फंदे पर लटकते पति के लिए ‘सावित्री’ बन गई ये पत्नी, यूं बचा ली जान
24 वर्षीय शिवबहादुर ने कुछ समय पूर्व एक ई-रिक्शा लोन पर लिया था। किस्त न चुका पाने के चलते शिवबहादुर परेशान रहने लगे। सोमवार दोपहर करीब दो बजे मां खेतों की तरफ चली गई वहीं पत्नी दूसरे काम में लग गई। तभी मौका पाकर शिवबहादुर ने फांसी लगा ली। उस वक्त किसी की नजर उन पर नहीं पड़ी।

यूपी के हमीरपुर के पारा गांव में एक पत्नी अपने पति के लिए सावित्री बन गई। दरअसल सोमवार को एक युवक ने आत्महत्या के लिए फांसी लगाई। अचानक नजर पड़ने पर पत्नी दौड़कर पहुंची और पति के पैरों को पकड़कर ऊपर उठा लिया। शोर सुन पड़ोसी-परिजन पहुंचे और युवक को नीचे उतार मौदहा सीएचसी ले गए। वहां से जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया। जिला अस्पताल में हालत में सुधार होने पर पत्नी, पति को घर ले आई।
बिवांर थानाक्षेत्र के पारा गांव निवासी 24 वर्षीय शिवबहादुर ने कुछ समय पूर्व एक ई-रिक्शा लोन पर लिया था। किस्त न चुका पाने के चलते शिवबहादुर मानसिक रूप से परेशान रहने लगे। सोमवार दोपहर करीब दो बजे मां खेतों की तरफ चली गई वहीं पत्नी दूसरे काम में लग गई। तभी मौका पाकर शिवबहादुर ने फांसी लगा ली। उस वक्त किसी की नजर उन पर नहीं पड़ी। शिवबहादुर फंदे से लटकने लगे। उनकी हालत खराब होने लगी।
संयोग से इसी वक्त पत्नी चंचल की नजर अचानक फंदे पर लटके पति पर पड़ गई। पति को फंदे से लटकता देख पत्नी दौड़ पड़ी। पति की जान बचाने का कोई उपाय न सूझा तो पत्नी ने तुरंत उनके पैरों को पकड़कर ऊपर उठा लिया। इसके साथ ही वह शोर मचाने लगी। चंचल की पुकार सुनकर परिजन दौड़े-दौड़े मौके पर पहुंचे। कुछ पड़ोसी भी वहां जुट गए। सबने आनन-फानन में शिवबहादुर के गले से फंदे को निकाला और अस्पताल ले गए। देर शाम शिवबहादुर को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। पत्नी की सूझबूझ और हिम्मत के चलते शिवबहादुर की जान बच गई। चंचल की बहादुरी के चर्चे पूरे गांव में हो रहे हैं। वहीं लोगों ने शिवबहादुर को समझाया कि परिस्थितियों का सामना बहादुरी से करें। आत्महत्या किसी भी समस्या का समाधान नहीं हो सकती। कोई भी समस्या ऐसी नहीं होती कोशिश करके जिसका समाधान न किया जा सके।




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