यूपी में निर्माण कार्य में पीने के पानी के इस्तेमाल पर रोक, योगी सरकार का फैसला
यूपी की योगी सरकार ने निर्माण कार्यों में पीने के पानी के इस्तेमाल पर रोक लगा दी है। इसके साथ ही निर्माण कार्य के लिए भूगर्भ से पानी लेने के लिए भूगर्भ जल प्राधिकरण से लाइसेंस लेना अनिवार्य होगा।

उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। योगी सरकार ने गिरते भूगर्भ जल स्तर को देखते हुए निर्माण कार्यों में पीने के पानी के इस्तेमाल पर रोक लगा दी है। इसके साथ ही निर्माण कार्य के लिए भूगर्भ से पानी लेने के लिए भूगर्भ जल प्राधिकरण से लाइसेंस लेना अनिवार्य होगा।
प्रमुख सचिव आवास पी. गुरुप्रसाद ने गुरुवार को इस संबंध में शासनादेश जारी किया। आवास विभाग ने कहा है कि गिरते हुए भूजल के लिए वर्षा जल संचयन जरूरी है। इसको लेकर समय-समय पर कई शासनादेश जारी किए गए हैं। शासनादेश में कहा गया है कि भवन निर्माण में अधिकृत जल स्रोतों से जल का उपयोग किया जाएगा। भूगर्भ जल का उपयोग करने से पहले भूगर्भ जल प्राधिकरण से अनुमति लेनी होगी। प्री मिक्स कंक्रीट, क्योरिंग एजेंट आदि का उपयोग करके पानी की कम खपत वाली निर्माण विधियों को अपनाया जाएगा।
खुले स्थानों और मनोरंजन क्षेत्रों में वर्षा जल संचयन की व्यवस्था की जाएगी
निर्माण स्थलों पर पेयजल का उपयोग केवल पानी पीने व मानवीय गविधियों तथा कंक्रीट कार्यों के लिए दिया जाएगा। किसी भी अन्य निर्माण गविधियों के लिए पीने के पानी का इस्तेमाल नहीं किया जाएगा। सभी सार्वजनिक खुले स्थानों और मनोरंजन क्षेत्रों में वर्षा जल संचयन की व्यवस्था की जाएगी। नई योजना बनाने से पहले क्षेत्र का सर्वेक्षण कराया जाएगा। 10 एकड़ से अधिक क्षेत्रफल वाली योजनाओं के ले आउट प्लान में पार्कों और खुले क्षेत्रों के लिए प्रस्तावित भूमि में एक प्रतिशत इसके लिए आरक्षित किया जाएगा।
वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम का कड़ाई से पालन किया जाएगा
पार्कों में कंक्रीट का निर्माण पांच प्रतिशत ही किया जाएगा। ग्रुप हाउसिंग में छतों पर वर्ष जल संचयन प्रणाली की स्थापना की जाएगी। 300 वर्ग मीटर और उससे अधिक सभी तरह के ग्रुप हाउसिंग में इसे अनिवार्य रूप से बनाया जाएगा। वर्षा जल को जरूरी गहराई तक जाने दिया जाएगा, जिससे जल स्रोतों के प्रदूषण की समस्या उत्पन्न न हो। जलभराव वाले क्षेत्रों में पुनर्भरण प्रणाली नहीं अपनाई जानी चाहिए, वहां छतों पर इसे एकत्र किया जाएगा। पार्कों, खुले स्थानों की वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम का कड़ाई से पालन किया जाएगा। ग्राउंड वाटर बॉडीज के संरक्षण के संबंध में परीक्षण के बाद निर्देश जारी किया जाएगा।




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