उत्तराखंड में हाई कोर्ट के बाद सुशील तिवारी अस्पताल को उड़ाने की धमकी, हड़कंप
उत्तराखंड में कुछ दिनों से ई-मेल के जरिए महत्वपूर्ण संस्थानों को बम से उड़ाने धमकी दी जा रही है। हाई कोर्ट समेत 12 अदालतों को बम से उड़ाने की धमकी पहले मिल चुकी है। अब कुमाऊं के सबसे बड़े सुशील तिवारी अस्पताल को उड़ाने की धमकी मिलने से हड़कंप है।

उत्तराखंड में महत्वपूर्ण संस्थानों को धमकी देने का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। नैनीताल हाईकोर्ट और प्रदेश की 12 जिला अदालतों को बम से उड़ाने की धमकी मिलने के बाद अब हल्द्वानी स्थित कुमाऊं के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल सुशीला तिवारी अस्पताल को भी दहलाने की चेतावनी दी गई है।
यह धमकी भरा ई-मेल मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य की आधिकारिक मेल आईडी पर भेजा गया, जिसमें परिसर में विस्फोटक होने का दावा किया गया है। इस सूचना के बाद अस्पताल प्रशासन और पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया और आनन-फानन में पुलिस बल के साथ बम निरोधक दस्ता और डॉग स्क्वॉड मौके पर पहुंच गया।
कक्षाओं का संचालन रोका, परिसर खाली कराया
धमकी मिलने के बाद सुरक्षा के लिहाज से मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने तत्काल प्रभाव से कक्षाओं का संचालन रोक दिया है और छात्रों को परिसर से दूर रहने की सलाह दी गई है। पुलिस और सुरक्षा एजेंसियां पूरे अस्पताल परिसर की सघन तलाशी ले रही हैं, हालांकि अब तक कोई भी संदिग्ध वस्तु बरामद नहीं हुई है।
गौरतलब है कि पिछले कुछ दिनों से उत्तराखंड के कई संवेदनशील संस्थानों को इसी तरह के ई-मेल मिल रहे हैं, जिससे पूरे प्रदेश में सुरक्षा एजेंसियां हाई अलर्ट पर हैं। साइबर सेल अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इन तमाम धमकियों के पीछे एक ही गिरोह का हाथ है या यह किसी की सोची-समझी शरारत है।
धमकी मिलने के बाद सभी अदालतों की सुरक्षा अभेद्य
उत्तराखंड में हाई कोर्ट समेत सभी अदालतों की सुरक्षा अभेद्य होगी। बिना पहचान पत्र के कोई भी प्रवेश नहीं कर पाएगा। पिछले कुछ दिनों से बम विस्फोटक को लेकर मिल रही धमकी के मद्देनजर पुलिस मुख्यालय के निर्देश पर यह कदम उठाया गया हैं। पुलिस मुख्यालय की ओर से प्रदेश के सभी जनपदों में न्यायालय परिसरों का व्यापक सुरक्षा ऑडिट कराकर कमियों के त्वरित निराकरण के निर्देश दिए गए थे।
पर्याप्त पुलिस और पीएसी बल की तैनाती
इसी के तहत निर्णय लिया गया है कि सभी न्यायालय परिसरों में पर्याप्त संख्या में पुलिस एवं पीएसी बल की तैनाती की जाएगी। न्यायालय परिसरों खासकर उच्च न्यायालय में प्रवेश पहचान पत्र या हाईकोर्ट बार की संस्तुति पर दिया जा सकेगा। इसके साथ ही बैरियर लगाकर एक्सेस कंट्रोल व्यवस्था तथा आगंतुकों की प्रभावी स्क्रीनिंग की जाएगी।
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