किस प्रकार का अनाज खा रहे, स्मार्ट फोन चलाते हो? अप्रैल से शुरू जनगणना में आपसे पूछे जाएंगे ये सवाल
अप्रैल से शुरू होने जा रही जगणना में देश की आबादी की गणना तो होगी ही साथ ही लोगों के जीवन स्तर का भी आकलन होना है। पहली बार अनाज की खपत से लेकर स्मार्टफोन और इंटरनेट कनेक्टिविटी से जुड़े सवालों को भी जनगणना में शामिल किया जा रहा है।

Census Key Questions: अप्रैल से शुरू होने जा रही राष्ट्रीय जनगणना इस बार कई मायनों में अलग और विस्तृत होने जा रही है। आबादी की गणना के साथ-साथ अब लोगों के जीवन स्तर, डिजिटल पहुंच से लेकर खाने से जुड़ी जानकारी भी एकत्र की जाएगी। यानी सर्वेयर जब आपके घर पहुंचेंगे तो केवल परिवार के सदस्यों की संख्या नहीं पूछेंगे, बल्कि यह भी जानना चाहेंगे कि आप इंटरनेट का उपयोग करते हैं या नहीं, स्मार्ट फोन है या नहीं, और किस प्रकार का अनाज मुख्य रूप से खाते हैं।
उत्तराखंड में सरकार और जनगणना निदेशालय ने इस महाअभियान की तैयारियां तेज कर दी हैं। अधिकारियों के अनुसार, इस बार जनगणना फॉर्म में कुछ नए सवाल जोड़े गए हैं, जो बदलते सामाजिक-आर्थिक परिदृश्य को ध्यान में रखकर तैयार किए गए हैं। डिजिटल इंडिया और बदलती जीवनशैली के दौर में यह जानना महत्वपूर्ण माना जा रहा है कि कितने परिवार इंटरनेट से जुड़े हैं, कितनों के पास स्मार्टफोन उपलब्ध है और किस तरह की खाद्य आदतें हैं। इन सूचनाओं के आधार पर भविष्य की नीतियों और योजनाओं को अधिक प्रभावी बनाया जा सकेगा।
25 अप्रैल से 24 मई तक भवन गणना
राज्य में 25 अप्रैल से 24 मई तक भवन गणना का कार्य प्रस्तावित है। मुख्य सचिव की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में इस समयावधि पर सहमति बनी है। जल्द ही इस संबंध में औपचारिक अधिसूचना जारी की जाएगी। भवन गणना के दौरान प्रत्येक मकान, उसके उपयोग, निर्माण की स्थिति और उसमें रहने वाले परिवारों का विवरण दर्ज किया जाएगा। यह चरण आगे होने वाली जनसंख्या गणना की आधारशिला माना जाता है।
नागरिकों को स्वगणना का भी विकल्प
इसके अलावा नागरिकों को स्वगणना का विकल्प भी दिया जा रहा है। 9 अप्रैल से 24 अप्रैल के बीच लोग निर्धारित पोर्टल पर स्वयं अपनी और अपने भवन से जुड़ी जानकारी भर सकेंगे। इससे प्रक्रिया को पारदर्शी और तेज बनाने में मदद मिलेगी। हालांकि जिन लोगों द्वारा स्वगणना नहीं की जाएगी, उनके यहां निर्धारित अवधि में गणनाकर्मी पहुंचकर जानकारी एकत्र करेंगे।
अधिकारी क्या कह रहे
निदेशक जनगणना ईवा आशीष श्रीवास्तव ने बताया कि इस बार अनाज की खपत, इंटरनेट कनेक्टिविटी और स्मार्टफोन से जुड़े प्रश्न पहली बार शामिल किए गए हैं। उनका कहना है कि ये सवाल केवल आंकड़े जुटाने के लिए नहीं, बल्कि समाज के बदलते स्वरूप को समझने के लिए अहम हैं। सरकार की विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं, डिजिटल सेवाओं के विस्तार और खाद्य सुरक्षा से संबंधित नीतियों के निर्माण में ये आंकड़े महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
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