Chardham Yatra 2026 start from yamunotri dham significance and importance know all detils in hindi Chardham Yatra 2026: चारधाम यात्रा में सबसे पहले कौन सा मंदिर आता है, किनके दर्शन से होती है इस तीर्थ की शुरुआत, एस्ट्रोलॉजी न्यूज़ - Hindustan
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Chardham Yatra 2026: चारधाम यात्रा में सबसे पहले कौन सा मंदिर आता है, किनके दर्शन से होती है इस तीर्थ की शुरुआत

Chardham Yatra 2026: हिंदू धर्म की सबसे पवित्र तीर्थ यात्राओं में से एक चारधाम यात्रा की शुरुआत हो गई है। परंपरा के अनुसार, चारधाम यात्रा हमेशा यमुनोत्री धाम के दर्शन से ही आरंभ होती है। आइए जानते हैं यमुनोत्री धाम का महत्व और चारधाम यात्रा से जुड़ी कुछ अन्य महत्वपू्र्ण जानकारियां।

Tue, 21 April 2026 12:48 PMNavaneet Rathaur लाइव हिन्दुस्तान
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Chardham Yatra 2026: चारधाम यात्रा में सबसे पहले कौन सा मंदिर आता है, किनके दर्शन से होती है इस तीर्थ की शुरुआत

Chardham Yatra 2026: चारधाम यात्रा हिंदू धर्म की सबसे पवित्र तीर्थ यात्राओं में से एक है। हिमालय की गोद में बसे चार पवित्र धामों यमुनोत्री, गंगोत्री, केदारनाथ और बद्रीनाथ की यात्रा को चारधाम यात्रा कहा जाता है। साल 2026 में यह यात्रा 19 अप्रैल को अक्षय तृतीया के पावन अवसर पर शुरू हो गई है। परंपरा के अनुसार, चारधाम यात्रा हमेशा यमुनोत्री धाम के दर्शन से ही आरंभ होती है। यमुनोत्री सबसे पहले आने वाला मंदिर है और इसी के दर्शन से पूरे तीर्थ का आध्यात्मिक सफर शुरू माना जाता है।

यमुनोत्री धाम: चारधाम यात्रा का पावन द्वार

यमुनोत्री धाम उत्तरकाशी जिले में 3,291 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। यह देवी यमुना का मुख्य मंदिर है, जहां से पवित्र यमुना नदी का उद्गम होता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, यमुना यमराज की बहन हैं। जो भक्त यहां स्नान करते हैं और यमुना माता के दर्शन करते हैं, उन्हें पापों से मुक्ति और मोक्ष की प्राप्ति होती है। चारधाम यात्रा शुरू करने वाले भक्त पहले यमुनोत्री पहुंचकर देवी यमुना की पूजा-अर्चना करते हैं, जिससे यात्रा शुभ और निर्विघ्न होती है।

यमुनोत्री धाम का धार्मिक महत्व

यमुनोत्री ना सिर्फ चारधाम यात्रा का प्रथम धाम है, बल्कि यह पाप नाश और पुण्य प्राप्ति का प्रतीक भी है। यहां यमुना नदी के उद्गम स्थल पर स्नान करने से मनोकामनाएं पूरी होती हैं और जीवन में शांति मिलती है। मंदिर में यमुना माता की मूर्ति के साथ ही उबलते गर्म पानी के दिव्य कुंड भी हैं, जहां भक्त चावल और आलू पकाकर प्रसाद बनाते हैं। यमुनोत्री की यात्रा कठिन है, लेकिन यह भक्तों को धैर्य, समर्पण और आस्था का सबक सिखाती है। यही कारण है कि चारधाम यात्रा की शुरुआत यमुनोत्री से होती है, ताकि यात्रा की नींव पवित्रता और शुद्धता पर रखी जा सके।

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केदारनाथ धाम के कपाट खुलने की तिथि

यमुनोत्री और गंगोत्री के बाद यात्रा का अगला पड़ाव केदारनाथ है। 2026 में केदारनाथ धाम के कपाट 22 अप्रैल को सुबह 8 बजे श्रद्धालुओं के लिए खोला जाएगा। हिमालय की ऊंचाइयों में स्थित केदारनाथ धाम में भगवान शिव का ज्योतिर्लिंग है। कपाट खुलने के साथ ही हजारों भक्त केदारनाथ धाम पहुंचेंगे। केदारनाथ यात्रा में 16 किलोमीटर की पैदल चढ़ाई शामिल होती है, जो भक्तों को आंतरिक शक्ति प्रदान करती है।

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बद्रीनाथ धाम: यात्रा का अंतिम और पूर्ण धाम

चारधाम यात्रा का समापन बद्रीनाथ धाम से होता है। 2026 में बद्रीनाथ धाम के कपाट 23 अप्रैल को सुबह 6:15 बजे खोला जाएगा। यह भगवान विष्णु का प्रमुख धाम है, जहां भगवान बद्रीनारायण विराजमान हैं। बद्रीनाथ की यात्रा पूरी करने के बाद भक्तों को चारधाम यात्रा का पूर्ण फल प्राप्त होता है। यहां की ठंडी जलवायु और दिव्य वातावरण भक्तों के मन को शांत कर देते हैं।

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चारधाम यात्रा 2026: आस्था का अनुपम सफर

इस साल चारधाम यात्रा अक्षय तृतीया से शुरू होकर श्रद्धालुओं को आकर्षित कर रही है। यमुनोत्री से शुरू होकर बद्रीनाथ तक की यह यात्रा ना सिर्फ शारीरिक, बल्कि आध्यात्मिक ऊर्जा भी प्रदान करती है। भक्तों को सलाह है कि यात्रा से पहले स्वास्थ्य जांच कराएं, मौसम का ध्यान रखें और पंजीकरण जरूर कराएं। चारधाम यात्रा सिर्फ एक तीर्थ नहीं, बल्कि जीवन बदल देने वाला अनुभव है।

डिस्क्लेमर: इस आलेख में दी गई जानकारियों के पूर्णतया सत्य एवं सटीक होने का हम दावा नहीं करते हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।

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