Leopards in Uttarakhand forests have quadrupled their capacity, posing a threat to humans. उत्तराखंड के जंगल पड़ने लगे छोटे, क्षमता से 4 गुना हुए गुलदार; इंसानों के लिए बन रहे खतरा, Uttarakhand Hindi News - Hindustan
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उत्तराखंड के जंगल पड़ने लगे छोटे, क्षमता से 4 गुना हुए गुलदार; इंसानों के लिए बन रहे खतरा

एक शोध में खुलासा हुआ है कि जिन जंगलों में केवल 500 गुलदारों के रहने की जगह है, वहां अब 2,275 गुलदार हैं। जगह की इस कमी ने न केवल इंसानों के लिए खतरा पैदा किया है, बल्कि वन्यजीवों के बीच आपसी संघर्ष को भी चरम पर पहुंचा दिया है।

Sat, 28 March 2026 07:52 AMRatan Gupta लाइव हिन्दुस्तान, हरिद्वार, सागर जोशी
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उत्तराखंड के जंगल पड़ने लगे छोटे, क्षमता से 4 गुना हुए गुलदार; इंसानों के लिए बन रहे खतरा

उत्तराखंड के पहाड़ इन दिनों एक खौफनाक स्थिति के मुहाने पर हैं। प्रदेश के जंगल गुलदारों के लिए छोटे पड़ने लगे हैं। एक शोध में खुलासा हुआ है कि जिन जंगलों में केवल 500 गुलदारों के रहने की जगह है, वहां अब 2,275 गुलदार हैं। जगह की इस कमी ने न केवल इंसानों के लिए खतरा पैदा किया है, बल्कि वन्यजीवों के बीच आपसी संघर्ष को भी चरम पर पहुंचा दिया है।

बेघर गुलदार पहुंच रहे इंसानी बस्ती

गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय के विशेषज्ञों द्वारा किए गए एक ताजा शोध के अनुसार, एक वयस्क गुलदार को अपने अस्तित्व और शिकार के लिए 30 से 50 वर्ग किलोमीटर दायरे की आवश्यकता होती है। उत्तराखंड का कुल वन क्षेत्र 24,686 वर्ग किमी है। इस गणित के हिसाब से राज्य के जंगल केवल 500 गुलदारों का भार सह सकते हैं। इसका सीधा अर्थ यह है कि 1,775 गुलदार ऐसे हैं जिनके पास अपना कोई निश्चित इलाका नहीं है। यही ‘बेघर’ गुलदार अब भोजन की तलाश में रिहायशी इलाकों और खेतों की ओर रुख कर रहे हैं।

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खाली गांव और खेत बंजर, लैंटाना बढ़ रही

शोध में सामने आया कि प्रदेशभर के 3940 गांव पूरी तरह खाली हो चुके हैं। खेत बंजर होकर जंगल में बदल रहे हैं। लैंटाना तेजी से फैल रही है। यह जानवरों के छिपने के लिए आदर्श स्थिति है। ऐसे में मानव-वन्यजीव संघर्ष में लगातार बढ़ोतरी हो रही है।

हर वर्ष हमले में तीन मौत

● टिहरी में किए गए सर्वे के अनुसार, पिछले 10 साल में गुलदार के हमले में हर साल औसतन तीन लोगों की मौत हुई और सात लोग घायल हुए। 2021, 2022 में गुलदारों ने 172 पालतू पशुओं को भी मार डाला।

● पौड़ी गढ़वाल में वर्ष 2025 में 15 से अधिक लोग गुलदार के हमले में मारे गए, जबकि पिछले पांच वर्षों में 27 लोग अपनी जान गंवा चुके हैं।

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