़ेदान जरूरी, लाल-पीले डिब्बे में क्या रखा जाएगा? गंदगी मिलने पर अफसर…

अब अगर शहर या गांव में गंदगी मिली तो जिम्मेदार अफसरों को जेल की हवा तक खानी पड़ सकती है। वहीं भारी जुर्माने के साथ विभागीय कार्रवाई का भी सामना करना पड़ सकता है। अब नीले-हरे डिब्बे के साथ लाल और पीला डिब्बा भी रखना होगा। एक अप्रैल से प्रदेश में नया सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट लागू होने जा रहा है। शहरी विकास विभाग ने इसकी तैयारी पूरी कर ली है। सभी निकायों को इसे कड़ाई से लागू करने के लिए पत्र भेजा गया है। नए नियमों के अनुसार अब कूड़े को दो की बजाय चार हिस्सों में अलग करना अनिवार्य होगा।

नीले-हरे और लाल-पीले डिब्बे में क्या रखा जाएगा?

अब नीले-हरे के साथ पीले और लाल रंग के डिब्बे भी जोड़े गए हैं। इसके तहत गीला, सूखा, घरेलू खतरनाक और सैनिटरी कचरे को अलग-अलग रखना होगा। कूड़ा प्रबंधन की जिम्मेदारी शहरी क्षेत्रों में नगर निकायों और ग्रामीण क्षेत्रों में पंचायतों को दी गई है। इसकी निगरानी केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड करेगा।

read moreये भी पढ़ें:
ये भी पढ़ें:PM मोदी से मिले CM धामी, डिफेंस हब समेत इन3 बड़ी मांगों से बदल सकता है उत्तराखंड

नियमों की अनदेखी पर जुर्माना और जेल भी जा सकते

नियमों की अनदेखी पर पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 के तहत कार्रवाई की जाएगी, जिसमें जुर्माना और कारावास दोनों शामिल हैं। इसके अलावा प्रदूषक भुगतान सिद्धांत के आधार पर राष्ट्रीय हरित अधिकरण के दिशा-निर्देशों के अनुसार पर्यावरणीय मुआवजा भी लगाया जा सकता है।

इसके साथ ही तय समय में कार्य योजना प्रस्तुत न करने या गलत जानकारी देने पर विभागीय जांच की जाएगी। निरीक्षण के दौरान खामियां मिलने पर संबंधित एजेंसियां नोटिस जारी कर मुकदमे की संस्तुति भी कर सकती हैं। पहाड़ी राज्यों जैसे उत्तराखंड में कचरा प्रबंधन में लापरवाही पर और अधिक सख्त कार्रवाई के भी निर्देश हैं।

read moreये भी पढ़ें:
ये भी पढ़ें:उत्तराखंड में बिजली ग्राहक परेशान हुए तो MD और डायरेक्टर तक पर गिरेगी गाज

तीसरी श्रेणी: घरेलू खतरनाक कचरा

जिसमें ऐसी वस्तुएं आती हैं जो स्वास्थ्य और पर्यावरण के लिए हानिकारक हो सकती हैं। इसमें पुरानी बैटरियां, पेंट के डिब्बे, कीटनाशक की बोतलें, ट्यूबलाइट और एक्सपायर दवाएं शामिल हैं। कचरे को लाल या काले रंग के कूड़ेदान में रखना होगा।

चौथी श्रेणी:स्वच्छता अपशिष्ट पदार्थ

इसमें इस्तेमाल किए गए डायपर और सैनिटरी नैपकिन शामिल हैं। इन्हें सीधे कूड़ेदान में डालने के बजाय कागज या डिस्पोजेबल पाउच में लपेटकर अलग से देने के निर्देश दिए गए हैं। जिससे गंदगी न फैलने पाए।

read moreये भी पढ़ें:
ये भी पढ़ें:क्या सुसाइड से पहले तन्वी के साथ कार में कोई था? CCTV खंगाल रही पुलिस

लेटेस्ट   Hindi News ,    बॉलीवुड न्यूज,   बिजनेस न्यूज,   टेक ,   ऑटो,   करियर , और   राशिफल, पढ़ने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।