हर परिवार को मिलेगी देवभूमि आईडी, जुए पर भी कड़ा शिकंजा; धामी सरकार का बड़ा कदम
उत्तराखंड में नए कानून के तहत पारिवारिक सूचनाओं की चोरी, डाटा सेंटर में घुसपैठ या तंत्र को क्षति पहुंचाने पर न्यूनतम 50 लाख रुपए के जुर्माने के साथ 10 साल तक की जेल का प्रावधान किया गया है।

धामी सरकार के दो विधेयक अब कानून के रूप में लागू हो गए हैं। सार्वजनिक द्यूत रोकथाम कानून के तहत जुआ खेलने और खिलाने वालों के खिलाफ सख्त दंडात्मक प्रावधान किए गए हैं। वहीं, देवभूमि परिवार कानून के तहत हर पात्र परिवार को विशिष्ट पहचान संख्या (देवभूमि आईडी) दी जाएगी।
विधायी विभाग से अधिसूचना जारी
इसी साल मार्च में गैरसैंण में हुए विधानसभा सत्र में पारित इन विधेयकों को राज्यपाल गुरमीत सिंह की मंजूरी के बाद विधायी विभाग ने अधिसूचना जारी कर दी है। उत्तराखंड में नए कानून के तहत पारिवारिक सूचनाओं की चोरी, डाटा सेंटर में घुसपैठ या तंत्र को क्षति पहुंचाने पर न्यूनतम 50 लाख रुपए के जुर्माने के साथ 10 साल तक की जेल का प्रावधान किया गया है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के अनुसार, उत्तराखंड में कुरीतियों पर अंकुश लगाने के साथ राज्यवासियों के अधिकार सुरक्षित रखने के लिए सरकार प्रभावी कदम उठा रही है। यह कानून भी उसी दिशा में अहम पहल है। राज्यहित से जुड़े हर विषय पर सरकार निरंतर काम करती रहेगी।
द्यूत रोकथाम कानून
● बिना वारंट गिरफ्तारी: सरकार ने वर्ष 1867 के इस कानून में संशोधन किए हैं। पहले जुआ खेलने पर एक से तीन माह जेल, 50 से 200 रुपये तक जुर्माना था। अब छापेमारी और दोषी को बिना वारंट गिरफ्तार करने का अधिकार भी दे दिया गया है।
● जुर्माना और जेल: सार्वजनिक स्थान पर जुआ खेलने पर तीन माह तक की जेल और पांच हजार रुपये तक जुर्माना लगाया जाएगा। किसी घर में जुआ खेलने पर दो साल तक की जेल और 10 हजार रुपये तक जुर्माने का प्रावधान है। घर से जुआघर संचालित करने वालों को एक लाख रुपये तक जुर्माना और पांच वर्ष तक की जेल की सजा भी भुगतनी होगी।
● सिंडीकेट चलाने पर सख्ती: पकड़े जाने पर झूठी पहचान बताने वालों को तीन वर्ष तक की जेल या 10 हजार रुपए तक का जुर्माना देना होगा। वहीं, गिरोहबंद तरीके से यानी सिंडीकेट बनाकर जुए का संचालन करने वालों के लिए तीन से पांच वर्ष तक की जेल और दो लाख से लेकर 10 लाख रुपये तक जुर्माने का प्रावधान किया गया है।
● समयावधि: पंद्रह साल या उससे अधिक समय से यहां निवास कर रहे परिवार इस दायरे में आएंगे। प्रत्येक परिवार को देवभूमि आईडी मिलेगी।
● महिला मुखिया: पर भीरिवार की मुखिया महिला होगी। 18 वर्ष आयु पूरी कर चुकी सबसे ज्येष्ठ महिला को मुखिया के रूप में दर्ज किया जाएगा। परिवार में वयस्क महिला नहीं है तो पुरुष को मुखिया माना जाएगा। हालांकि, किसी महिला के 18 की आयु पूरी करते ही उसे मुखिया का दर्जा दिया जाएगा।
● विशेष प्राधिकरण: इस योजना के संचालन के लिए जल्द ही विशेष प्राधिकरण बनेगा। मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में 10 सदस्यीय शासी निकाय के अधीन संचालन होगा।
● डाटा चोरी पर जुर्माना और जेल: पारिवारिक सूचना एवं डिजिटल डाटा की सुरक्षा के लिए भी कड़े प्रावधान किए गए हैं। डाटा चोरी, डाटा सेंटर या फिर सिस्टम में अनाधिकृत रूप से प्रवेश, साइबर घुसपैठ या वायरस डालकर सिस्टम को क्षति पहुंचाने पर दोषी व्यक्ति पर न्यूनतम पचास लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जाएगा। इसके साथ ही, 10 साल तक की जेल की सजा भी हो सकेगी।
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