40 दिन, 10 लाख श्रद्धालु और '1 kg' का फॉर्मूला; केदारनाथ को कचरा मुक्त बनाने की अनूठी मुहिम
एक व्यक्ति के लिए 1 किलो कचरा वापस लाना मामूली बात हो सकती है, लेकिन जब इस काम को लाखों तीर्थयात्रियों द्वारा किया जाता है, तो यह हिमालय को एक बड़े पर्यावरणीय संकट से बचा सकता है।

उत्तराखंड में केदारनाथ धाम के दर्शन के लिए इस साल श्रद्धालुओं की अभूतपूर्व भीड़ उमड़ रही है। यात्रा शुरू होने के बाद 1 जून तक यानी महज 40 दिनों के भीतर ही केदारनाथ दर्शन के लिए रिकॉर्ड तोड़ करीब 15 लाख पंजीकरण हो चुके हैं। इतनी भारी संख्या में श्रद्धालुओं के आने से एक तरफ स्थानीय अर्थव्यवस्था में भारी उछाल आया है, वहीं दूसरी तरफ हिमालय के इस बेहद संवेदनशील पारिस्थितिकी तंत्र वाले स्थान पर एक बड़ा पर्यावरणीय खतरा भी मंडराने लगा है। लेकिन इस नाउम्मीदी के बीच एक ऐसा शख्स भी है जो पहाड़ों को कचरा मुक्त बनाने के लिए लगातार काम कर रहा है।
हम यहां पर बात कर रह हैं पहाड़ों को कचरा मुक्त बनाने के लिए 'हीलिंग हिमालयाज' नाम की संस्था बनाने वाले इसके संस्थापक प्रदीप सांगवान की। जिन्होंने हिमालय को साफ रखने के लिए सोशल मीडिया पर एक बेहद खास अभियान शुरू किया है, जो इस समय इंटरनेट पर तेजी से वायरल हो रहा है।
क्या है '1 यात्री = 1 किलोग्राम' का फॉर्मूला?
प्रदीप सांगवान ने डिजिटल रिकॉर्ड-कीपिंग के साथ ‘कैरी मी बैक’ यात्रा की शुरुआत की है। उन्होंने गणितीय रूप से बेहद सटीक और आसान फॉर्मूला पेश करते हुए सोशल मीडिया पर लिखा:
'केदारनाथ यात्रा के 40 दिन। रिकॉर्ड तोड़ते हुए 10 लाख पंजीकृत तीर्थयात्री पहुंचे। हमारा 'कैरी मी बैक' अभियान अब रफ्तार पकड़ रहा है। यदि 1 लाख यात्री भी अपने साथ 1 किलो कचरा वापस लाते हैं, तो पहाड़ों से 100 टन कचरा साफ हो जाएगा और यही हमारा लक्ष्य है।'
सांगवान ने बताया कि अगर इसे प्रति व्यक्ति के हिसाब से देखा जाए, तो यह लक्ष्य हासिल करना बेहद आसान है। हर तीर्थयात्री को अपने साथ 250 ग्राम से लेकर 5 किलोग्राम तक का प्लास्टिक का कचरा (खाली बोतलें, डिस्पोजेबल ग्लास आदि) वापस नीचे लाना चाहिए। यही इस अभियान का मकसद है।’
अपने अभियान की जानकारी देते हुए सांगवान ने कहा कि 'केदारनाथ यात्रा के 40 दिन, 10 लाख रजिस्टर्ड तीर्थयात्री पहुंचे, जिसने पिछले सभी रिकॉर्ड तोड़ दिए, हमारी 'कैरी मी बैक' यात्रा अब जोर पकड़ रही है, 1 लाख तीर्थयात्री 1kg कचरा वापस ला रहे हैं, जिसकी वजह से अबतक 100 टन कचरा हटाया जा चुका है। यही हमारा लक्ष्य है #हीलिंग हिमालयाज, यह सब डिजिटल है – इसलिए रिकॉर्ड रखे जा रहे हैं।'
मलाना के 'कचरे के पहाड़' से हुई थी शुरुआत
न्यूज 18 की रिपोर्ट के अनुसार इस अभियान की शुरुआत कई साल पहले बहुत ही मुश्किल हालात में हुई थी। उस समय हिमाचल प्रदेश के मलाना में कचरे के ढेर पर बैठे एक शख्स की तस्वीर वायरल हुई थी, जो सबको पसंद तो आई थी, लेकिन जिसने हिमालय क्षेत्र में व्यावसायिक पर्यटन के काले सच को उजागर किया था।
कुछ साल पहले प्रदीप सांगवान ने एक इंटरव्यू में कहा था, 'पहाड़ों की खूबसूरत वादियों में कचरे के ढेर देखकर मुझे बहुत दुख और गुस्सा आता था।' इसके बाद उन्होंने अपने दोस्तों और परिवार के साथ मिलकर ट्रैकिंग के दौरान कचरा वापस लाना शुरू किया। साल 2016 में उनकी यह कोशिश 'हीलिंग हिमालयाज फाउंडेशन' (HHF) के रूप में सामने आई, जिसका उद्देश्य सिर्फ सफाई करना नहीं बल्कि सामुदायिक स्तर पर लोगों की मानसिकता को बदलना है।
दरअसल प्रदीप सांगवान के प्रयासों ने एक आध्यात्मिक यात्रा को 'पर्यावरण रक्षा अभियान' में बदल दिया है। उन्होंने साबित कर दिया है कि भक्ति का रास्ता स्वच्छता से होकर ही गुजरता है। एक व्यक्ति के लिए 1 किलो कचरा वापस लाना मामूली बात हो सकती है, लेकिन जब इस काम को लाखों तीर्थयात्रियों द्वारा किया जाता है, तो यह हिमालय को एक बड़े पर्यावरणीय संकट से बचा सकता है।
सोशल मीडिया पर मिल रहा जमकर समर्थन
सांगवान के इस प्रयास को सोशल मीडिया पर जमकर सराहना मिल रही है। यूजर्स का कहना है कि 'कैरी मी बैक' का यह फॉर्मूला केवल पहाड़ों तक सीमित न रहकर देश की नदियों और जंगलों के लिए भी लागू किया जाना चाहिए। एक जागरूक तीर्थयात्री ने मंदाकिनी नदी में बहते प्लास्टिक पर चिंता जताते हुए रुद्रप्रयाग प्रशासन को टैग किया और लिखा कि इस नाजुक पारिस्थितिकी तंत्र को बचाने के लिए ऐसे अभियानों को सरकारी स्तर पर बढ़ावा मिलना चाहिए।
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