यूपी में इस काम के लिए जमीन लेने पर स्टांप शुल्क में 100 प्रतिशत तक छूट, योगी सरकार का फैसला
उत्तर प्रदेश में योगी सरकार ने प्राइवेट विश्वविद्यालय खोलने के लिए भूमि लेने पर स्टांप शुल्क में 100 प्रतिशत तक छूट देने का फैसला किया है। यह छूट भूमि की कीमत के आधार पर अलग-अलग होगी।

योगी सरकार यूपी में निजी क्षेत्रों में विश्वविद्यालय खोलने के लिए भूमि लेने पर स्टांप शुल्क में 100 प्रतिशत तक छूट देने का फैसला किया है। यह छूट भूमि की कीमत के आधार पर अलग-अलग होगी। 50 करोड़ की भूमि पर 50%, 50 करोड़ से 150 करोड़ की भूमि पर 30% और 150 करोड़ से अधिक भूमि पर 20% स्टांप शुल्क में छूट दी जाएगी। प्रमुख सचिव स्टांप अमित गुप्ता ने इस संबंध में सोमवार को अधिसूचना जारी करते हुए सभी जिलों को निर्देश भेज दिया है।
उत्तर प्रदेश उच्च शिक्षा प्रोत्साहन नीति के आधार पर विश्वविद्यालय खोलने वालों को यह छूट दी जाएगी। किसी भी योजना से लाभ पाने वाले विश्वविद्यालयों को यह छूट नहीं मिलेगी। रजिस्ट्री दस्तावेज के अनुसार वास्तविक क्रय कीमत को परियोजना के लिए भूमि की लागत माना जाएगा। भूमि उत्तर प्रदेश राज्य औद्योगिक विकास निगम (यूपीसीडा) या किसी अन्य राज्य सरकार के अभिकरण से आवंटित होने की कीमत से छूट तय होगी। आकांक्षी जिलों में बहु विषय शिक्षा और अनुसंधान विश्वविद्यालय स्थापित किए जाने पर 100 प्रतिशत तक छूट मिलेगी।
रैकिंग सूची में शीर्ष 50 में आने वालों को भी 100 प्रतिशत की छूट दी जाएगी
राज्य के किसी जिले में स्थापित प्रथम पांच विदेशी उच्च शिक्षा संस्थानों और विश्वविद्यालयों को भी 100 प्रतिशत तक स्टांप शुल्क में छूट दी जाएगी। आवेदन के समय यूजीसी द्वारा वैश्विक रैंकिंग की विषयवार श्रेणी में शीर्ष 500 के अंदर स्थान प्राप्त होना चाहिए। नई रैकिंग सूची में शीर्ष 50 में आने वालों को भी 100 प्रतिशत की छूट दी जाएगी। उच्च शिक्षा विभाग के अधिकारियों द्वारा पुष्टि के बाद छूट की सुविधा होगी। स्टांप शुल्क के बराबर धनराशि जिलाधिकारी के पक्ष में बैंक गारंटी रजिस्ट्री के समय प्रस्तुत करना होगा।
कॉलेज में छात्रों के लिए वर्कशॉप व ट्रेनिंग प्रोग्राम भी चलाए जाएंगे
इसके अलावा प्रदेश में योगी सरकार छात्रों को तनाव मुक्त शिक्षा व अवसाद से बचाने के लिए नई नीति लाने जा रही है। मानसिक स्वास्थ्य एवं कल्याण नीति के तहत छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान दिया जाएगा। विश्वविद्यालयों और डिग्री कॉलेजों में मानसिक स्वास्थ्य एवं कल्याण केंद्र खोले जाएंगे। इसके साथ ही हर विभाग में नोडल अफसर तैनात किए जाएंगे। छात्रों के लिए वर्कशॉप और ट्रेनिंग प्रोग्राम भी चलाए जाएंगे। मानसिक स्वास्थ्य एवं कल्याण कमेटी का गठन किया जाएगा। जिसमें डीन स्टूडेंट वेलफेयर, फैकल्टी प्रतिनिधि, हॉस्टल वार्डेन, कर्मचारी प्रतिनिधि व छात्र प्रतिनिधि भी होंगे। यही नहीं छात्रों के परिवार व पूर्व छात्रों को भी इस कमेटी में शामिल किया जाएगा।




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