सपा ने क्यों तोड़ा I-PAC से नाता? ओपी राजभर ने बताई कहानी, अखिलेश से पूछा ये सवाल
ओपी राजभर ने सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि सपा और I-PAC की फंडिंग पश्चिम बंगाल के कथित कोयला घोटाले से जुड़े पैसों से हो रही थी। लेकिन बंगाल में ममता की हार के बाद उन्होने ये डील तोड़ दी है। राजभर ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर जवाब मांगा है।

योगी सरकार में कैबिनेट मंत्री और सुभासपा अध्यक्ष ओपी राजभर ने समाजवादी पार्टी पर बड़ा हमला बोलते हुए सोशल मीडिया पर लंबी पोस्ट साझा की है। सुभासपा अध्यक्ष ने सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव की चुनावी रणनीति कंपनी I-PAC के संबंधों को लेकर कई गंभीर आरोप लगाए हैं। ओपी राजभर ने कहा कि पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने आई-पैक नाम की राजनीतिक रणनीति कंपनी को अपने चुनावी अभियान के लिए नियुक्त किया था। साथ ही उसे उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी के लिए पूरक काम करने का निर्देश भी दिया गया था।
राजभर ने दावा किया कि मीडिया रिपोर्टों के अनुसार आई-पैक की फंडिंग पश्चिम बंगाल में हुए कथित कोयला घोटाले के पैसों से की जा रही थी। उन्होंने आरोप लगाया कि हवाला के जरिए यह पैसा उत्तर प्रदेश में आई-पैक की शाखा तक पहुंचाया जाना था, जहां सपा के चुनावी अभियान की तैयारियां चल रही थीं।
सुभासपा अध्यक्ष ने कहा कि अखिलेश यादव के लिए दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति तब पैदा हुई जब ममता दीदी बंगाल में हार गईं। और कथित तौर पर फंडिंग रुक गई। राजभर ने तंज कसते हुए कहा कि यही वजह रही कि करीब ढाई महीने तक काम कराने के बाद समाजवादी पार्टी ने आई-पैक से दूरी बना ली।
उन्होंने अपनी पोस्ट में सीधे सवाल करते हुए लिखा, “इसका जवाब दीजिए अखिलेश जी?” राजभर की इस पोस्ट के बाद प्रदेश की राजनीति में नई बहस छिड़ गई है। हालांकि समाजवादी पार्टी की ओर से अभी तक इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। राजनीतिक जानकार इसे आगामी चुनावों से पहले बयानबाजी और राजनीतिक दबाव बनाने की रणनीति के तौर पर देख रहे हैं।
सपा की I-PAC से डील टूटी, फंड्स की कमी बताई
आपको बता दें इलेक्शन मैनेजमेंट कंपनियों (IPAC) पर बात करते हुए अखिलेश ने स्वीकार किया कि पार्टी के पास फंड्स की कमी है। उन्होने बताया कि पार्टी ने 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों से पहले थोड़े समय के लिए I-PAC को काम पर रखा था, लेकिन इस व्यवस्था को जारी नहीं रख सके। हमारा इस कंपनी के साथ करार हुआ था। उन्होंने हमारे साथ कुछ महीनों तक काम किया, लेकिन हम इसे जारी नहीं रख पा रहे हैं। हमारे पास उस तरह का फंड नहीं है, कि हम चुनाव की योजना बनाने पर खर्च कर सकें।
उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि इलेक्टोरल बॉन्ड और धार्मिक चंदा भी बीजेपी ही ले रही है। हालांकि, उन्होंने साफ किया कि 2027 में PDA (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) मिलकर चुनाव जीतेगा। उन्होने कहा कि बीजेपी के इस नए चुनाव मॉडल के खिलाफ रणनीति बनाएंगे, ताकि आने वाले समय में लोकतंत्र सुरक्षित रहे।




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