गौरीकुंड से केदारनाथ के लिए निकली बाबा केदार की डोली, 22 अप्रैल को इस शुभ मुहूर्त पर खुलेंगे कपाट
केदारनाथ भगवान की डोली गौरीकुंड से निकल चुकी है। 22 अप्रैल को शुभ मुहूर्त पर कपाट खोले जाएंगे। वर्तमान में उत्तराखंड के चारों धामों में सबसे अधिक यात्री केदारनाथ पहुंचते हैं।

भगवान केदारनाथ की पंचमुखी चल विग्रह डोली बड़ी संख्या में भक्तों के जयकारों के बीच गौरीकुंड पहुंच चुकी है। यहां पहले से ही मौजूद स्थानीय लोगों द्वारा बाबा की डोली का पुष्प वर्षा के साथ स्वागत किया गया। डोली आज सुबह गौरीकुंड से केदारनाथ धाम के लिए प्रस्थान कर चुकी है। 22 अप्रैल को सुबह आठ बजे विधि-विधान से बाबा केदारनाथ के कपाट खोले जाएंगे।
इससे पहले सोमवार को बाबा केदार की डोली ने फाटा से सुबह गौरीकुंड के लिए प्रस्थान किया। इस दौरान डोली के साथ करीब 300 भक्त मौजूद थे। बम-बम भोले और जय बाबा केदार के जयघोष के साथ डोली विभिन्न स्थानों से होते हुए साढ़े 3 बजे गौरीकुंड पहुंची। इस दौरान बड़ी संख्या में स्थानीय भक्तों ने डोली का पुष्प वर्षा के साथ स्वागत किया। इससे पहले डोली के स्वागत में बड़ी संख्या में गुप्तकाशी से लेकर फाटा, रामपुर, मैखंडा, सीतापुर, सोनप्रयाग और गौरीकुंड में सड़क के दोनों किनारे स्कूली बच्चे, महिला एवं बड़ी संख्या में भक्त बाबा केदार के स्वागत में हाथ में फूलों की माला और पुष्प लेकर खड़े थे। डोली के गौरीकुंड पहुंचने पर भव्य स्वागत किया गया। मंगलवार को डोली केदारनाथ धाम पहुंचेगी जहां 22 अप्रैल को सुबह 8 बजे बाबा केदार के कपाट तीर्थयात्रियों के दर्शनार्थ खोल दिए जाएंगे।
अप्रैल में कब-कब खुले बाबा केदार के कपाट
18 अप्रैल 1974, 28 अप्रैल 1977, 30 अप्रैल 1980, 29 अप्रैल 1982, 29 अप्रैल 1985, 24 अप्रैल 1986, 27 अप्रैल 1992, 24 अप्रैल 1996, 21 अप्रैल 1999, 28 अप्रैल 2001, 25 अप्रैल 2004, 30 अप्रैल 2007, 30 अप्रैल 2009, 28 अप्रैल 2012, 24 अप्रैल 2015, 29 अप्रैल 2018, 25 अप्रैल 2023
अप्रैल में धाम के कपाट खुलने से बढ़ जाती हैं चुनौतियां
अप्रैल का महीना भले ही शहरी इलाकों में गर्मी का अहसास कराने लगता है किंतु हिमालय क्षेत्र में व्यवस्थाएं जुटाने के लिए अप्रैल का महीना मुश्किलें पैदा करने वाला रहा है। खासकर यदि केदारनाथ धाम में कपाट खुलने का दिन देखा जाए तो वर्ष 1974 में ऐसा मौका आया जब बाबा केदार के कपाट 18 अप्रैल को खुले थे, तब चारों ओर बर्फ ही बर्फ थी और एक संकरे रास्ते से यात्रियों ने किसी तरह धाम में प्रवेश किया था।
इस साल 22 अप्रैल को केदारनाथ धाम के कपाट खुलेंगे। अप्रैल माह हमेशा से यात्रा तैयारियों के लिए चुनौतीभरा रहा है। पहले केदारनाथ धाम के लिए न तो व्यवस्थाएं थी और न ही ऐसे कोई संसाधन जिससे त्वरित जानकारी मिल सके। लिहाजा गौरीकुंड पहुंचने के बाद सीधे केदारनाथ जाकर ही सभी जानकारियां मिल पाती थी। हालांकि उस दौर में यात्रा काफी कठिन थी। अब, संसाधन भी बढ़ गए हैं और यात्री संख्या में भी रिकार्ड पहुंच रही है। कपाट खुलने के पहले ही दिन 20 हजार से अधिक यात्री धाम पहुंचते हैं। बुजुर्ग बताते हैं कि 70 के दशक में तो व्यवस्थाएं कुछ भी नहीं थी।
चारधामों में सबसे अधिक केदारनाथ पहुंचते हैं यात्री
थैला पकड़कर यात्रा पर चले यात्री के बारे में सकुशल घर पहुंचने पर ही पता चल पाता था अन्यथा सम्पर्क के कोई इंतजाम नहीं थे। बावजूद यात्री बेहतर दर्शन कर लौटते थे। वर्तमान में उत्तराखंड के चारों धामों में सबसे अधिक यात्री केदारनाथ पहुंच रहा है। केदारनाथ धाम में अप्रैल के महीने में कपाट खुलने से कई बार बर्फबारी और यहां मौजूद बर्फ से परेशानी भी हुई है। इस बार की ही बात करें तो कुछ ही दिन पहले धाम में जमकर बर्फबारी हुई थी।
जिससे तैयारियां करने में प्रशासन को खासी दिक्कतें हुई। शुक्र रहा कि मौसम ने साथ दिया और बीते तीन दिनों से अच्छी धूप खिली और धाम में बर्फ भी तेजी से पिघल रही है। वर्ष 1974 में ऐसा संयोग पड़ा कि 18 अप्रैल को बाबा केदार के कपाट खुलने का दिन घोषित हुआ था। यह तिथि अब तक के कपाट खुलने के इतिहास का शायद रिकार्ड होगी।
पैदल रास्ते से हटाई बर्फ
अप्रैल माह में धाम में इस बार काफी बर्फ रही जिससे यात्रा तैयारियां करने में दिक्कतें हुई। हालांकि युद्धस्तर पर कार्य करते हुए पैदल मार्ग की बर्फ को समय पर साफ कर रास्ता तैयार किया गया। केदारनाथ धाम में भी काफी हद तक बर्फ साफ कर दी गई है। मौसम भी साथ देने लगा है जिससे बर्फ स्वत: ही पिघल रही है।
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