मिलिए पहाड़ की रग-रग से वाकिफ नए CDS सुब्रमणि से, उत्तराखंड से खास लगाव; जवानों के शरीर पर लगी जोंक खुद हटाते थे
उत्तराखंड के सैनिकों और पूर्व सैनिकों के हितों के लिए उन्होंने कई अहम पहल कीं। देहरादून के डोईवाला में आर्मी कैंटीन का काउंटर खुलवाने के साथ ही दून और कोटद्वार में वार विडोज़ के बच्चों के लिए स्कूल शुरू कराने में भी उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही।

देश के नए चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) रिटायर मेजर जनरल एनएस राजा सुब्रमणि का उत्तराखंड से गहरा जुड़ाव रहा है। करीब चार दशक तक गढ़वाल राइफल्स से जुड़े रहने के कारण वे न केवल पहाड़ और यहां की संस्कृति को करीब से समझते थे, बल्कि जवानों से गढ़वाली भाषा में भी बातचीत किया करते थे।
उत्तराखंड के सैनिकों और पूर्व सैनिकों के हितों के लिए उन्होंने कई अहम पहल कीं। देहरादून के डोईवाला में आर्मी कैंटीन का काउंटर खुलवाने के साथ ही दून और कोटद्वार में वार विडोज़ के बच्चों के लिए स्कूल शुरू कराने में भी उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही।
जवानों के साथ पैदल पेट्रोलिंग पर जाते थे
रुड़की निवासी रिटायर सूबेदार आरपी भट्ट ने बताया कि वर्ष 2004 से 2006 के बीच असम के नलबाड़ी और दरंगा स्थित भूटान बॉर्डर क्षेत्र में उनके साथ तैनाती के दौरान मेजर जनरल सुब्रमणि को करीब से जानने का मौका मिला। उन्होंने बताया कि सीओ होने के बावजूद वे जवानों के साथ पैदल पेट्रोलिंग पर जाते थे।
जवानों के शरीर पर लगी जोंक खुद हटाते थे
जंगलों में ऑपरेशन के दौरान जवानों के शरीर पर चिपकी जोंकों को वे खुद नमक डालकर हटाया करते थे। सूबेदार भट्ट के अनुसार, पिछले सितंबर में भी उनकी देहरादून में मेजर जनरल सुब्रमणि से मुलाकात हुई थी। उस दौरान वाइस चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ रहते हुए उन्होंने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और पूर्व सैनिकों से मुलाकात कर युवाओं की सेना भर्ती तथा पूर्व सैनिकों की समस्याओं के समाधान को लेकर चर्चा की थी। पूर्व सैनिकों का कहना है कि जब भी वे देहरादून आते थे, सैनिक परिवारों और पूर्व सैनिकों से समय निकालकर जरूर मिलते थे। सूबेदार भट्ट ने बताया की वे में सेना में भर्ती हुए तो मेजर जनरल सुब्रमणि 1985 में सेकंड लेफ्टिनेंट बनकर आठ गढ़वाल रेजिमेंट में आए। बाद में 16 गढ़वाल में गए। रिटा. मेजर जनरल एनएस राजा सुब्रमणि 30 मई को संभालेंगे सीडीएस का कार्यभार।
ऐसी रही है प्रोफाइल
जनरल सुब्रमणि ने 1 जुलाई 2024 से 31 जुलाई 2025 तक थल सेना के उप-प्रमुख रहे। 14 दिसंबर 1985 को गढ़वाल राइफल्स की आठवीं बटालियम में कमीशन दिया गया। एनएस राजा सुब्रमणि भारत के तीसरे चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) नियुक्त हुए। अपने 40 से अधिक वर्षों के सैन्य करियर में उन्होंने कई संघर्ष क्षेत्रों और भौगोलिक परिस्थितियों में सेवाएं दी हैं। विभिन्न कमांड, स्टाफ और प्रशिक्षण संबंधी पदों पर कार्य किया। उन्हें 14 दिसंबर, 1985 को गढ़वाल राइफल्स की 8वीं बटालियन में कमीशन प्रदान किया गया था। ऑपरेशन राइनो के अंतर्गत असम में आतंकवाद रोधी अभियानों के दौरान 16 गढ़वाल राइफल्स की कमान संभाली थी।
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