उत्तराखंड में 16 मई तक बारिश और तेज आंधी का येलो अलर्ट; 2 दिन चारधाम यात्रियों के लिए चेतावनी
उत्तराखंड में मौसम विभाग ने आज येलो अलर्ट जारी किया है। 11 से 16 मई तक प्रदेशभर में तेज बारिश, ओले और तेज हवाओं के साथ बिजली गिरने की भी चेतावनी है। 12 और 13 मई को चारधाम यात्रियों के लिए अलर्ट है।

Uttarakhand Weather Alert: मौसम विभाग ने उत्तराखंड में 11 मई से 16 मई के बीच मौसम में बड़े बदलाव की भविष्यवाणी की है। राज्य के पर्वतीय क्षेत्रों में बारिश, गरज-चमक, तेज़ हवाओं और ऊंचाई वाले इलाकों में बर्फबारी का अनुमान है, जबकि मैदानी इलाकों में भी कुछ दिन हल्की बारिश हो सकती है। 12 और 13 मई को चारधाम यात्रा के लिए विशेष तौर पर अलर्ट जारी किया गया है। गढ़वाल आयुक्त ने श्रद्धालुओं से अतिरिक्त सतर्कता की अपील की है। पर्वतीय जिलों में कहीं-कहीं आकाशीय बिजली और 40-50 किमी/घंटा की झोंकेदार हवाएं चलेंगी।
मौसम निदेशक डॉ. सीएस तोमर ने पहाड़ी जिलों के लिए सोमवार को ‘येलो अलर्ट’ जारी किया। उन्होंने चेताया, 40 से 50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से झोंकेदार हवाएं चल सकती हैं। बिजली चमकने की भी संभावना है। बीते 24 घंटों में मैदान-पहाड़ में तापमान सामान्य से कम रहा।
चारधाम यात्रा में 12 और 13 को सावधान रहें यात्री
मौसम विभाग ने 12 और 13 मई को प्रदेश के विभिन्न हिस्सों विशेषकर पर्वतीय क्षेत्रों में वर्षा व प्रतिकूल मौसम की संभावना पर ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। इस पर गढ़वाल आयुक्त विनय शंकर पांडेय ने चारधाम यात्रा पर आने वाले श्रद्धालुओं एवं पर्यटकों से अपील की है कि वे यात्रा के दौरान मौसम की ताजा जानकारी अवश्य प्राप्त करें। सावधानी के साथ अपनी यात्रा की योजना बनाएं।
आयुक्त ने श्रद्धालुओं से आग्रह किया कि मौसम की संवेदनशीलता को देखते हुए 12 और 13 मई को यात्रा कार्यक्रम बनाते समय अतिरिक्त सतर्कता बरतें। यदि संभव हो तो मौसम सामान्य होने के बाद यात्रा करना अधिक सुविधाजनक रहेगा। यात्रा के दौरान प्रशासन और स्थानीय अधिकारियों द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करें। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार चारधाम यात्रा को सुगम, सुरक्षित और व्यवस्थित बनाने के लिए प्रतिबद्ध है।
यात्रियों के मन में अब भी जिंदा हैं रामबाड़ा की यादें
रुद्रप्रयाग। केदारनाथ यात्रा के लिए वर्ष 2013 की आपदा से पहले वाले रामबाड़ा-केदारनाथ पैदल मार्ग से कई यात्रियों की गहरी यादें जुड़ी हैं। 13 साल बाद जो यात्री केदारनाथ यात्रा पर आ रहे हैं वे गरुड़चट्टी और देवदर्शनी की एक झलक पाने को बेताब दिख रहे हैं। मध्य प्रदेश के 77 वर्षीय धानेश बताते है कि मैंने वर्ष 2010 में बाबा केदार की यात्रा की। गौरीकुंड से चलकर रामबाड़ा में रुके और फिर गरुड़चट्टी और देवदर्शनी होते हुए केदारनाथ पहुंचे। देवदर्शनी से मंदिर देखकर तो मानो केदार के दर्शन हो गए। आज काफी बदलाव हो गया है।
गरुड़चट्टी में रुकती थी बाबा केदार की डोली
पुराने पैदल मार्ग पर गरुड़चट्टी एक विशेष स्थान है। यहां पर बाबा केदार की डोली आते-जाते वक्त रुका करती थी। बड़ी संख्या में यात्रियों के लिए यहां चाय-पानी की सुविधा थी। साधु संत ठहरते रहे हैं। हालांकि गरुड़चट्टी आपदा के बाद भी सुरक्षित है और यहां अब भी लोग पहुंचते रहते हैं। इसी स्थान पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 80 के दशक में तीन महीने साधना की थी। इसलिए उनका भी इस स्थान से अगाध प्रेम है।
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