Indian Army Must Transform into Future Ready Force says Army Chief Gen Upendra Dwivedi युद्ध का पैटर्न बदल रहा, अब 'फ्यूचर रेडी फोर्स' से ही बनेगी बात: आर्मी चीफ जनरल उपेंद्र द्विवेदी, Uttarakhand Hindi News - Hindustan
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युद्ध का पैटर्न बदल रहा, अब 'फ्यूचर रेडी फोर्स' से ही बनेगी बात: आर्मी चीफ जनरल उपेंद्र द्विवेदी

सेना प्रमुख ने युवा अफसरों को संबोधित करते हुए कहा कि ऑपरेशन सिंदूर हमारी ताकत का नमूना भर है, लेकिन आज का वैश्विक और क्षेत्रीय परिदृश्य निरंतर अस्थिरता से गुजर रहा है। उन्होने फ्यूचर रेडी फोर्स पर जोर दिया।

Sun, 14 Dec 2025 09:12 AMGaurav Kala देहरादून
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युद्ध का पैटर्न बदल रहा, अब 'फ्यूचर रेडी फोर्स' से ही बनेगी बात: आर्मी चीफ जनरल उपेंद्र द्विवेदी

भारतीय सैन्य अकादमी (आईएमए) की पासिंग आउट परेड में थल सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने कहा कि ऑपरेशन ‘सिंदूर’ भारत की संतुलित, सटीक और दृढ़ प्रतिक्रिया क्षमता का प्रभावशाली नमूना है। इस अभियान ने न केवल देश की सैन्य तत्परता को उजागर किया, बल्कि भारतीय सेना के संकल्प और पेशेवर दक्षता को भी स्पष्ट रूप से प्रदर्शित किया।

फ्यूचर रेडी फोर्स में बदलने पर जोर

थल सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने आगे यह भी कहा कि भारतीय सेना इस समय परिवर्तन के दौर से गुजर रही है। युद्ध के बदलते स्वरूप को देखते हुए भारतीय सेना को फ्यूचर रेडी फोर्स में बदलने पर जोर है। ऐसे में युवा सैन्य अधिकारियों की भूमिका ज्यादा महत्वपूर्ण हो गई है। जनरल द्विवेदी आईएमए में शनिवार को पीओपी के बाद नए अधिकारियों को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि युवा अधिकारी ऐसे समय में सेना में प्रवेश कर रहे हैं, जब सुरक्षा चुनौतियां जटिल, बहुआयामी और तेजी से बदलने वाली हैं। भविष्य में युद्ध, जमीन से ज्यादा तकनीकी रूप से लड़ा जाएगा।

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थल सेना प्रमुख ने कहा कि आज का वैश्विक और क्षेत्रीय परिदृश्य निरंतर अस्थिरता से गुजर रहा है। पड़ोसी देशों के साथ बढ़ती प्रतिस्पर्धा और बदलते युद्ध के स्वरूप ने सेना के सामने नई चुनौतियां खड़ी कर दी हैं। ऐसे माहौल में अधिकारियों को केवल पारंपरिक युद्ध कौशल में ही नहीं, बल्कि तेजी से निर्णय लेने, परिस्थितियों के अनुरूप ढलने और सीमित संसाधनों में नेतृत्व की क्षमता भी विकसित करनी होगी।

युवा अफसरों की हौसला-अफजाई

आईएमए में सैन्य अफसरों को संबोधित करते हुए थलसेना प्रमुख ने कहा कि सेना के भीतर तकनीक, रणनीति और संगठनात्मक ढांचे में व्यापक बदलाव हो रहे हैं। युवा अधिकारियों से अपेक्षा है कि वे नवाचार और अनुशासन के बीच संतुलन बनाए रखें। संकट या युद्ध की स्थिति में जब व्यवस्थाएं कमजोर पड़ती हैं, तब अधिकारी का नेतृत्व सैनिकों के लिए सबसे बड़ा भरोसा बन जाता है। उन्होंने नेतृत्व की व्याख्या करते हुए कहा कि अधिकारी केवल आदेश देने वाला नहीं, बल्कि उदाहरण प्रस्तुत करने वाला होना चाहिए। जोखिम उठाने का साहस, रचनात्मक सोच और मानवीय संवेदना आज के सैन्य नेतृत्व की अनिवार्य शर्तें हैं। करुणा और जिम्मेदारी के साथ लिया गया निर्णय सैनिकों का मनोबल ऊंचा रखता है और उन्हें कठिन परिस्थितियों में भी एकजुट बनाए रखता है। थलसेना प्रमुख ने मित्र देशों के कैडेट्स को भी बधाई दी।

इससे पहले सुबह 9.31 बजे सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी चार घोड़ों वाली पटियाला बग्घी से पहुंचे और परेड की सलामी ली। समारोह में सेना प्रमुख ने ट्रेनिंग के दौरान बेहतर अनुशासन और प्रदर्शन करने वाले जेंटलमैन कैडेट्स को अवार्ड भी दिए। जेंटलमैन कैडेट्स ने परेड मैदान से विदाई लेकर अंतिम पग पार किया। इसके बाद पीपिंग सरेमनी हुई और पहला कदम पार कर वे भारतीय सेना का हिस्सा बन गए। इस दौरान उन पर आसमान से तीन हेलीकॉप्टरों से पुष्पवर्षा की गई।

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