यूपी में मेडिकल स्टोर लाइसेंस के लिए बढ़ा दी गई कागजी कार्रवाई, योगी सरकार का आदेश; जानें वजह
थोक दुकानों के लाइसेंस के लिए योगी सरकार ने कागजी कार्रवाई बढ़ा दी है। लाइसेंस का आवेदन करने से दौरान आवेदक को पिछले अपने तीन साल के व्यवसाय का रिकॉर्ड देना होगा। शपथ पत्र भी देना होगा। इसके अलावा आवेदक के अनुभव की जांच भी होगी। आमतौर पर आवेदक किसी दूसरे थोक दुकान से अनुभव का प्रमाण पत्र लगाते हैं।

यूपी में नशीली दवा के धंधे पर लगाम लगाने के लिए योगी सरकार ने बड़ी पहल की है। थोक दुकानों के लाइसेंस के लिए कागजी कार्रवाई बढ़ा दी है। लाइसेंस का आवेदन करने से दौरान आवेदक को पिछले अपने तीन साल के व्यवसाय का रिकॉर्ड देना होगा। इस संदर्भ में शपथ पत्र भी देना होगा। इसके अलावा आवेदक के अनुभव की जांच भी होगी। आमतौर पर आवेदक किसी दूसरे थोक दुकान से अनुभव का प्रमाण पत्र लगाते हैं। अब अनुभव प्रमाण पत्र का वेरिफिकेशन अनिवार्य कर दिया गया है। ड्रग इंस्पेक्टर अनुभव प्रमाण पत्र जारी करने वाली फर्म पर जाकर इसकी जांच करेंगे।
खाद एवं औषधि प्रशासन की ओर से जारी नए निर्देश में अनुसार लाइसेंस के आवेदन के दौरान प्रस्तावित थोक दुकान परिसर में मौजूद भंडारण व्यवस्था रेफ्रिजरेटर, कोल्ड रूम, बिजली व्यवस्था के साथ ही साइन बोर्ड और आसपास की दुकान का भी फोटो अपलोड करना होगा। अनुभव के प्रमाण पत्र के साथ ही वेतन भुगतान, हाजिरी रजिस्टर और प्रमाण पत्र देने वाले फार्म के लाइसेंस का भी वेरीफिकेशन होगा।
सहायक आयुक्त करेंगे 10 फीसदी दुकानों की जांच
सहायक आयुक्त पूरनचंद ने बताया कि शासन ने नए फरमान में सहायक आयुक्त की भी जिम्मेदारियां को बढ़ा दिया है। सहायक औषधि आयुक्त को अब हर नए लाइसेंस के 10 फीसदी का औचक जांच करना होगा। उनकी रिपोर्ट लगेगी। यह जांच लाइसेंस जारी होने के बाद होगी। औषधि एवं प्रशासन सामग्री नियमावली 1945 के नियम 64, 65 एवं 65-ए के अंतर्गत थोक विक्रय लाइसेंस को जारी करते के दौरान कई शर्तें तय कर दी है।
फर्म की पार्टनरशिप डीड सर्टिफिकेट, इनकॉर्पोरेशन, मेमोरेंडम ऑफ एसोसिएशन, आर्टिकल ऑफ एसोसिएशन, पॉवर ऑफ अटॉर्नी, शपथ पत्र, ट्रस्ट डीड और पार्टनरशिप डीड जैसे महत्वपूर्ण अभिलेखों को अनिवार्य कर दिया है।




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