आर्मी जवान सिक्किम के बर्फीले तूफान में बलिदान, बेटे के जन्मदिन से पहले तिरंगे में लौटे
आर्मी जवान विकास कुमार सिक्किम बर्फीले तूफान में शहीद हो गए। आज उनका पार्थिव शरीर घर पिथौरागढ़ में पहुंचेगा। बेटे के पहले जन्मदिन से पहले पिता तिरंगे में लौटेगा। परिवार में कोहराम मचा है।

उत्तराखंड के पिथौरागढ़ निवासी 24 वर्षीय लांसनायक विकास कुमार, सिक्किम में बर्फीले तूफान की चपेट में आकर बलिदान हो गए। विकास के घरवालों को सेना की ओर से यह सूचना दी गई। विकास का पार्थिव शरीर गुरुवार को जिला मुख्यालय आने की संभावना है। विकास की शादी 2023 में हुई थी। उनका बेटा एक साल का भी नहीं है। बेटे के पहले जन्मदिन पर घर आने की सपने देख रहा एक पिता अब तिरंगे में लिपटकर लौटेगा।
पिथौरागढ़ जिला मुख्यालय से पांच किमी दूर स्थित गणकोट गांव निवासी विकास पुत्र गणेश राम 19 कुमाऊं रेजीमेंट में लांसनायक थे। उनके चचेरे भाई नीरज कुमार ने बताया कि विकास इन दिनों सिक्किम में ड्यूटी पर थे। 29 मार्च को वह दो साथियों के साथ सीमा क्षेत्र में गश्त पर थे। इस दौरान हुए हिमस्खलन की चपेट में आकर विकास वीरगति को प्राप्त हो गए। बताया जा रहा है कि दो दिनों तक उनका पार्थिव शरीर बर्फ में दबा रहा। शहीद का पार्थिव शरीर सैन्य सम्मान के साथ उनके पैतृक गांव लाए जाने की तैयारी की जा रही है। विकास कुमार की शहादत की सूचना से गणकोट और आसपास के क्षेत्रों में शोक की लहर दौड़ गई है।
बेटे के पहले जन्मदिन को आना था, तिरंगे में लौटेगा पिता
नियति की क्रूरता की इससे बड़ी मिसाल और क्या होगी, घर के आंगन में करीब दस महीने का मासूम अपनी तोतली आवाज में पापा कहने की कोशिश कर रहा है, उसे नहीं पता कि जिस पिता का नाम वह ले रहा है, वह अब कभी लौटकर नहीं आएंगे। बेटे के पहले जन्मदिन पर घर आने की सपने देख रहा एक पिता अब तिरंगे में लिपटकर लौटेगा।
2023 में शादी हुई थी
गणकोट निवासी लांस नायक विकास कुमार वर्ष 2017-18 में सेना में भर्ती हुए। बाद में वर्ष 2023 के दौरान प्रीति से उनका विवाह हुआ। दोनों का एक बेटा पृथ्विक है, जो अभी एक साल का भी नहीं हुआ। आगामी चार जून को पृथ्विक अपना पहला जन्मदिन मनाएगा। उसके पिता विकास भी अपने बेटे के पहले जन्मदिन का हिस्सा होना चाहते थे, इसके लिए वह जन्मदिन से कुछ दिन पहले ही घर भी आने का प्लान बना रहे थे। चचेरे भाई नीरज ने बताया कि विकास ने बेटे पृथ्विक के पहले जन्मदिन पर घर आने की बात कही थी।
अप्रैल में लौटना था घर
बताया था कि वह अप्रैल माह के आखिरी सप्ताह तक घर लौट आएगा और फिर सभी मिलकर पृथ्विक का पहले जन्मदिन की खुशियां साथ मिलकर मनाएंगे, लेकिन शायद नियति को कुछ और ही मंजूर था। अब पृथ्विक को पहला तो क्या आगे आने वाले हर एक जन्मदिन अपने पिता के बगैर ही मनाना होगा। इधर, लांस नाायक विकास की बलिदान पर पूर्व सैनिक संगठन ने शोक जताया है। बुधवार को पूर्व सैनिकों ने कहा कि विकास सर्वोच्च बलिदान देकर पूरे क्षेत्र का सिर गर्व से ऊंचा किया है।
घंटों अनजान रहे माता-पिता और पत्नी
विकास की बलिदान की सूचना सेना की ओर से मंगलवार शाम को तीन बजे मिली। लेकिन विकास के माता-पिता और पत्नी को इस बात से अंजान रखा गया। बुधवार को तीनों को विकास के सर्वोच्च बलिदान की जानकारी दी गई। विकास की मां मंजू देवी स्थानीय स्कूल में भोजन माता के रूप में कार्यरत हैं। उनका बड़ा भाई नीरज दिल्ली में होटल सेक्टर में कार्यरत हैं। भाई की बलिदान की सूचना के बाद वह घर लौट आए हैं।
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