चारधाम के साथ चुनावी शंखनाद, 27 अप्रैल से मिशन पर कांग्रेस; हाईकमान की भी नजरें
चारधाम यात्रा के साथ चुनावी शंखनाद भी शुरू हो गया है। कांग्रेस आगामी 27 अप्रैल से चारधाम यात्रा पर निकलेगी। बदरी-केदारनाथ के दर्शनों के साथ कार्यकर्ताओं संग बैठक होगी।

उत्तराखंड में चारधाम यात्रा के साथ विधानसभा चुनाव की भी तैयारी शुरू हो गई है। कांग्रेस प्रदेश प्रभारी शैलजा कुमारी कुमाऊं के सफल दौरे के बाद गढ़वाल में ‘चारधाम यात्रा’ के जरिए कार्यकर्ताओं में नई ऊर्जा भरने के साथ-साथ चुनावी शंखनाद की तैयारी में हैं। बदरीनाथ और केदारनाथ के दर्शन के साथ ही कार्यकर्ता सम्मेलन और बैठकें भी होंगी।
पार्टी सूत्रों के अनुसार, शैलजा का यह दौरा 27 अप्रैल से शुरू होगा। इसकी शुरुआत ऋषिकेश से होगी, जहां से वे दल-बल संग गढ़वाल के पहाड़ी जिलों की ओर रवाना होंगी। इस आयोजन को आध्यात्मिक आस्था के साथ ही साथ सियासी रणनीति के रूप में भी देखा जा रहा है। उनका दौरा तीन मई को टिहरी के चंबा में कार्यकर्ता सम्मेलन के साथ पूरा होगा।
कुमारी शैलजा का महीने भर में दूसरा दौरा
गौरतलब है कि एक ही महीने में यह प्रदेश प्रभारी शैलजा का दूसरा उत्तराखंड दौरा होगा। इससे पहले आठ अप्रैल को उन्होंने कुमाऊं मंडल के रुद्रपुर से चार दिवसीय दौरे की शुरुआत की थी। उस दौरान यूएसनगर, नैनीताल, हरिद्वार, मसूरी और देहरादून में हुए कार्यकर्ता सम्मेलनों में भी हिस्सा लिया था।
दिल्ली से हरी झंडी का इंतजार
प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने ‘चारधाम यात्रा’ का कार्यक्रम अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी को दिल्ली भेज दिया है। फिलहाल हरी झंडी मिलने का इंतजार है, हालांकि सूत्रों का कहना है कि यह कार्यक्रम लगभग तय है।
जमीनी स्तर पर फीडबैक भी लेंगी शैलजा
अपनी इस यात्रा के दौरान शैलजा बदरीनाथ और केदारनाथ धाम के दर्शन करेंगी। इसके समानांतर संगठनात्मक गतिविधियों का व्यापक खाका भी तैयार किया गया है। इसके तहत श्रीनगर, रुद्रप्रयाग, चमोली, कर्णप्रयाग, चंबा और नई टिहरी में कार्यकर्ता सम्मेलन करवाए जाएंगे। प्रदेश प्रभारी स्थानीय नेताओं संग छोटी-छोटी बैठकें भी करेंगी और आगामी चुनाव को लेकर जमीनी फीडबैक लेंगी।
शैलजा के दौरे के साथ हरीश रावत की सक्रियता के संकेत
पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत दो दिनी धराली दौरे के बाद शनिवार को नई दिल्ली पहुंचे, जहां उन्होंने प्रदेश प्रभारी कुमारी शैलजा से मुलाकात की। इस दौरान आपदाग्रस्त क्षेत्रों की वास्तविक स्थिति समेत विभिन्न राजनीतिक और संगठनात्मक मुद्दों पर चर्चा हुई। हरीश रावत भले ही अर्जित अवकाश पर रहे, इसके बावजूद उनकी सक्रियता बढ़ती नजर आ रही है। हाल ही में अपने आवास पर ‘खीरा-खरबूज पार्टी’ के बाद उनका अचानक दिल्ली पहुंचना सियासी हलकों में चर्चा का विषय बना हुआ है। इसको लेकर कई तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं। ऐसे में माना जा रहा है कि 27 अप्रैल से शुरू हो रहे गढ़वाल के दौरे के साथ हरीश रावत भी सक्रिय भूमिका में नजर आ सकते हैं।
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