राजौरी में शहीद बीरेश्वर के कंधों पर आज लगने थे कैप्टन के सितारे; अंतिम विदाई में सब रो पड़े
लेफ्टिनेंट बीरेश्वर गोस्वामी की अंतिम यात्रा में हुजूम उमड़ा। दादी-मां का दर्द देख सब रो पड़े। प्रधानाध्यापिका मां बोलीं, बेटे ने जल्द आऊंगा का वादा नहीं निभाया।

Lieutenant Beereshwar goswami Martyred: जम्मू-कश्मीर के राजौरी में आतंकवाद विरोधी अभियान ‘ऑपरेशन शेरूवाली’ के दौरान अल्मोड़ा के वीर सपूत लेफ्टिनेंट बीरेश्वर गोस्वामी शहीद हो गए। देश के लिए सर्वस्व न्योछावर करने वाले लेफ्टिनेंट बीरेश्वर गोस्वामी की अंतिम विदाई में दादी-मां का दर्द देख सब रो पड़े। बीरेश्वर के आठ जून को होने वाले प्रमोशन को लेकर बटालियन में उल्लास का माहौल था। बीरेश्वर के नए पद यानी कैप्टन रैंक के प्रतीक चिह्न, मेडल और स्टार्स भी हेडक्वार्टर से जारी होकर तैनाती स्थल तक पहुंच चुके थे।
मूल रूप से द्वाराहाट के बग्वालीपोखर बाड़ी और वर्तमान में अथरबनी पाण्डेखोला निवासी 25 वर्षीय बीरेश्वर गोस्वामी 2023 में पासआउट हुए थे। जून 2024 में वह कमीशन उत्तीर्ण कर सैन्य अधिकारी लेफ्टिनेंट बने थे। वर्तमान में उनकी तैनाती हमीरपुर में थी और महज चार दिन पूर्व ही वह राजौरी में चल रहे ‘आपरेशन शेरूवाली’ का हिस्सा बने थे।
मां का रो-रोकर बुरा हाल- बेटा जल्द आने का वादा नहीं निभा सका
लेफ्टिनेंट बीरेश्वर गोस्वामी की शहादत की खबर के बाद से पूरा क्षेत्र गमगीन रहा। अंतिम यात्रा शुरू होने से पहले ही बड़ी संख्या में लोग उनके आवास पर जुटने लगे थे। प्राथमिक विद्यालय वलसा में प्रधानाध्यापिका के पद पर तैनात शहीद की मां सरस्वती गोस्वामी का रो-रोकर बुरा हाल रहा। वे बार-बार बेसुध होकर सिर्फ एक ही बात दोहरा रहीं थीं, जल्द आऊंगा कहा था, इतनी जल्दी कहां चला गया मेरा लाल।
मां-दादी का दर्द देख सब रो पड़े
भनोली तहसील में मुख्य प्रशासनिक अधिकारी पद पर कार्यरत पिता प्रमोद नाथ गोस्वामी के लिए अपने युवा बेटे को खोने का दर्द असहनीय हो चला था। अबड़े भाई अमित गोस्वामी के आंसू भी थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। वहीं, 83 साल की दादी नंदी देवी तो पोते की शहादत के गम में बेसुध हैं। सैनिक कल्याण मंत्री गणेश जोशी ने अपने शोक संदेश में कहा कि लेफ्टिनेंट गोस्वामी का साहस और बलिदान हर देशवासी के हृदय में सदैव अमर रहेगा।
कैप्टन बनने से ठीक दो दिन पहले बीरेश्वर हुए शहीद
अल्मोड़ा। राष्ट्ररक्षा के सर्वोच्च कर्तव्य के बीच, अल्मोड़ा के एक और जांबाज सैन्य अफसर शहादत के अमर फलक पर दर्ज हो गए। हृदयविदारक सैन्य संयोग यह रहा कि आगामी आठ जून को जांबाज अफसर की सैन्य सेवा के गौरवशाली दो वर्ष पूर्ण हो रहे थे, जिसके ठीक बाद सेना के नियमों के तहत उनकी वर्दी पर कैप्टन के सितारे सजना तय था। परंतु, इस ऐतिहासिक पदोन्नति से महज 48 घंटे पूर्व ही वह शहीद हो गए। परिजनों के मुताबिक बीरेश्वर जनवरी 2023 को आर्मी में भर्ती हुए थे।
बटालियन में आ चुके थे मेडल और स्टार्स
परिजनों के मुताबिक पांच असम रेजिमेंट की बटालियन में आठ जून को होने वाले प्रमोशन को लेकर उल्लास का माहौल था। बीरेश्वर के नए पद यानी कैप्टन रैंक के प्रतीक चिह्न, मेडल और स्टार्स भी हेडक्वार्टर से जारी होकर तैनाती स्थल तक पहुंच चुके थे। साथी जवान और अधिकारी इस बड़े दिन के जश्न की भव्य तैयारियों में जुटे थे, लेकिन किसे पता था कि जिसके कंधों पर सोमवार को नए सितारे चमकाने थे, रविवार को उसी जांबाज को तिरंगे में लपेटकर अंतिम विदाई देनी पड़ेगी।
आठ जून को सैन्य सेवा के दो साल पूरे हो जाते
अल्मोड़ा। इसके बाद आठ जून 2024 को 23 वर्ष की उम्र में बीरेश्वर गोस्वामी कमीशन पास आउट कर भारतीय सेना की पांच असम रेजिमेंट में लेफ्टिनेंट बन गए। 25 वर्षीय लेफ्टिनेंट बीरेश्वर गोस्वामी आठ जून 2026 को अपनी सैन्य सेवा के दो साल पूरे करने जा रहे थे। दो साल की सफल सेवा के बाद लेफ्टिनेंट को प्रमोट कर सीधे कैप्टन बनने की तैयारी चल रही थी। पांच असम रेजिमेंट के साथ परिजन भी इस पल का बेसब्री से इंतजार कर कर रहे थे, लेकिन दो दिन पहले उन्होंने देश के लिए सर्वोच्च बलिदान दे दिया।
दो साल की बेदाग सेवा के बाद मिलती है कैप्टन रैंक
जिला सैनिक कल्याण के अधिकारियों के मुताबिक राष्ट्रीय रक्षा अकादमी या भारतीय सैन्य अकादमी से कमीशन पाकर आने वाले सैन्य अधिकारियों को पहली रैंक लेफ्टिनेंट की मिलती है। इसके बाद बिना किसी आंतरिक परीक्षा के, ठीक दो वर्ष की सक्रिय और सफल सेवा पूरी होने पर टाइम-स्केल प्रमोशन के तहत अधिकारी सीधे कैप्टन बन जाता है। लेफ्टिनेंट बीरेश्वर गोस्वामी आठ जून को इसी गरिमामयी समय-सीमा को पूरा कर रहे थे और उनका ट्रैक रिकॉर्ड बेहद शानदार था।
रिपोर्ट- मुकेश सक्टा
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