International border New Rules compliance including foreign registration enforcement इंटरनेशनल बॉर्डर से सटे इलाकों में सरकार ने कड़े किए नियम, फॉरेन रजिस्ट्रेशन समेत 4 पॉइंट, Uttarakhand Hindi News - Hindustan
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इंटरनेशनल बॉर्डर से सटे इलाकों में सरकार ने कड़े किए नियम, फॉरेन रजिस्ट्रेशन समेत 4 पॉइंट

International border Rules: उत्तराखंड में सरकार ने इंटरनेशनल बॉर्डर से सटे इनर लाइन इलाकों में सख्ती बढ़ा दी है। नेपाली पोर्टरों का विदेशी नागरिक के रूप में रजिस्ट्रेशन करना होगा। इस तरह 4 बिंदु अनिवार्य हैं।

Wed, 27 May 2026 07:20 AMGaurav Kala लाइव हिन्दुस्तान, देहरादून
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इंटरनेशनल बॉर्डर से सटे इलाकों में सरकार ने कड़े किए नियम, फॉरेन रजिस्ट्रेशन समेत 4 पॉइंट

International border Rules: उत्तराखंड में भाजपा सरकार ने अंतरराष्ट्रीय सीमा से सटे इनर लाइन परमिट इलाकों में सतर्कता और सख्ती बढ़ा दी है। अब इन इलाकों में कार्यरत नेपाली श्रमिक और पोर्टर का पंजीकरण विदेशी नागरिक के रूप में अनिवार्य रूप से कराना होगा। हालांकि, पहले भी यह व्यवस्था लागू थी, लेकिन इसका पालन सख्ती के साथ नहीं हो पा रहा था। अब फॉरेन रजिस्ट्रेशन रीजनल ऑफिस के दिशा-निर्देशों के बाद इस व्यवस्था को प्रभावी रूप से लागू किया जा रहा है।

प्रदेश में अब तक निभाई जा रही थी औपचारिकता

अभी तक ट्रैकिंग कारोबार से जुड़ी कंपनियों की ओर से नेपाली मजदूरों के साथ कर्मचारियों का विवरण सामान्य रूप से दर्ज किया जाता था। लेकिन, अब उनके पूरे दस्तावेज, पहचान और रिहायश से जुड़ी जानकारी के साथ ही ऑनलाइन विस्तृत पंजीकरण अनिवार्य कर दिया गया है। हालांकि, ट्रैकिंग एजेंसियों को इस पर आपत्ति है। इस मामले में गढ़वाल हिमालय ट्रैकिंग एंड माउंटेनियरिंग संगठन का कहना है कि इस तरह की सख्ती से मौजूदा पीक सीजन की ट्रैकिंग के साथ पर्वतारोहण की गतिविधियां प्रभावित हो सकती हैं।

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वर्किंग वीजा नहीं होने पर चिंता

एडवेंचर स्पोर्ट्स से जुड़े विशेषज्ञ और राफ्टिंग गाइड स्क्रीनिंग कमेटी के सदस्य मंजूल रावत के अनुसार, नेपाली लोगों के लिए वर्किंग वीजा का कोई प्रावधान नहीं है। ऐसे में पंजीकरण की प्रक्रिया में बदलाव से ट्रैकिंग एजेंसियों के साथ ही स्थानीय कारोबारियों में चिंता बढ़ गई है। उनका कहना है कि इससे पर्यटन और ट्रैकिंग कारोबार प्रभावित हो सकता है।

सुरक्षा प्राथमिकता, रियायत भी मिलेगी

उत्तरकाशी के जिलाधिकारी प्रशांत आर्य ने मंगलवार को बताया कि पंजीकरण पहले से ही अनिवार्य व्यवस्था है। इसे सुरक्षा और व्यवस्थित संचालन के लिए सख्ती से लागू किया जा रहा है। उन्होंने आगे कहा कि प्रदेश में बॉर्डर क्षेत्र होने की वजह से यह प्रक्रिया सामरिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण हो जाती है।

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नेपाली मूल के लोगों पर कोई प्रतिबंध नहीं

दूसरी तरफ, उत्तरकाशी जिले के जिलाधिकारी प्रशांत आर्य ने स्पष्ट किया कि नेपाली मूल के लोगों पर किसी भी प्रकार का प्रतिबंध नहीं है। उन्होंने बताया कि उत्तराखंड में इस ट्रैकिंग सीजन को देखते हुए अब ऑफलाइन पंजीकरण की भी छूट दी जा रही है, ताकि किसी को अनावश्यक परेशानी न हो।

बुकिंग कराने वाले परेशानी में पड़ेंगे!

गढ़वाल हिमालय ट्रैकिंग एंड माउंटेनियरिंग संगठन ने कहा, कालिंदी पास जैसे प्रमुख रूट पर बुकिंग कराने वाले समूहों को अब दिक्कतें आ सकती हैं, क्योंकि बड़ी संख्या में नेपाली नागरिक वर्षों से उत्तरकाशी के ट्रैकिंग रूट्स पर पोर्टर के रूप में काम कर रहे हैं।

आदि कैलास यात्रा के लिए मिली है राहत

पिथौरागढ़। आदि कैलास यात्रा के लिए इनरलाइन परमिट को लेकर श्रद्धालुओं को हाल ही में बड़ी राहत दी गई है। अब तक इसके लिए धारचूला एसडीएम कार्यालय पर निर्भर रहना पड़ता था, अब पिथौरागढ़ स्थित बीडी पांडे जिला अस्पताल से भी यह परमिट जारी हो सकेंगे। जिलाधिकारी आशीष भटगांई के निर्देश के बाद जिला अस्पताल से यह सुविधा शुरू हो चुकी है।

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‘प्रक्रिया जटिल हुई तो नेपाल लौटेंगे पोर्टर’

एडवेंचर स्पोर्ट्स से जुड़े विशेषज्ञ और राफ्टिंग गाइड स्क्रीनिंग कमेटी के सदस्य मंजूल रावत के अनुसार, नेपाली पोर्टर अत्यंत अनुभवी होते हैं, जो ऊंचाई वाले दुर्गम क्षेत्रों में काम करने में दक्ष हैं। यदि प्रक्रियाएं कठिन की गईं तो वे नेपाल लौट सकते हैं, जिससे स्थानीय स्तर पर अनुभवी स्टाफ की कमी संभव है।

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