नेपाल के सुनील क्षेत्री भारतीय सेना में अब लेफ्टिनेंट, जेन जी आंदोलन पर सख्त संदेश
लेफ्टिनेंट सुनील क्षेत्री ने जेन जी को संदेश दिया कि समस्याओं का समाधान बातचीत के माध्यम से होना चाहिए। प्रोटेस्ट करना ठीक है। लेकिन, सरकारी संपत्ति की तोड़-फोड़ और किसी को चोट या जान का नुकसान नहीं होना चाहिए।

भारतीय सेना को 491 युवा सैन्य अफसर मिल गए हैं। आईएमए देहरादून से पासआउट इन अफसरों में देश की आन, बान और शान की रक्षा के लिए मर मिटने का जज्बा दिखा। पासिंग आउट परेड की सलामी सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने ली। इस दौरान 14 मित्र देशों के 34 अफसर भी पासआउट हुए, जो अपने-अपने देश की सेनाओं में सेवाएं देंगे। पीओपी में स्पेशल कमीशन ऑफिसर्स कैटेगरी में नेपाल के लेफ्टिनेंट सुनील कुमार ने सिल्वर मेडल अपने नाम किया। उन्होंने जेन जी को सख्त संदेश भी दिया।
लेफ्टिनेंट सुनील कुमार क्षेत्री ने 14 साल पहले सेना में जवान से देशसेवा शुरू की थी। उन्होंने हाल में नेपाल में हुए जेन-जी के आंदोलन के सवाल पर अपनी राय दी। कहा कि विरोध-प्रदर्शन ठीक है, लेकिन सरकारी संपत्ति और जीवन को नुकसान नहीं पहुंचाना चाहिए।
लेफ्टिनेंट क्षेत्री ने जेन जी को संदेश दिया कि समस्याओं का समाधान बातचीत के माध्यम से होना चाहिए। प्रोटेस्ट करना ठीक है। लेकिन, सरकारी संपत्ति की तोड़-फोड़ और किसी को चोट या जान का नुकसान नहीं होना चाहिए। जेन जी के लीडरों को बातचीत करके, कोऑर्डिनेट करके उनको सॉल्व करना चाहिए। हिंसा नहीं होनी चाहिए।
लेफ्टिनेंट सुनील कुमार क्षेत्री के लिए यह उपलब्धि उनके 14 साल के समर्पण और कठिन परिश्रम का फल है। वह 2012 में एक जवान के रूप में भारतीय सेना की 2/8 गोरखा राइफल्स में भर्ती हुए थे। उनके पिता तर्क बहादुर भी भारतीय सेना से सूबेदार के पद पर सेवानिवृत्त हुए हैं। सुनील ने बताया कि उन्होंने पांचवीं कक्षा तक की पढ़ाई भारत के पठानकोट में की और 12वीं तक की पढ़ाई नेपाल से पूरी की।
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