आंगनबाड़ी कर्मचारियों का मानदेय बढ़ाएंगे; उत्तराखंड सीएम पुष्कर धामी का बड़ा ऐलान
उत्तराखंड विधानसभा के विशेष सत्र के दौरान सीएम पुष्कर सिंह धामी ने बड़ा ऐलान किया। उन्होंने घोषणा की कि आंगनबाड़ी कर्मचारियों का मानदेय बढ़ाया जाएगा।

उत्तराखंड की आंगनबाड़ी कर्मचारियों का मानदेय बढ़ाया जाएगा। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मंगलवार को विधानसभा के विशेष सत्र के दौरान प्रदेश की 36 हजार से ज्यादा आंगनबाड़ी कर्मचारियों का मानदेय जल्द बढ़ाने की घोषणा की। आंगनबाड़ी कर्मचारियों का मानदेय आखिरी बार मई 2021 में बढ़ा था।
सत्र के दौरान विपक्ष ने आंगनबाड़ी कर्मचारियों का मानदेय न बढ़ाने और शोषण करने का आरोप लगाया। इसके जवाब में मुख्यमंत्री ने कहा कि आंगनबाड़ियों में कार्यरत बहनों का मानदेय हमने ही बढ़ाया है और आगे भी बढ़ाया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार महिलाओं के प्रति संवेदनशील है। महिलाओं को हर मोर्चे पर आगे बढ़ाने का काम किया जा रहा है। सरकार की नीतियों के कारण महिलाएं हर मोर्चे पर नए कीर्तिमान स्थापित कर रही हैं।
आंगनबाड़ी कर्मचारियों के शोषण का आरोप
सत्र में बसपा विधायक शहजाद ने सवाल उठाया था कि एक ओर भाजपा महिला अधिकारों की बात करती है, दूसरी ओर 14 मार्च को आंगनबाड़ी कर्मचारियों पर लाठीचार्ज किया गया। आंगनबाड़ी कर्मचारियों को कुछ भी नहीं दिया गया। मुख्यमंत्री ने विपक्ष के आरोपों को खारिज किया। उन्होंने कहा कि आंगनबाड़ी कर्मियों के हितों के प्रति सरकार गंभीर है। कुछ वर्ष पहले भी सरकार ने उनका मानदेय बढ़ाया था। आगे भी इस पर विचार किया जा रहा है।
मई 2021 में बढ़ाया गया था कर्मचारियों का मानदेय
राज्य में 20 हजार 70 पदों के सापेक्षा 19 हजार 533 आंगनबाड़ी कर्मी कार्यरत हैं। वहीं, 17 हजार 411 सहायिका तैनात हैं, जबकि इनके कुल पद 20 हजार 70 हैं। आंगनबाड़ी कर्मचारियों को प्रति माह 9300 और सहायिका को 5200 रुपये मानदेय मिलता है। पिछली बार सरकार ने दो नवंबर 2021 को कर्मचारियों का मानदेय 1800 और सहायिका का मानदेय 1500 रुपये बढ़ाया गया था।
महिला आरक्षण पर सदन से सड़क तक संग्राम
महिला आरक्षण के मुद्दे पर मंगलवार को सियासत फिर गरमा गई। दून की सड़कों पर जहां एक तरफ कांग्रेस ने सरकार पर वादाखिलाफी का आरोप लगाते हुए आक्रोश मार्च निकाला, वहीं दूसरी ओर भाजपा ने मशाल यात्रा के जरिए महिलाओं के अधिकारों के समर्थन में शक्ति प्रदर्शन किया। कांग्रेस ने कहा कि महिलाओं को उनका संवैधानिक अधिकार देने में देरी लोकतंत्र के मूल्यों के खिलाफ है, जबकि भाजपा ने इसे महिला सशक्तीकरण के समर्थन में जनआंदोलन बताते हुए अपना पक्ष मजबूती से रखा।
सीएम पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि कांग्रेस समेत पूरे विपक्ष का आचरण देश के सामने आ चुका है। कांग्रेस और उसके सहयोगी परिवारवादी दलों ने इस ऐतिहासिक पहल को अपने राजनीतिक स्वार्थ के कारण संसद में पारित होने से रोका है। वहीं, नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने कहा कि सरकार को 2027 के विधानसभा, 2029 के लोकसभा चुनाव में मौजूदा सीटों पर 33 प्रतिशत महिला आरक्षण लागू करना चाहिए। लेकिन, सरकार की ऐसी कोई मंशा नहीं दिखती। भाजपा केवल दुष्प्रचार कर रही है।
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