पारा गिरा, सुहाना हुआ मौसम: कल से फिर भीगेगा उत्तराखंड, बर्फबारी की भी संभावना
Uttarakhand Weather: मौसम निदेशक डॉ. सीएस तोमर के मुताबिक, रविवार को उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग, चमोली, बागेश्वर और पिथौरागढ़ जिलों में कहीं-कहीं गरज के साथ हल्की बारिश हो सकती है।

Uttarakhand Weather Update: उत्तराखंड में पहाड़ से लेकर मैदान तक ठंडी हवाओं और बादलों के वजह से पारे में गिरावट बरकरार है। प्रदेश में अधिकतम तापमान सामान्य से पांच डिग्री सेल्सियस तक नीचे दर्ज किया गया है। मौसम विभाग के अनुसार 11 मई से प्रदेशभर में एक बार फिर बारिश का दौर शुरू होने की संभावना है।
शनिवार को पर्वतीय क्षेत्रों में कहीं-कहीं घने बादल छाए रहे और हल्की बूंदाबांदी हुई, जबकि मैदानी इलाकों में धूप और बादलों की आंख-मिचौली जारी रही। मौसम निदेशक डॉ. सीएस तोमर के मुताबिक, रविवार को उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग, चमोली, बागेश्वर और पिथौरागढ़ जिलों में कहीं-कहीं गरज के साथ हल्की बारिश हो सकती है। वहीं, 4000 मीटर से अधिक ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बर्फबारी की संभावना है। मौसम विभाग का पूर्वानुमान है कि अगले दो-तीन दिनों के दौरान अधिकतम तापमान में दो से चार डिग्री सेल्सियस की बढ़ोत्तरी हो सकती है, इसके बाद फिर ठंड बढ़ेगी।
कहां कितना तापमान?
राजधानी देहरादून में अधिकतम तापमान 31.4°C दर्ज किया गया, जो सामान्य से 3 डिग्री कम है। वहीं, पंतनगर में यह 32.5°C रहा, जो सामान्य से 4 डिग्री कम है। पहाड़ी इलाकों की बात करें तो मुक्तेश्वर में तापमान गिरकर 19.3°C और नई टिहरी में 22.0°C तक पहुंच गया है, जो सामान्य से क्रमशः 4 और 5 डिग्री कम है। मौसम विभाग के अनुसार, आने वाले दिनों में बादलों की आवाजाही और हल्की बारिश की संभावना बनी रह सकती है।
मौसम के बदलते मिजाज से प्रदेश में किसान बेहाल
उत्तराखंड में जलवायु परिवर्तन का असर अब खेती और बागवानी पर दिखाई देने लगा है। बढ़ते तापमान, सूखे और बेमौसम बारिश ने पहाड़ की कृषि व्यवस्था को गहरे संकट में डाल दिया है। मौसम के बदलते पैटर्न के कारण खेती का रकबा घट रहा है। खाद्यान्न उत्पादन में लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है। पिछले पांच साल के भीतर खाद्यान्न उत्पादन में करीब 2.39 लाख मीट्रिक टन की कमी आ चुकी है।
साहिया में पचास फीसदी नगदी फसल तबाह
कुछ दिनों से सहिया क्षेत्र और आसपास के ग्रामीण इलाकों में आए तूफान और भारी ओलावृष्टि ने किसानों की कमर तोड़ दी है। क्षेत्र में हुई भारी बारिश, तेज तूफान और भीषण ओलावृष्टि के कारण खेतों में खड़ी गेहूं और जौ की तैयार फसलों को लगभग 50 फीसदी तक नुकसान पहुंचा है। Xक्षेत्र के सुरेऊ, देऊ, डांडा और देसऊ जैसे गांव, जो मुख्य रूप से गेहूं उत्पादन के लिए जाने जाते हैं, वहां फसलों को काफी नुक़सान पहुंचा है।
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